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टीआरपी के मैदान में तीन और नए चैनल कूदे

टीआरपी के अखाड़े में तीन नए न्यूज चैनल भी कूद पड़े हैं। ये हैं- सीएनईबी, वायस आफ इंडिया और जनसंदेशटेलीविजन आडिएंश मिजरमेंट (टैम) मीडिया रिसर्च में इन चैनलों ने खुद को रजिस्टर करा लिया है। पिछले कुछ हफ्तों से इन चैनलों के मार्केट शेयर के बारे में जानकारियां आने लगी हैं। टैम मीडिया रिसर्च में रजिस्टर हिंदी न्यूज चैनलों की संख्या 12  थी जो बढ़कर 15 हो गई है। इन तीनों नए न्यूज चैनलों की व्यूवरशिप के आंकड़े भी आने लगे हैं। टैम के 10वें हफ्ते (1 मार्च 2009 से 7 मार्च 2009) के टीजी सीएस 15+ के आंकड़ों के मुताबिक हिंदी न्यूज चैनल सिगमेंट में सीएनईबी और जनसंदेश का मार्केट शेयर 0.5 है जबकि वायस आफ इंडिया 0.4 के साथ अंतिम पायदान पर है। पिछले हफ्ते जनसंदेश 0.8 फीसदी व्यूवरशिप के साथ सीएनईबी से आगे था लेकिन इस बार उसे लुढ़कना पड़ा।

टीआरपी के अखाड़े में तीन नए न्यूज चैनल भी कूद पड़े हैं। ये हैं- सीएनईबी, वायस आफ इंडिया और जनसंदेशटेलीविजन आडिएंश मिजरमेंट (टैम) मीडिया रिसर्च में इन चैनलों ने खुद को रजिस्टर करा लिया है। पिछले कुछ हफ्तों से इन चैनलों के मार्केट शेयर के बारे में जानकारियां आने लगी हैं। टैम मीडिया रिसर्च में रजिस्टर हिंदी न्यूज चैनलों की संख्या 12  थी जो बढ़कर 15 हो गई है। इन तीनों नए न्यूज चैनलों की व्यूवरशिप के आंकड़े भी आने लगे हैं। टैम के 10वें हफ्ते (1 मार्च 2009 से 7 मार्च 2009) के टीजी सीएस 15+ के आंकड़ों के मुताबिक हिंदी न्यूज चैनल सिगमेंट में सीएनईबी और जनसंदेश का मार्केट शेयर 0.5 है जबकि वायस आफ इंडिया 0.4 के साथ अंतिम पायदान पर है। पिछले हफ्ते जनसंदेश 0.8 फीसदी व्यूवरशिप के साथ सीएनईबी से आगे था लेकिन इस बार उसे लुढ़कना पड़ा।

हालांकि जनसंदेश अभी उत्तर प्रदेश का रीजनल न्यूज चैनल है। इस चैनल का यूपी में प्रदर्शन जोरदार है। यूपी का होने के बावजूद नेशनल व्यूवरशिप में दस्तक देना इस चैनल के लिए शुभ संकेत है। इन तीनों नए चैनलों के टीआरपी मैदान में आने से सबसे ज्यादा खतरा इंडिया न्यूज और लाइव इंडिया के लिए पैदा हो गया है। ये दोनों न्यूज चैनल पिछले काफी समय से आपस में गुत्मथगुत्था होने के बावजूद तीन फीसदी व्यूवरशिप से आगे नहीं पढ़ पा रहे हैं। अब तीन नए न्यूज चैनलों के मैदान में आने से इनके और नीचे जाने का खतरा पैदा हो गया है। तीनों नए चैनलों की न्यूज टीम की बात करें तो इसमें सबसे तगड़ी टीम सीएनईबी की दिखाई पड़ती है। मशहूर पत्रकार राहुल देव की टीम में कई धुरंधर शामिल हैं। वरिष्ठ पत्रकार आलोक तोमर, प्रदीप सिंह, प्रणय यादव जैसे लोग चैनल को आगे ले जाने के लिए जूझ रहे हैं। पिछले दिनों एक पूर्व सांसद द्वारा खुद बूथ कैप्चरिंग कर चुनाव जीतने की करतूत स्वीकारने की एक्सक्लूसिव खबर सीएनईबी ने प्रसारित कर न्यूज के मामले में बाकी चैनलों को पछाड़ दिया। इंडिया न्यूज को टीआरपी के मामले में काफी आगे ले जाने वाले किशोर मालवीय के अब वायस आफ इंडिया के ग्रुप एडिटर बनने के बाद से उम्मीद जगी है कि पटरी से उतरा हुआ यह चैनल अब ढर्रे पर आएगा। जनसंदेश के बारे में अभी कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता क्योंकि इस चैनल के लांच हुए अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं।

टीआरपी की जंग में कूदने वाले ये चैनल ज्यादा व्यूवरशिप बटोरने के लिए क्या वही फार्मूला अपनाएंगे जो इन दिनों टीवी न्यूज राहुल देवइंडस्ट्री में हिट और फिट है? इस सवाल को जब भड़ास4मीडिया ने सीएनईबी के एडिटर इन चीफ और सीईओ राहुल देव से पूछा तो उन्होंने इसका जवाब कुछ यूं दिया- ”हम कंटेंट के बल पर कंपीट करेंगे। सफलता के सस्ते नुस्खे और प्रचलित हथकंडे नहीं अपनाएंगे जो कुछ  मित्रों ने अपनाया हुआ है। यह हमारा नीतिगत फैसला है। हम अपनी टीम को और ज्यादा मजबूत करेंगे। कंटेंट को लेकर एक स्ट्रेटजी है जिस पर अभी ज्यादा बात नहीं करना चाहूंगा। हम लोग डिस्ट्रीव्यूशन पर बहुत ध्यान दे रहे हैं। हम साफ-सुथरी पत्रकारिता में यकीन रखते रहे हैं और इसीलिए हम साफ-सुथरी व सरोकार वाली खबरों को ही दर्शकों को दिखाएंगे। हमारा विश्वास है कि ऐसी खबरों की जगह है और इन खबरों के प्रति लोगों की भूख बढ़ रही है। आजकल टीवी न्यूज के नाम पर जो चल रहा है, उससे लोग उकता गए हैं। हमें लगता है कि हम दर्शकों के बीच खबर के आधार पर ठीकठाक जगह बना पाने में कामयाब होंगे।”

वायस आफ इंडिया के ग्रुप एडिटर किशोर मालवीय कहते हैं कि वायस आफ इंडिया के नाम के अनुरूप ही हम इसे जनता के किशोर मालवीयलिए मंच बना रहे हैं। जिस तरह दूसरे चैनल आजकल तालिबान और पाकिस्तान के पीछे पड़े हुए हैं और दिन रात यही सब दिखा रहे हैं, दस दिन से तालिबान को भुनाए जा रहे हैं, हम उस तरह की पत्रकारिता नहीं कर रहे हैं। अगर आप चैनल देखते हों तो आपको पता चलेगा कि हमारे यहां सिर्फ खबरें होती हैं। इलेक्शन कवरेज के लिए हमने जो स्ट्रेटजी बनाई है उसमें नेताओं के भाषण और रैली की बजाया जनता और उनके मुद्दों को प्राथमिकता देंगे। हम इलेक्शन को नेताओं के पर्सपेक्टिव से नहीं कवर कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में वायस आफ इंडिया व्यूवरशिप के मामले में काफी आगे जाएगा।

गिरीश जुनेजाजनसंदेश के एडिटर गिरीश जुनेजा का कहना है कि अभी जनसंदेश यूपी केंद्रित रीजनल चैनल है और यूपी में सभी चैनलों से आगे है। चुनाव के दौरान हम यूपी के न्यूज चैनलों के सरताज बन जाएंगे, यह विश्वास है। निठारी कांड के फैसले के बाद हमने पीड़ित के परिजनों के साथ जो लाइव प्रोग्राम किया और दर्शकों को फोन लाइनों के जरिए कनेक्ट किया तो उस प्रोग्राम की टीआरपी नेशनल चैनलों से भी ज्यादा रही। आने वाले दिनों में उत्तराखंड फिर नेशनल चैनल लांच होगा।

डिस्ट्रीव्यूशन की कोई दिक्कत न होने से दर्शकों तक हमारी पहुंच सबसे ज्यादा है। फिलहाल यूपी का हमारा चैनल दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश में भी देखा जा रहा है। हम यह दावे से कह सकते हैं कि जब जनसंदेश का नेशनल चैनल लांच होगा तो यह कुछ ही दिनों में अप्रत्याशित नतीजे देगा।

इस हफ्ते के 15 चैनलों की व्यूवरशिप इस तरह है-

अवधि : सप्ताह 10वां, 1 मार्च से 7 मार्च 2009 टीजी : सीएस 15+

चैनल

पिछले चार हफ्ते
पिछला हफ्ता
इस हफ्ते
नफा-नुकसान
आज तक
19.3
19
19.8
0.8
स्टार न्यूज
16.2
16.2
16.9
0.7
इंडिया टीवी
17.1
14.8
15.5
0.7
जी न्यूज
10
9.9
9.7
-0.2
आईबीएन7
8.3
8.4
8.5
0

एनडीटीवी इंडिया

6.4
7.3
7.8
0.5
न्यूज 24
5.1
5.3
5.3
0
समय
4.5
4.6
4.1
-0.5
तेज
4
3.8
3.9
0
डीडी न्यूज
3.2
3.7
2.8
-0.9
लाइव इंडिया
2.3
2.9
2.5
-0.4
इंडिया न्यूज
2
2.2
1.9
-0.32
सीएनईबी
0.5
0.6
0.5
-0.1
जन संदेश
0.6
0.8
0.5
-0.3
वीओआई
0.5
0.4
0.4
-0.1
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