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‘मुर्दों के पैसे भी पुलिस अधिकारियों की जेब में’

: सुबोध यादव ने आरटीई डालकर ली जानकारी : पुलिस विभाग में हर साल करोड़ों की धांधली का खुलासा हुआ है. यह रकम है लावारिस मुर्दों की, इसे भी विभाग के अफसर नहीं छोड़ रहे हैं. वे हर साल इस मद की रकम हड़प जाते हैं और खमियाजा भुगतते हैं दरोगा और सिपाही, जो इन लावारिस शवों का पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार कराने जाते हैं. बरसों से हो रही ज्यादती के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुबोध यादव ने आवाज उठाई है और उन्होंने प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह से उत्तर प्रदेश पुलिस के चार लाख अराजपत्रित पुलिस कर्मियों के लिए न्याय की मांग की है.

: सुबोध यादव ने आरटीई डालकर ली जानकारी : पुलिस विभाग में हर साल करोड़ों की धांधली का खुलासा हुआ है. यह रकम है लावारिस मुर्दों की, इसे भी विभाग के अफसर नहीं छोड़ रहे हैं. वे हर साल इस मद की रकम हड़प जाते हैं और खमियाजा भुगतते हैं दरोगा और सिपाही, जो इन लावारिस शवों का पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार कराने जाते हैं. बरसों से हो रही ज्यादती के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुबोध यादव ने आवाज उठाई है और उन्होंने प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह से उत्तर प्रदेश पुलिस के चार लाख अराजपत्रित पुलिस कर्मियों के लिए न्याय की मांग की है.

उत्तर प्रदेश पुलिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुबोध यादव ने कुछ माह पहले जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005  के अंतर्गत उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया से जानकारी मांगी थी कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन द्वारा क्या व्यवस्था मुक़र्रर की गई है और इस मद में कितना धन दिये जाने का प्रावधान है. लम्बी टालमटोल के बाद पुलिस विभाग ने 5 जुलाई 2010   में एक पत्र और शासनादेश की छाया प्रति, जो प्रदेश के महामहिम राज्यपाल द्वारा जारी है,  के द्वारा न सिर्फ उनकी शंकाओं का निवारण हुआ, बल्कि बेहद चौंकाने वाली जानकारी भी मिली. पुलिस मुख्यालय के जनसूचना अधिकारी अशोक कुमार अपर पुलिस अधीक्षक ने शासनादेश संख्या स०- 1753/26-2-99-500(13)/99  दिनांक 16 जुलाई में 500 रुपये थी यह व्यवस्था 17 नवम्बर 2008 से लागू की गयी  थी, जिसे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के साथ प्रदेश के वित्त विभाग ने भी मंजूरी दी थी.

महंगाई दर में लगातार वृद्धि के कारण 17  नवम्बर 2008 के शासनादेश संख्या: डब्लू- 1733/ 6-पु-08-1500 (11)/ 98 टीसी -11 दिनांक 17 नवम्बर 2008  द्वारा 1500 रुपया कर दी गयी थी. आदेश में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल ने खर्च का वर्गीकरण भी किया था, जिसके तहत 1500 रुपये में 200  रुपये कफ़न के 6 मीटर कपडे़ पर, 900 रुपये शव दहन की लकड़ी या कब्र की खुदाई पर और बाकी 400 रुपये शव को कब्रिस्तान या श्‍मशान ले जाने के किराये पर खर्च के लिए निर्धारित किये गये थे.

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सुबोध यादव ने बताया कि उन्होंने आज प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को एक शिकायती प्रार्थना पत्र भेजा है,  जिसमें प्रदेश के 4 लाख पुलिसकर्मियों के साथ हो रही ज्यादती पर न्याय करने की मांग की है.  इसी प्रार्थना पत्र में सुबोध यादव ने कहा है कि प्रदेश के पुलिस कर्मियों को नहीं पता है कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन द्वारा 1500 रुपये प्रदत्त किये जाते हैं. थोड़े पुलिस कर्मियों को रुपये मिलने का तो पता है मगर यह पता नहीं है कि इस मद में कितना भुगतान निर्धारित है. इस रकम के लिए मोटी लिखा-पढ़ी और लम्बे इन्तजार/ आईपीएस अफसरों से स्थानान्तरण / विभागीय कार्रवाई के डर से पुलिसकर्मीं शासन के रुपयों का लालच छोड़ देते हैं और अपनी जेब से रुपया खर्च कर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराते हैं.

इस मद में शासन द्वारा मुकर्रर रकम कहाँ जाती है ये बात किसी भी सिपाही और दरोगा को नहीं पता है.  सुबोध यादव का कहना है कि जल्द ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करायी जाये और दोषी अफसरों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई कर मुकद्दमा चलाया जाये, आखिर अब तक कितने करोड़ रुपये का घोटाल पुलिस के वरिष्‍ठ अधिकारी कर चुके हैं.

आप सुबोध यादव से संपर्क उनकी मेल आई-डी [email protected] के जरिए कर सकते हैं.

इटावा नीरज महेरे की रिपोर्ट.

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