: मध्य प्रदेश सरकार की जेब में है दैनिक भास्कर, इसलिए शिवराज की आंखें बंद : सिर्फ एक मीडिया समूह के माल तोड़ने से शिवराज की शुचिता पर उठने लगे सवालिया निशान : सरकारी कार्रवाई की बढ़ चढ़कर रिपोर्टिंग कर रहा है दैनिक भास्कर ताकि सरकार खुश रहे : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में राज एक्सप्रेस के अवैध निर्माण के चर्चे तो शहर के अखबारों और न्यूज चैनलों में आम है.
न केवल राजधानी के बल्कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर के अखबारों और न्यूज चैनलों ने भी प्रमुखता से कवर किया. इस मुद्दे की लोकप्रियता को देखते हुए सबसे ज्यादा इस पर दैनिक भास्कर लिख रहा है, क्योंकि इस तरह के जमीन के काले धंधे से राज के साथ-साथ भास्कर भी बहुत गहरे तक जुड़ा हुआ है और उसे डर है कि यदि वह इस लड़ाई में प्रशासन का साथ नहीं देगा तो यही गाज उस पर भी गिर सकती है. गौरतलब है कि भोपाल में भास्कर वालों का प्रदेश का सबसे बड़ा माल ”डीबी सिटी” बना हुआ है. वह भी शासकीय नियमानुसार अवैध है.
साथ ही भास्कर कार्यालय की पार्किंग और एक कॉलोनी भी शासन के नियमों के खिलाफ निर्मित है. भोपाल के अलावा ग्वालियर और जबलपुर में भी भास्कर के अवैध निर्माण का मुद्दा तेजी से तूल पकडता जा रहा है. जबलपुर में तो मॉल के नियमविरुद्व निर्माण के कारण उसे प्रशासन द्वारा बिजली कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है. दैनिक भास्कर प्रशासन को खुश करने की गरज से राज एक्सप्रेस के खिलाफ एक के बाद एक नई खबरें प्रकाशित कर रहा है. वहीं कुछ अखबारों ने भास्कर के अतिक्रमण की पोल खोलना भी शुरू कर दिया है. भास्कर के अवैध निर्माणों की हकीकत जानकर भोपाल वाले हैरान हैं कि इस तरह राज के अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी-बड़ी खबरें छापने वाला खुद करोड़ों की जमीन पर अतिक्रमण का फन फैलाए बैठा है.
इन सबके बीच प्रशासन को भी भास्कर में अपने मनमाफिक खबर छपवाने का मौका मिल गया क्योंकि भास्कर के अवैध निर्माणों के खिलाफ जो दबाव प्रशासन पर बनाया जा रहा है उसका खौफ दिखाकर वह भास्कर को अपने फेवर में खबर छापने को बाध्य कर रहा है. आखिर वही हुआ जो कि दूसरे अखबार सदैव से मध्यप्रदेश के पाठकों को समझाने का प्रयास कर रहे थे कि एक ऐसा अखबार कैसे निष्पक्ष खबरें प्रकाशित कर सकता है जो खुद दो नंबर के कार्यों में लिप्त हो और प्रशासन के दबाव में कार्य करता हो.
उधर, अब शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, पर भी उंगलियां उठ रही हैं. लोग उन्हें दोगले और पूर्वाग्रह से ग्रस्त बताने लगे हैं. आखिर अवैध निर्माण के नाम पर सिर्फ एक उसी बिल्डर को क्यों परेशान किया जा रहा है जिसका अखबार लगातार शिवराज के खिलाफ खबरें छाप रहा था. वही सब नियम पैमाना तो भास्कर वालों पर भी लागू होना चाहिए. पर भास्कर शिवराज की जेब में है, इसलिए शिवराज उसे संरक्षित कर रहे हैं और भास्कर कूद कूद कर शिवराज के फेवर में और राज एक्सप्रेस के खिलाफ खबरें छाप रहा है. पिछले दिनो पत्रिका अखबार ने मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में भास्कर वालों द्वारा किए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ जोरशोर से खबरें प्रकाशित कीं. तब जाकर मध्य प्रदेश के पाठकों को पता चला कि वे जिस अखबार पर इतना भरोसा करते हैं, उसका प्रबंधन किस किस तरह के धंधों में लिप्त है.
भोपाल से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित












dk
June 2, 2011 at 12:02 pm
bhaskar to sarkar ka pichlaggu ban gaya hai to kyon dikhega uska avadh nirman. rahi bat raj ke moll ko todne ki to jo hua bilkul theek hua. raj ke malik ka moll to tuta sath hi sath uska dambh choor choor ho gaya jo bahut hi jaroori tha. yahi nahi raj ke malik ko uske karmchariyo ki bhi hay lagi. ayedin karmchariyon se abhadrta karna arun sahlot ka souk ban chuka tha. uske liye to uske karmchari uske gulam the. abhi hal me hi usne ek beuro ko ko bhopal bulakar uske sath marpeet bhi ki thee to uska phal to milna hi tha. rahi bat bhaskar ki to ek bada banner ban chuka hai to uske avadk kam sarkar ko nahi dikh raha hai
KAMLESH BUNAKAR
June 2, 2011 at 1:20 pm
MINAL KARVAI PAR NAGRIYA PRASHASHAN MANTRI BABULAL GOUR KI CHUPPI SHAK PEDA KARTI HAI.. DB MALL PE KARVAI HO SAKTI HAI LEKIN USKE LIYE RAJ K PURV SAMPADAK KI TARAH KUCH VEDIO BHI TO HONA CHAHIYE JO SARKAR KO MAJBUR KARDE…
ashu
June 2, 2011 at 1:40 pm
jab bhaskar itne badhe ghotale kar raha he to use ye adhikaar kisne de diya ki raj ke mool ke bare me chape. bhaskar phle apne girevaan me to ghak kar dkhe. vo bhi to choor he bus shasn,prashasan uske saat he ye to raj ke saat glat huya he
manoj
June 2, 2011 at 2:40 pm
मोडरेटर से अनुरोध है कि हिन्दी के फ्रेशरों को नौकरियों की जानकारी मुहैया करवाए। ताकि गैर आई आई एम सी वाले भी अच्छी नौकरी ढूंढ सके।
sahitya
June 2, 2011 at 3:33 pm
“मध्य प्रदेश सरकार की जेब में है दैनिक भास्कर” ये लिखने वाले को पॉवर गेम के बारे में मालूमात कम है इसको इस तरह लिखा जाना चाहिए की “दैनिक भास्कर की जेब में है मध्य प्रदेश सरकार” मध्य प्रदेश में सरकार के सहयोग से भास्कर कोंन कोंन से धंदे और इवेंट भास्कर संचालित कर रहा है और रोज कितने के विज्ञापन हासिल कर रहा है आंकड़े सुनकर आप बेहोश हो जायेंगे, भास्कर ने एक अलग विभाग बना रखा है जिसका काम ही नियम विरुध तरीके से प्रशासन पर दबाब बना कर धंदे और इवेंट से पैसा कमाना है स्थानीय स्तर पर जिस वर्ग से विज्ञापन मिलते है उस विज्ञापन पार्टी के घर के बंधे हुए कुत्ते कीतरह उसकी रक्षा करते है जाहे बो चोर हो या माफिया
ABC
June 2, 2011 at 4:42 pm
Bhaskar ne to Jodhpur me Bhi avaidh tareeke se parking banwaya hai
अभिषेक
June 2, 2011 at 8:08 pm
अरे भाई भोपाल के पत्रकार.. ये माल है या मॉल…? कुछ तो अंग्रेजी और हिंदी में फर्क करो.. ये नुक्ते के हेर फेर से ख़ुदा भी ज़ुदा हो जाता है मेरे भाई।
कमल शर्मा
June 3, 2011 at 10:11 am
भास्कर के अवैध निर्माणों को शिवराज सिंह हो या दूसरा कोई मुख्यमंत्री, तोड़ नहीं सकता। इनके आलाकमान से इतना दबाव आ जाएगा कि ये क्या कर दिया। भास्कर वाले अच्छी तरह जानते हैं कि दुकान कैसे चलाई जाती है। भास्कर है बड़ा जुगाड़ी। कहीं यह न कह दें कि बाबा रामदेव को आंदोलन के लिए तैयार करने में हमारी अहम भूमिका था। बाबा रामदेव केवल भास्कर पढ़ते हें क्योंकि वे लवण भास्कर चूर्ण बनाते हैं। हें हें हें
virendragupta
June 3, 2011 at 11:17 am
phala mal banaya phir mol
tumhara baap
June 13, 2011 at 6:52 am
babu lal gaur ki amma ki chut
dk jain
July 9, 2011 at 1:24 pm
bhaskar walo ka sarkar kuch nahi bigad sakti hai bhaskar walo ne MPSRTC ko khatm karwa kar logo ko jyada paisa dekar safar karne ko majbur kiya hai wo sare galat dhandho me lipt hai unka sarkar kya bigad rahi hai ulte unki khabro par karwai kar rahi hai
dkjain patrkar gwalior