Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

लखनऊ में लांच होते ही अमर उजाला नंबर वन

Amar Ujala Lko लखनऊ में अमर उजाला की बहुप्रतीक्षित लांचिंग ने कई पुराने मिथ तोड़ दिए और कई नए पैमाने कायम किए हैं। 2 लाख 10 हजार कापियों की रिकार्ड प्रसार संख्या के साथ अमर उजाला ने लखनऊ में नंबर वन का ताज पहन लिया है। लांचिंग से पहले अमर उजाला ने अपने अखबार,  उसके कंटेंट,  मार्केटिंग स्ट्रेटजी, पाठकों की मनःस्थिति, लखनऊ की विशिष्टता आदि कई फील्ड में ढेरों शोध कराए और खुद होमवर्क किया। इससे जो नया अमर उजाला बना,  उसमें लखनऊ की धड़कन दिखने लगी। इससे लखनवी पाठकों ने अमर उजाला को हाथोंहाथ लिया।
Amar Ujala Lko लखनऊ में अमर उजाला की बहुप्रतीक्षित लांचिंग ने कई पुराने मिथ तोड़ दिए और कई नए पैमाने कायम किए हैं। 2 लाख 10 हजार कापियों की रिकार्ड प्रसार संख्या के साथ अमर उजाला ने लखनऊ में नंबर वन का ताज पहन लिया है। लांचिंग से पहले अमर उजाला ने अपने अखबार,  उसके कंटेंट,  मार्केटिंग स्ट्रेटजी, पाठकों की मनःस्थिति, लखनऊ की विशिष्टता आदि कई फील्ड में ढेरों शोध कराए और खुद होमवर्क किया। इससे जो नया अमर उजाला बना,  उसमें लखनऊ की धड़कन दिखने लगी। इससे लखनवी पाठकों ने अमर उजाला को हाथोंहाथ लिया।
देर आए,  दुरुस्त आए के तर्ज पर अमर उजाला ने लांचिंग के पहले लखनऊ मार्केट के शोध से मिले फीडबैक के आधार पर न सिर्फ कंटेंट के लेवल पर बदलाव किए बल्कि साज-सज्जा व प्रस्तुति में आधुनिकतम चीजें समाहित की। स्टाइलशीट, मास्टहेड,  फांट आदि को यूजर फ्रेंडली बनाया। अखबार के विभिन्न सेक्शन्स को पुराने अंदाज और नाम (कारोबार, आईना आदि) से निकालकर नए जमाने के हिसाब से अपडेट किया गया। ये सारी कवायद पाठकों से मिले फीडबैक के आधार पर अमर उजाला के समूह संपादक और प्रेसीडेंट (एडीटोरियल) शशिशेखर के नेतृत्व में की गई।
Shashishekharश्री शशिशेखर कहते हैं कि वे लखनऊ में अमर उजाला की लांचिंग के बाद मिली अभूतपूर्व सफलता का श्रेय अमर उजाला प्रबंधन और अमर उजाला टीम के एक एक साथी को देना चाहेंगे। वे खुद इस प्रबंधन और टीम के हिस्से मात्र हैं। लांचिंग से पहले साढ़े पांच लाख घरों तक पहुंचना और उन घरों की मनःस्थिति को समझना,  उनके सुझाव के हिसाब से अखबार को बदलना….यह सारा कुछ किसी एक आदमी से संभव नहीं। इसके पीछे पूरी टीम और प्रबंधन की सोच शामिल है। सफल लांचिंग का श्रेय खुद लेने से विनम्रतापूर्वक इनकार करते हुए शशिशेखर ने खुद को एक मास्टर ब्लेंडर की तरह बताया जो चीजों को महसूस कर उसे कार्यरूप देने के लिए आगे बढ़ा देता है। उनका कहना है कि करने वाली टीम को ही सफलता का श्रेय मिलना चाहिए।
अमर उजाला ने लखनऊ की नब्ज़ को समझने के लिए काफी कुछ किया। और लखनऊ के मुताबिक खुद को ढालने के लिए कई तरह के प्रयोग किए। शशिशेखर के शब्दों में- 
लखनऊ की जड़ और रूटीन सी हो चुकी रिपोर्टिंग में अमर उजाला के नए प्रयोग किसी ताजी हवा की तरह हैं। हमने लाइव रिपोर्टिंग की शुरुआत की। यह सही है कि अखबार 24 घंटे में एक बार ही प्रकाशित होता है पर इसमें जो कुछ आता है वह बने बनाये ढर्रे पर और जड़ होने की बजाय ताजी और लाइव होना चाहिए। इसी के चलते तहजीब के शहर लखनऊ में रात को कोई लड़की कितनी सुरक्षित है,  इसका अंदाजा अमर उजाला की रिपोर्टिंग टीम ने लगाया और नतीजा निराशाजनक रहा। इससे सबक लेते हुए लखनऊ के कानून-व्यवस्था के रखवालों ने अगले दिन से चीजें दुरुस्त करनी शुरू कर दीं। तो ये एक उदाहरण मात्र है। इससे लखनऊ के लोगों को यह लगा कि अखबार सिर्फ खबरें जबरन पढाने के लिए नहीं होते बल्कि लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के भी काम आते हैं।
Amar Ujala, Lkoअमर उजाला के समूह संपादक और प्रेसीडेंट (एडीटोरियल) शशिशेखर ने  बताया कि जो सर्वे लखनऊ में कराया गया उसमें 99 फीसदी पाठकों ने साफ-साफ कहा कि लखनऊ के अखबार पूर्वाग्रह ग्रस्त (बायस्ड) खबरें देत हैं।  इस बात से वे खुद भी चौंके पर इससे सबक लेते हुए अमर उजाला ने किसी संपादक के विजन पर अखबार निकालने के बजाय पाठकों के द्वारा, पाठकों के लिए और पाठकों का अखबार निकालने की रणनीति पर चलने का निर्णय लिया। अमर उजाला ने गूढ़, गंभीर, गरिष्ठ खबरों को जबरन पढ़ाने की बजाय आम लखनवी की ज़िंदगी से ताल्लुक रखती हुई चीजों को पेश किया। माई सिटी और लखनऊ लाइव जैसे प्रयोगों को हाथोंहाथ लिया गया। कुल मिलाकर बदलते जमाने के लखनऊ को बदलते जमाने का अखबार अमर उजाला के रूप में मिला तो नतीजे में अभूतपूर्व सफलता की नई कहानी यहां लिखी गई।
तीन दिन पहले लांच हुआ अमर उजाला शुरुआती दो दिन तकनीकी खामियों के चलते देर से छपने के कारण देर से सेंटर पर पहुंचा। तीसरे दिन समय से सेंटर पर पहुंचने के बाद इसकी रिकार्ड बिक्री (2 लाख 10 हजार कापियां) हुई। अमर उजाला प्रबंधन को उम्मीद है कि अभी ये शुरुआत है। यह जादुई आंकड़ा अभी और उपर पहुंचेगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले एक दशक से अमर उजाला के लखनऊ से प्रकाशित किए जाने संबंधी चर्चाएं होती रही हैं पर इसका प्रकाशन लगातार टलता रहा है। अमर उजाला लखनऊ की लांचिंग के लिए इसके समूह संपादक शशिशेखर लखनऊ में ही लगातार कैंप किए हुए हैं। लखनऊ के स्थानीय संपादक अशोक पांडेय और उनकी टीम बधाई की पात्र है जिसने जी-तोड़ मेहनत कर अखबार को पाठकों के पैमाने पर खरा उतारने में सफलता हासिल की।
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. rajesh gupta

    April 17, 2013 at 12:54 am

    sir ji
    mai ek berojgar pharmacist hui. govrment se rojgar ke liye kai salo se ld rha hui lekin paise ke khatir koi acha vakil na kr pane ke karn hmara pach majbuti se suprimcoart me nahi rkhva pa rhe hai hmare pass pure sabut hai agar aap log thodi-thodi madad apne midia ke madhyam se kare to ham logo ko rojgar mil pata. sir ji ab aap logo ke hath me hi jindgi hai logo bahut upkar ho ga mera contect no 8858830699 hai
    thank

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...