
आरती
लेकिन इस दुल्हन को न तो स्वागत नसीब हुआ, न कोई उसे देखने आया और न ही उसे अब तक पति का साथ मिल पाया है. ये वही भट्टा गाँव जहाँ ज़मीन को लेकर हुई लड़ाई में कई किसान मारे जा चुके हैं. आरती अपने साथ न जाने कितने सपने, कितने अरमान संजोकर लाई थी. लेकिन उसे शायद अंदाज़ा नहीं था कि जिस सुबह उसके क़दम एक नए जीवन की ओर बढ़ रहे थे, वो सुबह गाँव के लिए कितना दर्द लेकर आने वाली है. सात मई को आरती दुल्हन बनकर भट्टा गाँव पहुँची तो बैंड बाजे और शहनाइयों की जगह गोलियों की धाँय-धाँय ने उसका स्वागत किया जिसने कई गाँववालों को मौत की नींद सुला दिया. घटना के चंद दिन बाद जब हम आरती की तलाश में भट्टा गाँव में उनके घर पहुँचे तो वो एक कमरे में दुबकी बैठी थी.
कुछ हिचकिचाते हुए मैने बात करने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया फिर कुछ सोचा और मान गईं. दबी आवाज़ में उसने अपनी कहानी सुनानी शुरु की, “मेरे आने से पहले से ही गाँव का माहौल तनावपूर्ण था. ससुराल की दहलीज़ लाँघे चंद घंटे ही हुए थे कि पुलिस आ धमकी. पहले तो बाहर ही थी पुलिस लेकिन फिर घर में घुस आए. मेरे ससुर जी को ख़ूब पीटा. जेठ और देवर दोनों को पकड़ कर ले गए. नई बाइक आई थी वो भी तोड़ दी, गाली गलौच की.”
मन के अरमान : अपने पति का नाम न लेते हुए आरती बताती हैं, पुलिस उन्हें भी ले जाने लगी. मेरी जेठानी ने उन्हें बताया कि अभी अभी बारात आई है. तो जाकर उन्हें छोड़ा. आरती के पति को पुलिस ने छोड़ तो दिया लेकिन वो उसी दिन से अस्पताल में हैं. ससुर को गंभीर चोट लगी है तो जेठ और देवर जेल में बंद पड़े हैं. आरती की जेठानी बताती हैं कि उन्हें तो महसूस ही नहीं हो रहा है कि घर में शादी हुई है, या दुल्हन आई है. सब बेकार हो गया…ये कहते-कहते वे रुक जाती हैं. उस दिनों ज़ोरों की गर्मी थी और मैं कई किलोमीटर पैदल चल कर वहाँ पहुँच थी.
बात-बात करते शायद परिवारवालों की नज़र मेरे थके हुए चेहरे पर पड़ी होगी तो दुल्हन आरती मेरे लिए पानी का गिलास ले लाई. गिलास पकड़ते समय मैने आरती के हाथ देखे- हाथों की मेंहदी की लाली अभी गई नहीं थी. आगे कुछ न पूछने का मन हुआ न साहस. हिंसा और गोलीबारी के बाद पूरे गाँव में मातम का माहौल है, पति कब लौटेगा पता नहीं. लिहाज़ा दुल्हन अभी अपने मायके लौट रही है. शायद इस उम्मीद के साथ कि जब लौटेगी तो उसे दुल्हनों वाला वो सब लाड़-चाव मिलेगा जिसकी उसके मन में हसरत होगी.
बीबीसी संवाददाता वंदना की रिपोर्ट. इस रिपोर्ट को बीबीसी डॉट कॉम से साभार लेकर यहां प्रकाशित कराया गया है.












SANDEEP
May 17, 2011 at 10:33 am
आप क्यों परेशान है दूसरों की दुल्हन से,
जब उनके मियां, नहीं डरे सरकार से
krishna murari
May 17, 2011 at 1:18 pm
bbc wale shuru se kendra sarkari reporter rahe hain aisi batein kar kar ke koi croro ka sarkari project hathiyanege aur jindgi bhar chain se khayenge bhatta parsol me jo hua ya ho raha hain sab jante hain ki isme kya kya rajniti chal rhi hai. aag aag chillane se log vishwas nhi karenge ki aag lag gayi unhe dhuan uthte bhi dikhana padega.
कमल शर्मा
May 18, 2011 at 6:54 am
यमुना एक्सप्रेस वे के लिए जो राजनीति हो रही है उसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। असल में वहां किसान मरे भी या नहीं। या केवल राजनीतिक हायतौबा तो नहीं की जा रही। राहुल गांधी का इंटरेस्ट किसान हित से ज्यादा यूपी की कुर्सी के प्रति है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। यदि काफी किसानों की जान चली गई और मारा पीटा गया है तो राहुल गांधी के लिए इसकी तत्काल जांच शुरु करवाना कोई कठिन काम नहीं है। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री उनकी एक आवाज पर सारी जांच शुरु करवा सकते हैं। फिर जांच क्यों नहीं हो रही।