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सीईओ योगेद्र शुक्‍ला एमके न्‍यूज को ले डूबे

: दूसरे को मूर्ख समझते हैं शुक्‍ला जी : यशवंतजी,  नमस्कार.  कल भड़ास में एमके न्यूज़ के बारे में पढ़ा काफी रोचक जानकारियां सामने आईं,  लेकिन साथ ही कुछ लोग जिन्होंने इस न्यूज़ चैनल को खड़ा करने में अपना योगदान दिया, उन्हें ही वह सम्मान नहीं मिला जिसके वो हकदार थे. वो चाटुकारिता करना नहीं जानते थे.  अतः वो चैनल को छोड़ कर जाने के लिए मजबूर थे.

: दूसरे को मूर्ख समझते हैं शुक्‍ला जी : यशवंतजी,  नमस्कार.  कल भड़ास में एमके न्यूज़ के बारे में पढ़ा काफी रोचक जानकारियां सामने आईं,  लेकिन साथ ही कुछ लोग जिन्होंने इस न्यूज़ चैनल को खड़ा करने में अपना योगदान दिया, उन्हें ही वह सम्मान नहीं मिला जिसके वो हकदार थे. वो चाटुकारिता करना नहीं जानते थे.  अतः वो चैनल को छोड़ कर जाने के लिए मजबूर थे.

अब बात करते है एमके न्यूज़ चैनल के सीईओ योगेद्र शुक्‍ला की.  शुक्ला जी की एक ख़ास आदत है कि वे अपने आपको बहुत सम्मान देते है और अपने सामने के हर आदमी को बेवकूफ समझते हैं. मेरा भी वास्ता शुक्ला की बेवकूफी भरी हरकत से पड़ा मैं एमके न्यूज़ में बतौर रिपोर्टर ज्वाइन किया और कथित सीईओ ने मुझ से भी पैसों की मांग का मामला सिर्फ यहीं पर नहीं ख़त्म हुआ शुक्ला ने छत्तीसगढ़ में लगने वाले सभी सेट अप बॉक्स के एवज में भी पैसे मांगे एमके न्यूज़ के चेयरमैन संजय तिवारी वास्तव में एक बिल्डर है और योगेन्द्र शुक्ला वहीं मुनीम का काम किया करता था.

पत्रकारिता का अ ब स नहीं जानने वाले इस शख्स ने एमके न्यूज़ में काम करने वाले मेरे कई और साथियों को भी काफी परेशान किया है. संजय तिवारी के न्यूज़ चैनल में घोड़ों और गधों को एक ही नजर से देखने की कोशिश की गई नतीजा सबके सामने है कई लोगों ने धीरे-धीरे चैनल से किनारा कर लिया और आखिरकार चैनल बंद हो गया मनोज सैनी ने कई काबिल लोगों को भी जोड़ा था,  लेकिन उनके जाने के बाद सीईओ और केबल न्यूज़ से जुड़े चन्द्रशेखर और इस चैनल के ब्यूरोचीफ ने सभी रिपोर्टर से विज्ञापन के नाम से पैसे की डिमांड शुरू कर दी.  दूसरी तरफ संजय तिवारी कई उपकरणों की खरीद के लिये भी कहते थे,  लेकिन भुगतान सीईओ को करने को कहते थे. सीईओ रसीद तो ले लेते थे पर भुगतान अभी तक नहीं किया.

कुल मिला कर इस चैनल में काम करना किसी उत्पीड़न से कम नहीं था.  अभी भी जो लोगो काम कर रहे हैं उन्हें भी सीईओ किनारे करने की कोशिश में हैं,  लेकिन खबर यह भी है कि सीईओ महोदय की कारगुजारियों की भनक चेयरमैन को भी लग चुकी है और उसकी छुट्टी भी हो गई है. और कल भड़ास में जो पढ़ने को मिला वो भी निश्चित तौर पर शुक्ला की दिमाग की उपज है.

जरीन सिद्दीकी

पूर्व पत्रकार एमके न्‍यूज

छत्‍तीसगढ़

[email protected]

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0 Comments

  1. एक जागरुक पत्रकार

    July 30, 2011 at 2:19 pm

    pal pal na maane tinku jia…pal pal na maane tinku jia
    aisha jhoot jareen tune kyu bol diya..kyu bol diya

    kalpana k udaan se baahar aao kambhakto jhoot sarasar jhoot
    jhoot bhi bo rahe ho safedi poth k…….chupega nhi kala hai pakda jaiga

  2. aashutosh deshratna

    July 31, 2011 at 10:16 am

    वो है कायर जो छुपकर करें वार
    अपनी पहचान छुपाये खुद को समझे होशियार
    सच कहने का नहीं है दम
    बनते है जागरुक पत्रकार
    दम है तो नाम सहित लिखें अपना बयान

    ” एमके न्यूज़ … आईना सच का ”
    ज़रीन ने दिखाया मौकापरस्तों को… “आईना सच का”

  3. B4M

    August 1, 2011 at 4:55 am

    चोर की दाड़ी में तिनका…..शर्म करो जरीन
    आदरणीय शुक्ला जी की ईमानदारी पर मुझे शत प्रतिशत यकीन है। हालांकि मैं ये भी नहीं कह रहा कि शिकायतकर्ता के आरोप गलत होगें.. लेकिन पैसाशुक्ला जी ने नहीं मांगा होगा।इसका सबूत मेरे पास है..जिसमे चैनल के मालिक संजय तिवारी फोन पर स्टिंगरों से पैसा मांग रहे है औऱ सेटअप बाक्स के लिए सीईऔ को पैसा मांगने पर मजबूर कर रहे है..रही बा जरीन की तो मै आपको बता दू की जरीन खुद किने पाक साफ है ये दुनिया को पता है…पैसो की दलाली के आरोप में कई चैनलो से इनका पत्ता कट चुका है…ये जनाब खुद आए थे एम के न्यूज अपनी स्किमें लेकर और इस स्किम में मालिक को सपने दिखाए जब योगेंद्र शुक्ला ने मना किया तो सिफारिश लगाई क्योकि पैसो की दलाली जो करनी थी… इस चैनल का गुनहगार योगेद्र शुक्ला हो या न हो संजय तिवारी एंड सैनी कंपनी जरुर है..क्योकि तिवारी को आज के समय में खुद पर ही भरोसा नही है…शुक्ला के दम पर चैनल खड़ा किया..

    पिछले दस साल के अनुभव के आधार पर मैं इतना तो कह ही सकता हूं कि जो आदमी दूसरे के पैसे का चाय सिगरेट पीने में भी परहेज करता हों.. भला वो किसी ।को भी चूना कैसे लगा सकता है। मुझे लगता है कि स्वाभिमा।नी ईमानदार और दबंग शुक्ला जी को बदनाम करने के लिए उनके विरोधियों ने कुछ साजिश की है। मुकुंद जी हम आपके साथ हैं। और आपका कहना सही है कि आरोप तो कोई भी लगा सकता है लेकिन सबूत हो तो दिखाए। हां आपको मै सबूत जरुर दे सकता हू जिसमें तिवारी एंड कंपनी की कई कारगुजारियां है,,है दम तो दिखाओ..जरीन सबूत….क्योकि आज नही तो कल इसी जगह पर कईओँ के चेहरे से पर्दे उठेंगे…

  4. mukesh

    August 1, 2011 at 1:09 pm

    agar tum apni kahi ek bhi baaton ko sahi sabit kar do tumhari sari baate sahi hai ha tumhare ma baap ne tumhara naam to rakha hoga

  5. mukesh

    August 3, 2011 at 9:29 am

    प्रिय मित्र आनाम पत्रकार ज़रीन के लिखे आलेख पर आपकी टिपण्णी देखी एसा लगता है से. इ. ओ. को आप काफी करीब से जानते हैं एक लेख से है आप उनके साथ खड़े रहे का दंभ भरते है लेकिन हकीकत तुमको पता है | मुझे लगता है तुम पत्रकार कम और दलाल जादा हो और ये भी पता नहीं की तुम मेल हो की फिमेल क्यूंकि तुम्हारी आदत तो किसी और की लग रही है माँ बाप का पता मिले तो एक नाम रख लोम फिर ज़रीन के खिलाफ खड़ा होना तुम्हरे जैसे लोग ही पत्रकार बिरादरी को बदनाम कर रहे है मुझे तो लगता है टॉम मुकुंद सही की पैदाइस हो …..मुकेश रायपुर

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