: स्टाफ को परेशान करने में पत्रिका वाले दो कदम आगे निकल गए : वेतन कुछ हजार रुपए और तबादला हजारों किलोमीटर दूर। वजह कुछ नहीं। जी हां, यह फरमान ग्वालियर से सवा साल पहले प्रकाशित होने वाले पत्रिका समाचार पत्र के संपादकीय टीम के कुछ लोगों को सुनाया गया है, वो भी इस आदेश के साथ कि आप आज से ही रिलीव किए जाते हैं और तुरंत ही नए स्थान पर जाकर अपना कामकाज संभाल लो।
नए स्थान पर काम क्या करना होगा? यह आदेश नए स्थान का बॉस सुनाएगा। इस फरमान ने तबादले की दायरे में आए पत्रकारों के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है और यह मन ही कह रहे हैं कि पत्रिका वाले तो दैनिक भास्कर के प्रबंधन से भी बदमाश निकले। पत्रिका के ग्वालियर संस्करण में कौन काम करेगा और किसे नहीं घुसने दिया जाएगा, इसकी फील्डिंग शैलेंद्र तिवारी ने माह जनवरी 2010 जमाई थी। इन्हें भी चलता कर दिया गया है। यह जयपुर में काम करते थे और झांसी के रहने वाले हैं। जयपुर से ग्वालियर इसलिए आए थे कि घर के निकट पहुंच जाएंगे। अब इन्हें इंदौर भेजा गया है। ग्वालियर से पांच सौ किलोमीटर दूर। सबसे ज्यादा दयनीय हालत पत्रिका के समाचार संपादक धर्मेंद्र सिंह भदौरिया की रही। वे दैनिक भास्कर में जमी जमाई नौकरी छोड़कर आए थे।
भास्कर में वेतन कम था और घर से दूर नौकरी कर रहे थे। सात माह पहले ही वे ग्वालियर पत्रिका से जुड़े थे। अब उन्हें अहिंदी भाषी राज्य तमिलनाडु की राजधानी चेन्नै भेजा गया है। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि चेन्नै में जाकर कैसे काम करेंगे। वहां की न तो भाषा आती है न ही वहां का भोजन उत्तरी भारत के लोग ज्यादा दिन खा पाते हैं। वे अब अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि वे नई संभावनाओं की तलाश में जुट गए हैं ताकि आसपास ही कहीं ठौर मिल जाए और कुछ हजार रुपए के वेतन में हजारों किलोमीटर दूर जाने से बच जाएं। कुछ ऐसे ही हालात मनोज के हैं। उन्हें कोलकाता भेजा गया है। पूरे 36 घंटे लगते हैं ग्वालियर से कोलकाता या चेन्नै पहुंचने में। इन्हें जितना वेतन मिलता है, उसमें दो चूल्हे यह कर नहीं सकते और नए स्थान पर अगर एक चूल्हा रखते भी हैं तो इस बात की कोई गारंटी नहीं कि जो वेतन मिलेगा, उसमें नए स्थान में पूरे माह चूल्हा जल पाएगा।
इससे पहले ग्वालियर पत्रिका में काम करने वाले रविंद्र कैलासिया तबादले की तलवार का शिकार हो चुके हैं। मुकेश सक्सेना को भी ग्वालियर से भोपाल भेजा जा चुका है। यह भी दैनिक भास्कर छोड़कर पत्रिका ग्वालियर से पहले ही दिन से जुड़े थे। अब पत्रिका ने काम निकला लिया और शायद पत्रिका प्रबंधन की नजर में इनकी भूमिका यूज एंड थ्रो से अधिक नहीं रह गई थी। वैसे कहा यह भी जा रहा है कि मुकेश सक्सेना भोपाल में रहते हुए इस बात की लॉबिंग कर रहे हैं कि उन्हें अब ग्वालियर भेज दिया जाए क्योंकि समाचार संपादक की कुर्सी खाली हो गई है। पत्रिका ग्वालियर से जिन्हें तीन अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया है, उन्हें तबादले की न तो कोई वजह बताई गई है न ही उन्हें अपनी बात कहने का मौका दिया गया है। बस एक ही झटके में इशारा कर दिया गया है कि पत्रिका से जुड़े रहना हो तो नए स्थान पर ज्वाइन करो, वरना घर बैठ जाओ। कहा तो यह भी जा रहा है कि जल्द ही एक नई सूची और आने वाली है जिसमें कुछ और संपादकीय सदस्यों को चटकाया जाएगा। इस सूचना से उन लोगों में दहशत है जो दैनिक भास्कर को नमस्कार कर पत्रिका में आए थे।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित












Ankit Khandelwal
June 21, 2011 at 5:01 pm
Kaam na karne ke hajaron bahane….
manu
June 21, 2011 at 5:44 pm
Jindgi ki sabse badi galti jo patrkaarita me aa gya ab kisi ko slaah nhi dunga ye sb madrchod hai khoon peete hai patrkaaro ka
ratana.pandey
June 22, 2011 at 7:34 am
patrika mey aab utpeedan honey laga hai.aab kuleesh jee walee patrica nahee rahee.kai edition mein yahee ho raha hai.puranoo kee kadra nahee hai,surat mein yahee ho raha hai
कमल शर्मा
June 22, 2011 at 12:48 pm
सही शब्द आया इस रिपोर्ट में यूज एंड थ्रो। कंडोम बन पत्रकार।
tarkesh kumar ojha
June 22, 2011 at 3:30 pm
patrakarita ke pese me yah utpiran aam baat ho chala hai. lekin kar bhi kya sakte hain . saho ya naukri chodo .
tarkesh kumar ojha. kharagpur(west bengal)
contact_ 09434453934
rahul
June 22, 2011 at 5:44 pm
private noukri hia. transfer se pahle ek bar sambandhit ki rai jaroor lena chahia prabandhan ko.