बस्ती जिले के वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र नारायण निर्भीक का लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 60 वर्ष के थे। जनपद के पत्रकारों, समाजसेवियों जनप्रतिनिधियों ने शोक सभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया। 60 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार के निधन की सूचना मिलते ही जिले के पत्रकारों मे शोक की लहर दौड़ गयी। स्व. निर्भीक को श्रद्धांजलि देने के लिये नवबस्ती के कार्यालय पर सम्पादक अशोक कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता मे शोक सभा का आयोजन किया गया।
सभा को सम्बोधित करते हुये पत्रकार अनिल कुमार ने कहा कि स्व. निर्भीक का जन्म हर्रैया तहसील के कोपवा गांव में हुआ था। सामाजिक सरोकारों में उनकी गहरी रुचि थी और खोजी पत्रकारिता के लिये उन्हें सदैव याद किया जाएगा। स्व. निर्भीक ने जनवरी 1979 मे नवबस्ती से अपने पत्रकारिता की शुरुआत की और कई समाचार पत्रों मे लेखन सम्पादन का कार्य करते रहे।
इस वरिष्ठ पत्रकार का अंतिम संस्कार अयोध्या की पावन नदी सरयू के तट पर किया गया। वे अपने पीछे पत्नी, 5 पुत्र और 2 पुत्रियां छोड़ गये हैं। शोक सभा मे वरिष्ठ पत्रकार मजहर आजाद, दिनेश चन्द्र पाण्डेय, लक्ष्मी नारायण पाण्डेय, कौशल किशोर श्रीवास्तव, जयंत मिश्र, प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र गुप्त, महामंत्री विनोद उपाध्याय, प्रदीप चन्द्र पाण्डेय, अरविन्द श्रीवास्तव, संदीप गोयल, राम अजोर पाण्डेय, राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय, महेन्द्र तिवारी, अनवर अली, देवी प्रसाद श्रीवास्तव, आलोक कुमार श्रीवास्तव, शिक्षाविद नवीन चन्द्र श्रीवास्तव , समाज सेवक जगदीश शुक्ल, साइमन फारुकी, आदि ने शोकाकुल मन से स्व. उपेन्द्र नारायण की मृत्यु को पत्रकारिता जगत की भारी क्षति बताया। पत्रकार सैयद मजहर हुसेन, श्रीश द्विवेदी, धर्मेन्द्र पाण्डेय, जय प्रकाश उपाध्याय, वसीम अहमद, अरविन्द श्रीवास्तव ने स्व0 निर्भीक को श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुये कहा कि उन्हे एक अच्छे पत्रकार और समाजसेवी के रूप में हमेशा याद किया जाता रहेगा।
बस्ती से सैयद मजहर हुसैन की रिपोर्ट












SYED SHAHAN -Intls. Petroleum Dubai
May 31, 2011 at 9:52 am
REALLY VERY BIG LOSS….
GOD GIVE HIM SPACE AND PEACE IN HEAVEN AND MY SYMPATHY WITH HIS COMPLETE FAMILY AND GOD GIVE STRENGHT TO HIS FAMILY TO BEAR THIS DIFFICULT TIME. GOD BLESSING
संजय द्विवेदी
May 31, 2011 at 10:30 am
एक योग्य पत्रकार को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। मैंने उन्हें देखा था, कई बार मुलाकात भी की। वे हमेशा हम जैसे नौजवानों के लिए प्रेरणा का केंद्र रहे।