राष्ट्रीय सहारा, पटना से खबर है कि मार्केटिंग विभाग के लोगों द्वारा टारगेट पूरा न किए जाने के कारण यूनिट हेड मृदुल बाली ने इन्हें दंडित करने का नायाब तरीका निकाला है. सूत्रों के मुताबिक मृदुल बाली ने सेलरी रोकने का फरमान जारी कर दिया है. इससे खफा मार्केटिंग के लोगों ने सहारा के शीर्ष प्रबंधन से गुहार लगाई. तब जाकर इनकी सेलरी तो रिलीज कर दी गई है लेकिन टेलीफोन बिल, इंटरटेनमेंट व पेट्रोल के मद में मिलने वाले पैसे को रोक दिया गया है.
एक अन्य जानकारी के मुताबिक सहाराश्री सुब्रत राय सहारा के पिताजी के जन्मदिन के मौके पर सहाराकर्मियों ने आफिस ज्योति दिवस मनाया. इसमें पटना में करीब पचास से ज्यादा कर्मियों को कूल जग वगैरह दिए गए. ज्योति दिवस के कार्यक्रम में फाइनेंस के लोग सिविल ड्रेस में आए थे जबकि अन्य लोगों के लिए सहारा की वर्दी में आने का फरमान था, सो, बाकी लोग ड्रेस कोड का पालन करते नजर आए.












rupesh
April 10, 2011 at 6:00 am
यशवंत भाई , आर्यन टीवी के बारे में आपने जो भी खबर प्रकाशित की वो तमाम खबरे केवल सही नहीं बल्कि एक कठुत्य सत्य है जीतनी भी खबरे इन दिनों आई वो तमाम खबरे आर्यन टीवी की सच्चाई है चाहे वो रिपोर्टरों और stringero से 100 लोगो से दो दो हज़ार वसूलने की बात हो या फिर 20 मुखिया से ५- पाच हज़ार वसूलने की बात हो सब में सच्चाई चीख चीख कर यही कह रही है की आर्यन प्रबंधक आपने मार्केटिंग टीम को दुरुस्त करने की वजाय रिपोर्टरों और Stringero को वसूली भाई बनाने me जी जान से लगा है , कुछ लोग है जो आर्यन प्रबंधक को इस तरह की वाहियात आईडिया देते है और प्रबंधक इसे फरमान की तरह जारी कर देता है ,
यशवंत जी मै एक बात और बता दू की बहुत जल्द कई लोगो की छटनी होनी है कारन है , कई फिल्ड रिपोर्टरों और stringero ने इस वाहियात वसूली का पुर जोर विरोध किया है , जल्द ही ऐसे लोगो की छटनी होनी है , ये लोग इतने बेशर्म है की होली के मौके पर आपने फिल्ड रिपोर्टरों की तन्खवाह इस बात को कह कर रूक रखे है की जहा से बढ़ी वहश के लिए बढ़ी वशुली रकम नहीं आती है वहा तनख्वाह की गुंजाईश नहीं है , जहा बढ़ी बहश हो चुकी है वहा के रिपोर्टरों को तनख्वाह मिल गई है जहा नहीं हुई है वहा उन रिपोर्टरों को स्ट्रिन्गेर बनाने की बात है या फिर नौकरी से हटाने की साजिश चल रही है ….अब सवाल ये है यशवंत भाई की संजय मिश्र और सर्वेश जी ने कई चैनल में कार्रत स्टाफर रिपोर्टर को विभिन्य चैनल के छुरा कर आर्यन ज्वाइन कराया था , ऐसे में अगर आर्यन प्रबंधक हम जैसे लोगो से साथ इस तरह की साजिश कर रहा है तो हम क्या करे ? यशवंत जी ना ना प्रकार के हम जैसे लोगो के साथ कभी चैनल के प्रबंधक तो कभी चैनल के बरे लोग हमारा सोसान करते है , हम लोग ना घर के रहे और ना घाट के रहे , कई सालो से किसी चैनल में छोटे रिपोर्टर की ही तरह पर तनख्वाह मिल रही थी आर्यन के चक्कर में वो तो गई ही , अब ये भी जाने की कगार में है ,,,