नेट उपभोक्ताओं के हित में ट्राई ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ब्राडबैंड यूजर्स द्वारा कम स्पीड मिलने की शिकायतों पर भारतीय टेलीकाम नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) के लिए गाइडलाइन जारी की है। दावा अनुपात (सब्सक्राइबरों की वह संख्या है जिसे बैंडविड्थ की एक यूनिट में पैक किया जा सकता है) से जुड़े मानकों का उल्लेख करते हुए ट्राई ने देश में ब्रॉडबैंड सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव सेवा प्रदाताओं को दिए हैं।
इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) से कहा गया है कि वे ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए बैंडविड्थ की एक यूनिट में अधिकतम 50 सब्सक्राइबरों को ही रखना सुनिश्चित करें। कार्पोरेट सब्सक्राइबरों के लिए ट्राई ने अधिकतम 30 यूजर्स की अनुमति प्रदान की है। ट्राई का कहना है, ”इंटरनेट सेवा प्रदाताओं द्वारा मुहैया कराई जा रही ब्रॉडबैंड की अपर्याप्त स्पीड की बाबत सब्सक्राइबरों की शिकायतें समय-समय पर आती रही हैं। अधिकतर शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ब्रॉडबैंड की उपलब्ध स्पीड उससे कम है जितना बताया गया होता है।”
ट्राई ने यह सिफारिश भी की है कि सेवा प्रदाता को दावा अनुपात और सेवा से जुड़े अन्य मुद्दों के बारे में सब्सक्राइबर को सूचित करते रहना चाहिए ताकि वे जानकारी के साथ निर्णय लेने में सक्षम रहें। ट्राई ने आदेश को आपरेटरों के लिए अनिवार्य नहीं बनाया है। ट्राई का मानना है कि इंटरनेट क्षेत्र के मौजूदा आर्थिक माहौल में सेवा देने की लागत बढ़ाने से ब्राडबैंड की वृद्धि पर विपरीत असर पड़ेगा। ट्राई का मकसद इंटरनेट/ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबरों को बेहतर सेवा दिलाना और सेवा प्रदाताओं के काम में कम से कम हस्तक्षेप करना है ताकि उद्योग के ग्रोथ में कोई बाधा न पड़े।











