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वाह रे यूपी पुलिस : ग्रामीणों ने लूट में दबोचा, थानेदार ने गांजे में भेजा

बस्ती जिले की पुलिस अपराधों को तोड़-मरोड़कर परोसने और अपराधियों को किसी न किसी तरीके से फायदा पहुंचाने में माहिर है। ऐसा ही एक मामला बस्ती जिले के दुबौलिया थाना क्षेत्र में सामने आया है। बरदिया लोहार बालू खदान पर हूटर लगी बोलेरो गाड़ी ‘जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार भी लिखा था’ से 6 लुटेरे लूट को अंजाम देकर जब भाग रहे थे तो ग्रामीणों ने एक को दबोच कर पुलिस के हवाले कर दिया।

बस्ती जिले की पुलिस अपराधों को तोड़-मरोड़कर परोसने और अपराधियों को किसी न किसी तरीके से फायदा पहुंचाने में माहिर है। ऐसा ही एक मामला बस्ती जिले के दुबौलिया थाना क्षेत्र में सामने आया है। बरदिया लोहार बालू खदान पर हूटर लगी बोलेरो गाड़ी ‘जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार भी लिखा था’ से 6 लुटेरे लूट को अंजाम देकर जब भाग रहे थे तो ग्रामीणों ने एक को दबोच कर पुलिस के हवाले कर दिया।

परन्‍तु अपने धर्म व ईमान को ताक रखकर पुलिस ने  ग्रामीणों की जांबाजी को तमाचा मारते हुये पकड़े गये बदमाश को गांजे मे चालान कर जेल भेज दिया। गत 5 अप्रैल की शाम को बरदिया लोहार बालू खदान पर हूटर लगी बोलेरो से 6 लुटेरे आये थे। इनकी गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार का बोर्ड भी लगा था। खदान मुन्सी उमाशंकर चौधरी से असलहे के बल पर 63 हजार लूट कर जब ये लुटेरे भाग रहे थे तो ग्रमीणों ने घेर लिया। अफरा तफरी का फायदा उठाकर पांच लुटेरे अन्धेरे में भाग गए। मगर इनमें से एक शिवाकान्त ग्रमीणों के हत्थे चढ़ गया। जिसे बाद में ग्रामीणों ने पुलिस के हवाले कर दिया।

पकड़े गये बदमाश को पहले तो पुलिस ने लुटेरा ही बताया लेकिन बाद में इस पूरी घटना की लीपापोती कर लूटपाट की वारदात को झगड़ा करार देने लगी। इतने पर ही बस हो जाता तो ठीक था, लेकिन वाह रे दुबौलिया पुलिस! अपराधी शिवाकान्त को थानेदार अमरेन्द्र राय ने अगले दिन लूट या झगड़े में भेजने की बजाय 1100 ग्राम गांजे में चालान कर जेल भेज कर अपने दोनों बयानों को झूठा भी साबित कर दिया। वहीं पुलिस ने अन्य पाचों अपराधियों को उनकी उंची पहुंच के चलते थाने की हवा तक नहीं लगने दी।

ऐसा नहीं कि इस सनसनीखेज घटना का मीडिया ने खुलासा न किया हो, बावजूद इसके उच्च अधिकारियों ने इस थानेदार पर कोई दण्डात्मक कार्रवाई करने की बजाय इसकी तैनाती एक अच्छे थाने पर कर दिया। जहां एक ओर आवाम का भरोसा पुलिस की इस कार्रवाई से टूटा है। वहीं गांजे की थाने में मौजूदगी भी सवाल खड़े कर रही है। इस कार्रवाई से यह बात सोलह आने सच है कि पुलिस गांजे के कारोबार में संलिप्त है, वरना गांजा पुलिस कहां से पाती। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने शिवाकान्त को पकड़ने के बाद पहले जमा तलाशी लिया था, जिसमें उनके पास से कुछ भी ऐसा नही मिला था। तो सवाल यह उठता है कि आखिर पुलिस के पास गांजा कहा से आया। पुलिस का ताल्लुक जरूर गांजे के कारोबारियों से है। जिन्हें इस तरह के पुलिस वालों का संरक्षण प्राप्त है।

बस्‍ती से सैयद मजहर हुसैन की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. vineet kumar

    April 11, 2011 at 5:43 pm

    yah hal up main har jagha hai. sabse bharast police ko sabse aham jemadari de jati hai.;)

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