मामला यह है कि कुछ वर्ष पहले नागपुर के पास भंडारा जिले में एक दलित परिवार की सामूहिक रूप से हत्या कर दी गई थी, जिस में परिवार का मुखिया भैयालाल भोतमांगे किसी काम से बाहर होने की वजह से बच गया था, बाद में दलित संगठनों ने पूरे महाराष्ट्र में बवाल मचा दिया था. इस सामूहिक हत्याकांड की चारो तरफ निंदा हुई थी, जिसकी वजह से दलित समाज में भैयालाल भोतमांगे के प्रति विश्वास व दया की भावना जागृत थी, जिसके बाद परिवार के मुखिया भैयालाल भोतमांगे को अप्रत्क्ष रूप से राजनीतिक शरण भी मिली हुई थी, लेकिन कुछ दिन पूर्व स्टार न्यूज़ मराठी जो महाराष्ट्र में ज्यादा प्रचलित है. उसने अपनी छानबीन के आधार पर भैयालाल भोतमांगे के बारे में एक रिपोर्ट प्रसारित की थी, जिस में उसके तीन माह पूर्व दूसरी शादी कर नया जीवन बसा लेने के बारे में दिखाया गया था.
इस खबर से नाराज होकर भैयालाल भोतमांगे ने कुछ लोगों के साथ मिलकर नागपुर श्रमिक पत्रकार संगठन के हाल में प्रेस कांफ्रेंस करके दूसरी शादी करने की बात को सिरे से नकार दिया, जिसे दूसरे दिन नागपुर के सभी अखबारों ने अच्छी जगह देकर प्रकाशित किया. इसके बाद स्टार न्यूज की ब्यूरोचीफ सरिता कौशिक के मोबाइल पर भैयालाल खैरकर नामक एक राजनीतिक व्यक्ति का फोन आया, जिसमें उसने सरिता को सबक सिखाने और जान से मारने की धमकी दी.
इसके बाद नागपुर श्रमिक पत्रकार संगठन ने नागपुर पुलिस कमिश्नर अंकुश धनविजय से मिलकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें सरिता कौशिक को मारने की धमकी तथा एक अन्य अखबार के पत्रकार को एक पुलिस अधिकारी द्वारा धमकाने की जानकारी दी गई थी. पत्रकारों ने कमिश्नर से दोनों मामलों में उचित कार्रवाई करने करने का आग्रह किया है. पुलिस कमिश्नर ने पत्रकारों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही दोनों मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
इस संबंध में सरिता कौशिक ने बताया कि खबर चलने के बाद मुझे यह धमकी दी गई कि ऑफिस में आकर मार देंगे. उन्होंने कहा कि अक्सर हम खबर करते हैं तो किसी ना किसी पर इसका असर पड़ता है, इस स्थिति में क्या पत्रकार अपना काम करना बंद कर दे. गौरतलब है कि सरिता कौशिक इसके पहले महाराष्ट्र के पूर्व दबंग मंत्री एवं वर्तमान विधायक सतीश चतुर्वेदी और महाराष्ट्र कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष मानिकराव ठाकरे की आपसी बातचीत को उजागर कर काफी सुर्खियां बटोर चुकी हैं.












Hariom garg
July 28, 2011 at 7:00 pm
पत्रकारों को धमकियाँ और हमले अब आये रोज़ की बात होगई हैं हालाँकि पत्रकारिता की खाल में ब्लकेमैलरों की भी कमी नहीं है .ऐसे .ब्लकेमैलरों की वजह से सही पत्रकारों को अपने कर्त्तव्य को निभाने में काफी दिक्कतें आती हैं .सविता कौशिक का मामला एक पत्रकार को यथार्थ दिखाने और उस यथार्थ से बोखलाए व्यक्ति का है .क्योंकि मामलाएक महिला पत्रकार को मिली धमकी का है तो इसे गंभीरता से लेना और नागपुर के अलावा महारास्त्र और देश के अन्य राज्यों के पत्रकारों को भी महारास्त्रसर्कार पर दबाव बनाना चाहिए .
[b]हरिओम गर्ग .बीकानेर [/b]
santosh kumar shahi
July 29, 2011 at 2:27 pm
this is a part of journalisem,.Journalist must take risk for removeing problems of common person.They should not be afraid.[b][/b]
rajesh tiwari
December 6, 2011 at 5:55 pm
saritajee..Aapki himmat ko Hum sabhi vidarbha ke mediakarmi salam karte hai..is Ullekhniy kary ke liye aap pahle se hi puruskrut hai..aap aise hi aage aur jyada himmat ke sath aage badti rahe…