सावधान! कहीं अगले शिकार आप तो नहीं? झारखण्ड ( रांची) से एक चैनल का प्रसारण किया जाता है. नाम पहचाने के लिए कोई खास जद्दोजहद की जरूरत नहीं पड़ेगी… अभी केवल दो चैनलों का ही प्रसारण रांची से किया जाता है और संयोगवश दोनों ही चैनल नोएडा से प्रसारित हो रहे एक चैनल के द्वारा प्राप्त किये गए लाइसेन्स पर चल रहे हैं… इन्हीं दोनों चैनलों में से एक चैनल है जिसमे सन्दर्भ में चर्चा की गयी है.
इस चैनल के तथाकथित मालिक एक पूर्व मीडियाकर्मी रह चुके हैं… तथाकथित इसलिए कि मालिक के सन्दर्भ में कई भ्रांतियां है… कोई कहता है इसका मालिक विनोद सिन्हा है… कोई कहता है इसका मालिक एक पूर्व मुख्यमंत्री है… कोई कहता है इसका मालिक एक पूर्व संपादक है, जो एक प्रतिष्ठित दैनिक अखबार से इस्तीफा देकर आये हैं.
खैर मालिक जो भी हो… पर इस तथाकथित मालिक के मानव संसाधन प्रबंधन कला की दाद देनी होगी… हर एक व्यक्ति/पद का रिप्लेसमेंट तैयार कर के रखता है यह तथाकथित मालिक… वो चाहे चैनल हेड का पद हो अथवा इनपुट हेड, आउट पुट हेड, सेल्स हेड, ईएनजी हेड, या फिर सामान्य रिपोर्टर, कैमरामैन, एकाउंटटेंट या ड्राईवर… होना भी चाहिए… क्यों न हो भला… अगर किसी ने अचानक से नौकरी छोड़ दी तो चैनल बंद नहीं हो जाएगा? दिखने में तो यह एक सामान्य घटना नज़र आती है… लेकिन इसके पीछे का मानव संसाधन प्रबंधन कुछ और ही है… जब जब ऐसे विकल्प तैयार किये हैं इस तथाकथित मालिक ने तो उस समय शामत आई है उस व्यक्ति की… जिसका विकल्प तैयार किया गया है.
हरिनारायण सिंह आये तो छुट्टी हुयी सुशील भारती एवं मनोज श्रीवास्तव की… वेद प्रकाश तैयार हुए तो छुट्टी हुयी अफरोज आलम एवं विशाल कौशिक की… राकेश सिन्हा तैयार हुए तो छुट्टी हुयी मधुरशील की… रविन्द्र सहाय तैयार हुए तो छुट्टी हुयी कुंदन कृतज्ञ की… प्रशांत भगत तैयार हुए तो छुट्टी हुयी राजेश की… अब एक नया गुल खिला है… एक और शख्स की छुट्टी करने की तयारी की जा रही है… उनको रिप्लेस करने के लिए एक मैडम को ज्वाइन कराया गया है… जिनकी तनख्वाह है 11 लाख 70 हज़ार वार्षिक… उनकी कई विशेषताएं हैं… उनमें से एक यह है कि वो इस तथाकथित मालिक के उपनाम की ही हैं.
वाह रे दुनिया… 5 लाख 40 हज़ार को रिप्लेस करेंगे 11 लाख 70 हज़ार से… सुरखाब के पर लगे हैं मैडम को… यह हँसने की नहीं चिंता करने का विषय है… कहीं अगला नंबर आपका तो नहीं… चैन से काम करना है तो जाग जाओ… देखो कहीं अगली कहानी आपकी तो नहीं… कुछ पुराने प्रचलित मुहावरे हुआ करते हैं…” जाके पैर न फटे बेवाई, वो क्या जाने पीर पराई”…. “बाँझ क्या जाने परसौत की पीड़ा”… बोलचाल की भाषा की यदि बात करें तो कह सकते हैं कि इन दोनों मुहावरों के भावार्थ सामान हैं… सामान्य मानव मनोविज्ञान भी यही कहता है कि आप तब तक किसी परेशानी का हल नहीं ढूँढते हैं जब तक वो आपके घर में दस्तक नहीं दे देती है… तो बंधुओं !!! लोकतंत्र के चौथे खम्भों… इसके पहले की यह आपका खम्भा हिलाए… जाग जाओ.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.












Kundan Kritagya
August 23, 2011 at 7:29 am
वाह भाई वाह, क्या खूब कही,मज़ा आ गया
R.K.SAHAY
August 23, 2011 at 11:38 am
Sach hai to dikhega……………..ye baat sahi nahi hai ki mughe Replace karne ke liye Maidam ko join karaya gaya hai/………..if ye baat sahi hoti hai to Raste aur bhi hai…………jo log mujhe jante pichle 20 yr se mai 1 din bhi khali nahi baitha ……………maine hi chora hai mujhe hataya nahi gaya…..Thanks
jitendra
August 24, 2011 at 12:49 pm
अरे भाई जिसने भी लिखा है बहुत खूब लिखा है. लेकिन इस चैनल के तथाकथित सी ई ओ के एक चतुराई भरी खासियत का अगर जिक्र न हो तो यह कहानी अधूरी ही समझी जायेगी. सवाल सिर्फ चैनल में काम करने वाले के प्रबंधन का नहीं है. इस जुगाडू महाराज ने कई लोगो को बेवकूफ बना कर करोड़ो की राशि भी ठग कर हड़प लिया है. जिसका एक उदहारण बाबा बैद्यनाथ कंस्ट्रक्शन के मालिक मनोज कुमार सिंह है. जिनको चैनल के शुरू होने के ठिक पहले निदेशक बनाने का सब्ज बाग दिखा करीब चालीस लाख रूपये ले लिए गए. और आज आलम यह है की मनोज अपने पैसो की वापसी को लेकर दर दर भटक रहा है. मनोज तो सिर्फ एक उदहारण है. इनकी तरह दर्जनों लोग है जो इस धूर्त सी ई ओ के भ्रम जाल में फंस चुके है. पुरे मामले की अगर निष्पक्ष जाँच करा ली जाय तो इस चतुर सियार सी ई ओ को जेल जाने से कोई नहीं बचा पाएंगा. भले ही यह आज अपने आप को सिकंदर मान बैठा हो. पर एक ना एक दिन बिल्ली के गले में कोई ना कोई घंटी जरुर बांध देगा…….