टीआरपी के लिए दो सौ से ज्यादा जवानों की हत्या का लाइव कवरेज के षणयंत्र का खुलासा होने से उत्तर प्रदेश तथा बिहार का पुलिस विभाग चौकन्ना हो गया है. इससे पत्रकारिता को शर्मसार किए जाने की प्रवृत्ति प्रदर्शित हुई है वहीं पत्रकारों द्वारा अपना कद बढ़ाने के लिए खूनी खेल तक खेलने की मंशा भी उजागर हुई है. इस षणयंत्र में शामिल एक पत्रकार और उसके दो सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. चैनल ने पत्रकार को बाहर का रास्ता भी दिखा दिया है.
उत्तर प्रदेश के नक्सल प्रभावित जनपद सोनभद्र से सटे बिहार का भभुआ जिला है. यहां भी कैमूर की पहाडि़यों में नक्सल गतिविधियां ज्यादा हैं. नोएडा में स्थित एक राष्ट्रीय चैनल के पत्रकार ने नक्सलियों से मिलकर फोर्स के जवानों की हत्या और उनके असलहे लूट जाने की योजना बनाई. उक्त पत्रकार का मकसद इस हत्याकांड के दृश्यों को कैमरे में कैदकर अपने चैनल पर प्रसारण करना था. उसने अपने चैनल पर ब्रेकिंग न्यूज भी चलवा दी थी.
उक्त पत्रकार एक बड़े नक्सली नेता से लगातार संपर्क में था तथा उसकी मोबाइल पर बातचीत हो रही थी. यह संयोग ही था कि उक्त नक्सली का फोन उत्तर प्रदेश पुलिस ने सर्विलांस पर लगा रखा था और सोनभद्र के एसपी दीपक कुमार खुद नक्सली की वार्ता सुन रहे थे. षणयंत्रकारियों ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हुई 76 जवान की हत्या से भी बड़ी संख्या में जवानों को मारने की योजना बना रखी थी. इसी बीच एसपी ने नक्सली नेता और पत्रकार के बीच हुई बातचीत सुन ली.
सोनभद्र एसपी ने तत्काल इसकी सूचना उच्चाधिकारियों सहित भभुआ के पुलिस अधीक्षक को दी. जंगलों में कांबिंग के लिए जा रही पुलिस टीम को तत्काल वायरलेस से इसकी सूचना दी गई. जिससे सभी जवान मौत के मुंह में जाने से बाल-बाल बच गए. नक्सली नेता से बात करने वाले पत्रकार तथा उसके दो सहयोगियों, जिसमें एक ब्लाक का कर्मचारी है, के खिलाफ भभुआ के भगवानपुर थाने में 387/307/353/333/114/120बी/34 एवं 3/4 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम एवं 17 सीएल एक्ट एवं 10/13 गैर कानूनी गतिविधि अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर लिया गया है.
पुलिस ने इस मामले की जानकारी चैनल के वरिष्ठ अधिकारियों को भी दी, जिसके बाद चैनल ने कार्रवाई करते हुए उक्त पत्रकार को चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया. इस पूरे मामले की जांच भगवानपुर थाने के सब इंस्पेक्टर धर्मपाल कैथल को सौंपी गई है.
सोनभद्र से विजय शंकर चतुर्वेदी की रिपोर्ट.












krishna murari
June 3, 2011 at 1:18 pm
aise mamlo me thoda sochna samajhna padega kya vakai patrakar ki mansha itni buri thi. kya vakai ukt patrakar ne sirf footage banane ke liye 200 jawno ko maut ke muh me dhakelna chaha. is pure mamle me us patrakar ka bhi paksh jan’na jaruri hai. sari batein sirf police hi bata rahi hai. mujhe nhi lagta koi bhi sensative patrakar itne bada kadam utha sakta hai. sirf chand rupyo ke liye 200 pariwaro ko maut ke muh me dhakelna koi bhi nhi chahega. Aur agar ye bat sahi hai to patrakarita ke liye is’se bura din kabhi nahi ho sakta. chor dakait bhi apne fansne par hi logo ko marte hai.
धीरेन्द्र
June 3, 2011 at 3:39 pm
पुलिस का कोई भरोसा नहीं…
कमल शर्मा
June 4, 2011 at 8:56 am
ये महाशय पत्रकार नहीं आतंकी हैं। इनको पत्रकार कहना पत्रकारिता को शर्मसार करना है।
Rakesh bhartiya austraila
June 4, 2011 at 12:26 pm
BAKWAS HAI SAB POLICE NEY PATRKAR PER KINTA UTARNEY KEY LIYE HI LAGTA HAI SAB MAMLA BANYA HAI
YEH HO SAKTA HAI KI PATRKAR NEY JALDBAJI MEY ADHI ADHURI KHAB BINA PUSTI KEY CHENAL KO BHEJ DI HO AUR POLICE USI KUNAS KEY CHALTEY PATRKAR KO RAGDA CHHA RAHI HO
DUSRI BAAT UKAT KHABER NEY KAHI BHI PATRKAR KA PAKSH NAHI LIYA GAYA JISJEY KHABR ADHURI LAGTI HAI