पिछले दिनों मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ से ”प्रदेश टुडे” नामक सांध्य दैनिक लांच हुआ. यह अखबार सिर्फ मीडिया वालों के बीच चर्चा का विषय बनकर रह गया क्योंकि इस अखबार में मीडिया वालों की खबरें भी नमक मिर्च लगाकर छपा करती हैं. अखबार के अलावा ”प्रदेश टुडे” नाम से मासिक मैग्जीन का भी प्रकाशन किया जाता है जो कहीं चर्चा में नहीं आ पाया और किसी भी तरह का प्रभाव छोड़ने में असफल रहा.
आम जनता तक पैठ बना पाने में नाकाम रहे इस अखबार व मैग्जीन के संपादक और प्रबंधक अब इसी नाम से चैनल चलाने की तैयारी कर रहे हैं. भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार हृदयेश दीक्षित की चेयरमैनशिप वाला वीएनएस ग्रुप अब प्रदेश टुडे के नाम से रीजनल न्यूज चैनल लांच करेगा. मजेदार यह कि इस चैनल को अभी लाइसेंस नहीं मिला है लेकिन चैनल लाने की चर्चा मार्केट में तेजी से फैलाई जा रही है. मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में पहले से ही कई रीजनल चैनल हैं जिनमें ज्यादातर उगाही, ब्लैकमेलिंग, पेड न्यूज जैसे कामों में लिप्त हैं. ऐसे में एक और चैनल पत्रकारिता या जनता का कितना भला करेगा, देखने लायक होगा.
प्रदेश टुडे के जनरल मैनेजर उपदेश अवस्थी हैं, जो पहले राज एक्सप्रेस में थे. स्ट्रिंगर नियुक्ति से लेकर कई तरह के कामों को उपदेश देख रहे हैं. हृदयेश दीक्षित भी पहले राज एक्सप्रेस में थे. प्रदेश टुडे में काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो राज एक्सप्रेस से हटने या हटाए जाने के बाद कहीं सेटल नहीं हो पाए तो इस नए प्रदेश टुडे अखबार के हिस्से बन गए. हालांकि इस अखबार से जुड़े कई लोग बाद में चुपचाप चले भी गए.












मनोज जैन
May 27, 2011 at 11:58 am
हा..हा..हा.
यशवंत जी लगता है आपके पोर्टल के माध्यम से पिछले अतिक्रमण सम्बन्धी चर्चाओं में समूह द्वारा भगाए गए ” श्रीमान समूह सम्पादक ” अपनी खुन्नस निकाल रहे है . कई साल पहले कमसिन लड़कियो के साथ मेघदूत नामक होटल में नंगे अवस्था में पकडे गए महाशय इस अखबार के भोपाल में देशभर में सर्क्युलेशन की नामी संस्था एबीसी ( ओडिट ब्यूरो अफ इण्डिया ) के दावे पर गौर करे 40,000 से अधिक प्रतिया प्रतिदिन और करीबन 4.15 लाख पाठक संख्या वाले इस अखबार ने भोपाल में सांध्य अखबार की गंभीरता को बखूबी समझा है , मात्र एक रुपये में 12 रंगीन पेजों में लगभग वह सब चीज़ हमें उसी दिन पढ़ने को मिल जाती जो बड़े अखबार दूसरे दिन छापते है . रही बात मैगजीन की तो समय में नहीं मिल पाने के कारण उसकी उपलब्धता अभी भी सीमित बनी हुई है .कृपया भड़ास4मीडिया में ऐसी ख़बरें छापने से पूर्व उसकी हकीकत जानने का प्रयास करे यशवंत जी जिससे इस शानदार पोर्टल की प्रतिष्ठा बनी रहे .
prateek
May 27, 2011 at 4:37 pm
jahan tak akhbaar aur magazine ki baat hai to usne apni gajah poore pradesh mein bana li hai,har jagah akhbar charcha mein hai,pata nhi kisko yeh galatfehmi ho rahi hai ki yeh asafal hua hai.,,,,,
shayad koi hajam nahi kar paa raha hai hridesh ji ki success ko.
aur jahan tak electronic channel ki baat hai to woh bhi jaldi hi launch hoga aur dhamaka zaroor hoga…..
सचवाचक
May 27, 2011 at 9:29 pm
अरे कुछ नहीं कर पा रहा है प्रदेश टुडे …चने भी नहीं बिक रहे है उस पर …
सवाल यह है कि इस ग्रुप के पास इतनी लागत कहाँ से आ रही है?
दूसरी बात जिस धमाके के साथ शुरुआत कि बात इसने की थी,वह कभी नहीं हो सकता था और न ही हुआ …मात्र सनसनीखेज़ पत्रकारिता काथोथा उदाहरण बनकर रह गया है .
पते कि बात : जो टीम इसमें लगी है उनकी मार्केट वेल्यु कुछ है भी या नहीं ?…..या वो सिर्फ मार्केट तलाश रहे है …..
वैसे भी आजकल जहा देखो वहाँ राडिया देवी के भक्त मीडिया को सुशोभित कर रहे है.
एक कर्मचारी राज एक्सप्रेस
May 28, 2011 at 7:17 am
यशवंत जी, मध्यप्रदेश कि पत्रकारिता को रविन्द्र जैन के चश्मे से देखना बंद कर दो. प्रदेश टुडे भोपाल में दमदारी के साथ चल रहा है. पूरा भोपाल प्रदेश टुडे के साथ है. कोण सफल हुआ कोण बिफल ये प्रमाणपत्र जारी करना बंद कर दो. आपके व्यक्तिगत और पोर्टल के लिए अच्छा रहेगा. ये केवल सलाह है वो भी मुफ्त चाहो तो रख लो नही तो जाने दो. सम्मान आपका, पोर्टल आपका जो चाहो करो.
HARIOM GOLA
May 28, 2011 at 8:32 am
aise baat nahi kosiss karenage to chal hi jayega
Sheela Bajpayee
May 29, 2011 at 6:56 am
यशवंत जी,
ह्रदयेश दीक्षित कभी भी पत्रकार की श्रेणी में नही गिने गये,इनकी शोहरत तो ब्लॅकमेलर और दलाल के बतौर रही है.५००० कॉपी भी प्रदेश टुडे की बिक नही रही है.दावे ५०००० के किए जा रहे हैं.यह जाँच का विषय है की ह्रदयेश के पास इतना पैसा कहाँ से आया .वैसे मिड डे मील सप्लाइ का ठेका इन्ही का है.योगिराज शर्मा के ये पार्टनर रहे हैं.और जिस वी एन एस ग्रूप का नाम जुड़ा है.उसके मालिक सुधीर शर्मा राज्य के जनसंपर्क मंत्री के भ्राता हैं.जनसंपर्क मंत्री की शोहरत किन्ही अन्य संपर्कों के कारण ज़्यादा है.ह्रदयेश को सहारा से बे इज़्ज़त हो कर जाना पड़ा था .कारण सारे मीडिया को पता है.कोई भी अख़बार या चॅनेल दल्लो और ब्लैक मेलरों के दम पर नही चलती.नही तो आज वोईस ऑफ इंडिया हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा चॅनेल होता.
mohansing
May 30, 2011 at 1:44 pm
yashwantji
suna he ravindra jain ne aapko moti rakm aapke portel ke liye de he. es luye bo chichora jo kah raha he bo ker re ho
pradeepsharma
May 30, 2011 at 1:46 pm
aapki bat me dam nshi he
shravanjha
June 21, 2011 at 10:44 am
verry nice