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हिंदुस्तान ने अमर उजाला की और दैनिक भास्कर ने समय जगत की खबर चुराई!

खबर चोरी की दो जानकारियां मेल के जरिए भड़ास के पास पहुंची हैं. एक तो ये कि आगरा में अबकी हिन्दुस्तान ने अमर उजाला की बाईलाइन खबर चुरा ली. अमर उजाला में छपने के करीब 15 दिन बाद यही खबर सिटी इंचार्ज ने अपने नाम से छाप ली. इससे पहले कॉम्पैक्ट की खबर चुराकर छाप चुका है हिन्दुस्तान का रिपोर्टर. हिन्दुस्तान, आगरा में अमर उजाला की बाईलाइन खबर को थोड़ा सा फेरबदल करके हिन्दुस्तान ने बाईलाइन छाप दिया है.

खबर चोरी की दो जानकारियां मेल के जरिए भड़ास के पास पहुंची हैं. एक तो ये कि आगरा में अबकी हिन्दुस्तान ने अमर उजाला की बाईलाइन खबर चुरा ली. अमर उजाला में छपने के करीब 15 दिन बाद यही खबर सिटी इंचार्ज ने अपने नाम से छाप ली. इससे पहले कॉम्पैक्ट की खबर चुराकर छाप चुका है हिन्दुस्तान का रिपोर्टर. हिन्दुस्तान, आगरा में अमर उजाला की बाईलाइन खबर को थोड़ा सा फेरबदल करके हिन्दुस्तान ने बाईलाइन छाप दिया है.

अमर उजाला, आगरा ने अपने 16-5-11 के अंक में पेज नंबर 3 पर टॉप बॉक्स के रूप में शरद माहेश्वरी की बाईलाइन छापी थी. शीर्षक था – कुर्सी के लिए मुलायम को टोटका. इसमे सात जून से होने वाले सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन की जानकारी दी गई है. यह भी बताया गया है आगरा में इससे पहले दो बार सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन और कार्यकारिणी की बैठक हुई है. इसके अगले चुनाव में मुलायम सिंह को मुख्यमंत्री पद की कुर्सी मिली है. इसी कारण 2012 के चुनाव के मद्देनजर आगरा में एक बार फिर से राष्ट्रीय अधिवेशन हो रहा है. यह ब्रेकिंग न्यूज थी, जिसे अमर उजाला ने ब्रेक किया. यही खबर हिन्दुस्तान, आगरा ने अपने 30-5-2011 के अंक में page-4 पर रामकुमार शर्मा की बाईलाइन के रूप में छापी है. शीर्षक है- क्या आगरा से फिर मिलेगी सत्ता की चाभी. इस खबर में विशेष टिप्पणी के रूप में तीन छोटी हेडिंग दी गई हैं. ये हैं- दो बार आगरा में कार्यकारिणी के बाद बनी है सपा की सरकार, आनन-फानन में तय किया गया आगरा में अधिवेशन, पहली बार होगा केवल कपड़े की झंडियों का प्रयोग. पूरी खबर में केवल कपड़े की झंडियों का प्रयोग ही नई बात है. बाकी पूरी खबर अमर उजाला से टीप दी गई है. हूबहू नहीं, घुमा-फिराकर.

यह खबर अमर उजाला से कितनी प्रभावित है, इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि अमर उजाला की हेडिंग में प्रयोग किया गया शब्द टोटका का भी प्रयोग हिन्दुस्तान ने किया है. हिन्दुस्तान को लगा होगा कि अमर उजाला में खबर छपे 15 दिन हो गए हैं, सब भूल गए होंगे. लेकिन खबरों पर निगाह रख रहे मीडिया वाच ग्रुप ने मामला पकड़ लिया. मुझे पता लगा है कि रामकुमार शर्मा हिन्दुस्तान के सिटी इंचार्ज हैं. जब सिटी इंचार्ज ही दूसरे अखबार से खबर चुराकर लिखेगा तो बाकी लोग क्या करेंगे, अंदाज लगाया जा सकता है.
आपको याद हो तो इससे पहले हिन्दुस्तान ने अमर उजाला कॉम्पैक्ट की खबर चुराकर अपने पहले पेज पर बाईलाइन छापी थी. भड़ास ने इसका प्रकाशन किया था.  उस प्रकरण में कछ नहीं हुआ, इसलिए सिटी इंचार्ज ने सीधे अमर उजाला से ही खबर चुरा ली. वे भूल गए कि अमर उजाला आज भी आगरा का नंबर एक अखबार है और हर कोई पढ़ता है. इसलिए इसमें छपी खबरों पर सबकी नजर रहती है. ऐसा लगता है कि हिन्दुस्तान ने अप्रत्यक्ष रूप से घोषणा कर रखी है कि जो जितनी ज्यादा खबरें चुराकर छापेगा, उसका उतना ही अधिक वेतन बढ़ेगा. दूसरों की चोरी की खबर छापने वाले हिन्दुस्तान के पत्रकार क्या अपने बारे में भी कुछ छापेंगे. यूं तो हिन्दुस्तान वाले अमर उजाला को अपनी कंपटीटर मानते हैं लेकिन न्यूजब्रेक करने के स्थान पर चुराकर खबरें छापते हैं. इस तरह जिन कुछ घरों में केवल हिन्दुस्तान अखबार जाता होगा, उन्हीं पाठकों को मूर्ख बना सकते हैं, पूरे आगरा को नहीं.

(उपरोक्त पत्र आगरा से मेल के जरिए भड़ास को भेजा गया है.)

एक अन्य मेल से मिली सूचना के मुताबिक मुंगावली/अशोकनगर में दैनिक भास्कर ने कम प्रसार संख्या वाले अखबारों में प्रकाशित समाचार की नकल कर बाईनेम एक खबर को बाद में प्रकाशित कर दिया. ‘इंजीनियर बनने की चाह में गरीबी बन रही रोडा़’ हेडिंग से 1 मई 2011 को ‘समय जगत’ अखबार में पेज नम्बर 7 पर समाचार प्रकाशित हुआ था. उसी समाचार को 2 मई 2011 को दैनिक भास्कर के रिपोर्टर नीलम सिंह ने दैनिक भास्कर के गुना संस्करण के पेज नम्बर आठ पर प्रकाशित करा दिया. अब एक तो समाचार की नकल की, और अपनी बाईलाईन भी ले ली. क्या भास्कर के रिपोर्टरों का यही स्तर रह गया है.

(इस जानकारी को भेजा है यादवेन्द्र शर्मा ने, मुंगावली, जिला अशोकनगर, म.प्र से)

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0 Comments

  1. anil

    June 2, 2011 at 2:17 pm

    jay ho pradhan sampadak ji ki

  2. Mohan singh

    June 2, 2011 at 3:00 pm

    बरेली में भी यही हो रहा रहा है, ब्यूरो में भी ऐसा ही चल रहा है

  3. Rajesh kumar

    June 3, 2011 at 3:43 pm

    Bare akhbar chote akhbaron se khabar churate hain yah koyi bari bat nahi hai. yah istithi kamo bes har jagah hai. hamare giridih zile main yesi kayi ghtnaye ghat chuki hai. ab bare baner ko page bharni hoti hai. bechare khabar kahan se juta payenge. isliye chori ka sahara lete hain aur apni nokari bachate hain. (Rajesh kumar PATRAKAR Giridih Jharkhand)

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