आज पत्रकारिता किधर जा रही है, इस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खास तौर पर यूपी की पत्रकारिता, जो पीत पत्रकारिता के साथ चापलूस पत्रकारिता व सुरा-सुन्दरी का मार्ग बनी है, उस पत्रकारिता को जड़ से खत्म करने के लिये मैं पिछले 16 सालों से लखनऊ में संघर्ष कर रहा हूं। भले ही मैं एक ऐसा मुकाम हासिल नहीं कर पाया, जिससे मैं उन मठाधीश पत्रकारों के किले को ध्वस्त कर पाता। लेकिन मैं ने अपने विचार व अपने कार्यों से हर उस पत्रकार की नाक में दम अवश्य कर रखा है, जो समाज के लिए कलंक हैं।
मेरे पास कई ऐसे मठाधीश पत्रकारों का पूरा काला-चिट्ठा है, अगर मैं उसे आपके पोर्टल में ब्रेक कर दूं तो यूपी की पत्रकारिता में एक भूचाल आ जाएगा। कौन पत्रकार किस तौर-तरीके को अपना कर करोड़ों रुपये डकार गया है और कौन डकारने की फिराक में है और किस पत्रकार ने कितने मकान व कितनी अकूत संपत्ति अर्जित की है, उसका पूरा ब्यौरा व काला-चिट्ठा मौजूद है, जिसका मैं किसी भी समय नई दिल्ली के जंतर-मंतर में धरने पर बैठ कर खुलासा करूंगा। मैं पिछले 16 सालों से यूपी की मीडिया में अन्ना की भूमिका में कार्य कर रहा हूं। आपने एक बार पत्रकारों द्वारा संपत्ति का एलान करने का जो क्रम चलाया था उसमें मै यूपी से पहला पत्रकार था, जिसने अपनी व अपनी पत्नी की संपत्ति का पूरा ब्यौरा अपने समाचार पत्र व आपके पोर्टल के माध्यम से देश के पत्रकारों के सामने रखा था।
आज यूपी की पत्रकारिता का चेहरा इतना विकृत होता जा रहा है, जो आने वाले समय में काफी वीभत्स होगा, क्योकि आज जिस तरह से एक गुट दूसरे गुट को परास्त करने में लगा है, उस में कुछ मुट्ठी भर पत्रकार पूरे राज्य मुख्यालय के लगभग 290 पत्रकारों के चेहरों को प्रदेश की जनता के सामने विवादों में लाकर पृश्न चिन्ह लगा रहे हैं। कुछ मुटठी भर पत्रकारों ने हर जगह अपना कब्जा कर रखा है। चाहे प्रेस क्लब हो या फिर सीटीओ में खबर लिखने का पवित्र स्थान, उसे दारू-मुर्गा व अन्य भोग विलास की जगह बनाकर एक पवित्र पेशे को बदनाम कर दिया है। इससे पूरे पत्रकार बिरादरी की साख पर बट्टा लग रहा है। हमारे कई ऐसे पत्रकार हैं जो अब चुपचाप उस स्थान से निकल जाते है, क्योंकि वह अपने आपको पत्रकार कहलाने में शर्म महसूस करते हैं। कई ऐसे साथी हैं जो अपनी मन की बात को मसोस कर रह जाते हैं। लेकिन कुछ बेशर्म पत्रकार लगातार दो दशकों से अपनी हेकड़ी व अपने कर्मो से पूरी पत्रकारिता बिरादरी की साख खराब किए हैं। जब राज्य मुख्यालय का चुनाव आता है तो यह मुट्ठी भर पत्रकार संगठन की दम पर अपना खेल खेलने लग जाते हैं। और चुनाव को प्रभावित कर देते हैं।
मैं तीन बार अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा लेकिन इस कलयुग में मेरा जीतना संभव नहीं हो सका। क्यों कि मैं ने हर पत्रकार के लिए ऐसी बातें की जो सबके भविष्य से जुड़ी है। मेरा मानना है कि आप पत्रकारिता करें। भडुआ गिरी नहीं? पत्रकारिता में आपको लिखना-पढ़ना आना चाहिये। न कि दलाली करना। पंचम तल व सरकारी अधिकारियों की परिक्रमा करना उन्हें सुरा से लेकर सुन्दरी तक उपलब्ध कराना पत्रकारिता नहीं है। आज कुछ पत्रकार जनहित याचिका के नाम पर, जिसे पीआईएल कहते है, किसी पार्टी के पीछे से हाथ रखने व किसी ब्यूरोक्रेट गुट द्वारा किसी को हटाने के लिए करोड़ों रुपये का सौदा करके अपने आपको बड़ा पत्रकार बनाने की चाहत रखते हैं। पिछले दो दशकों में राजधानी के जिन-जिन पत्रकारों ने जनहित याचिका दायर करने के नाम पर करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे कर लिए हैं, उनकी जांच तत्काल प्रभाव से होना चाहिये कि आखिर उनके पास इतनी अकूत संपत्ति कहां से आई।
मैं ने कई मुद्दे अपने प्रिय उन भाइयों के लिए उठाये हैं, जिन्हें राज्य मुख्यालय का मान्यता प्राप्त पत्रकार होने का सौभाग्य तो प्राप्त है, लेकिन उन्हें उसका सही हक आज तक नहीं मिल सका है। चापलूसी करके कई पत्रकारों ने सरकार से कई मकान व दुकान हासिल कर ली है। कुछ ऐसे पत्रकार हैं, जिनके पास दो जून की रोटी खाने के लाले हैं, उनकी न तो सरकार सुनती है न ही पत्रकारों के नाम पर चल रहे संगठन व न ही राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति। सिर्फ चुनाव आने के वक्त अपने माहौल को बनाने के लिए कुछ मुट्ठी भर पत्रकार जातिगत आधार व धनबल तथा सुरा-सुन्दरी का सहारा लेकर फिर अध्यक्ष व नई कमेटी के सदस्य बन जाते है। करीब दो सौ पत्रकार ऐसे होते हैं, जिनका चुनाव में मत लेकर उनके साथ पूरे दो साल तक धोखा किया जाता रहता है।
मैं आज काफी द्रवित हूं कि आखिरकार यूपी की पत्रकारिता का अंत क्या होगा। मैं ने अपनी संपत्ति का एलान करके उन सभी पत्रकारों पर दवाब बनाया था जो अपनी संपत्ति का एलान नहीं करना चाहते थे। लेकिन अब अन्ना के आने के बाद मीडिया का अन्ना न कोई बन जाए उसके डर से कई पत्रकार आगे आने लगे हैं और अपनी संपत्ति की घोषणा कर रहे हैं, जिसका स्वागत करना चाहिये। लेकिन संपत्ति के साथ-साथ पूरी पारदर्शिता को बनाए रखना होगा। मैं कुछ ही दिनों में उन टॉप 20 पत्रकारों की एक ऐसी सूची जारी कर रहा हूं, जिनके पास कई सरकारी प्लॉट व कई बेनामी मकान तथा अकूत संपत्ति, कार व बैंक बैलेंस हैं, जो सीबीआई की जांच के दायरे में आ सकते हैं कि आखिरकार इन्हों ने किस स्रोत से इतनी संपत्ति एकत्र की है। उनके कहॉ आर्टिकल छपते हैं, कितनी कमाई होती है, कितना वेतन मिलता है और कितनी संपत्ति है। किस तरह, कैसे जनहित याचिका दायर करके कहॉं से पैसा बनाया है और भ्रष्टाचार की बात करने की आड़ में किस नौकरशाह व किस मंत्री को हलाल किया है। इसका पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करके मीडिया का अन्ना बनने की राह पर चलने का प्रयास करूंगा।
कुल मिलाकर यशवंत जी आप एक ईमानदार पत्रकार हैं। अपने अथक प्रयास व संघर्षों से अपने पोर्टल को चला रहे हैं, मैं इस पर आपको बधाई देता हूं। मुझ गरीब पत्रकार से जो बन पड़े आपकी सेवा में हाजिर हूं। मैं अपने सभी तीन सौ उन पत्रकारों को आगाह भी करना चाहता हूं कि अब वक्त आ गया है कुछ बड़े बदलाव को करने का, इसलिये आप उठें और अपने ईमान व अपने करम से एक ऐसा फैसला करें जो आने वाली पत्रकारिता के लिये एक नई मिशाल बन सके। धन्यवाद।
प्रभात त्रिपाठी
प्रत्याशी, संभावित अध्यक्ष पद
उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता
मोबाइल : – 9450410050












santosh pandey
September 5, 2011 at 10:18 am
aap ki imandari aap ke lekh se hi pata chal gai ..vah re imandar ptrakar
कमल शर्मा
September 5, 2011 at 10:33 am
प्रभात त्रिपाठी, भूचाल लाने से आपको किसने रोक रखा है। करिए यह शुभ काम। अन्ना हजारे अभी अभी सब को हिलाकर गए हैं। आप किसलिए रुके हुए हैं समझ नहीं आ रहा। आपकी इस पोस्ट पर कुछ टिप्पणी आने के बाद भूचाल लाने वाले हैं तो टिप्पणी का श्रीगणेश मैं कर रहा हूं। रुकना मत, यूपी की पत्रकारिता में भूचाल लाने से।
shravan hsukla
September 5, 2011 at 12:16 pm
intjaar hai .. aapke khulaaso ka.. aur break karne ke lie hamara bhadas4media hai.. jo kisi ke dallegiri se nahi.. apne dam par chalta hai.. sachhai ki ibadatgaah. is kalankit ho chuke peshe me bhi.. intjaar rahega..
bhimmanohar
September 5, 2011 at 12:28 pm
jaldi khulasa kare hume bhi pata chale kitne kansh hamare maha bharat me hai……
vinod mahajan
September 5, 2011 at 2:08 pm
kuch ni hoga insai bi, agar karna hai to karkai dikha do hum bi chahtai hai ki koi shair samnai to ayai sab kai sab bhigi bili banai huai hai
Shashi Ranjan Verma
September 5, 2011 at 4:13 pm
sir, UP ke patrkaron ki pol kholene ke saah pure desh ke patrakorn ka pol bhi khole kyanki pure desh me yahi isthi hai rajaniti ke baad agar media me hi sabse jyada chaaploosh log hain jo sachche aur imandar patrkaron ko aage nahi aane dete jisase kai log kunthi hokar patrkarita chhod rahen hai. Bahoot jaruri hai ki media me bhi koi anna paida ho. aap apana abhiyan shuru kijiye hum aap ke saath hain. jai hind.
rajesh
September 6, 2011 at 5:36 am
bhai sahab aap jisko patrakar kah rahe hai wo patrakar nahi balki dalal hai , dalali ka alag 2 tarika hota hai aurat aupne jism ki aar leti hai,ye dalal midiya ka sahara le liyen hai, aur aupne aap dhanwan batate hai ,inko aupni man se jyada ,dhan ki chahat hai, ye is dor ki ptarkarita hai, ise rok pana muskil hai, ye jis bhi sanstha me hai waha bhi inko dhun dena parta hai,
LKS Mouhar
September 6, 2011 at 6:19 am
Sir,
realy good work done from you, i suggest this is a best time to start a new news paper from U P please think.
ADIL SAIFI
September 6, 2011 at 7:50 am
PRABHAT BHAI AAP IMANDAAR HAI AUR JAISA KE AAP JANTEY HAI KI U.P MAI PATARKAR KAM DALAAL JADA HAI AAP KHULASA KARE
The Public Leader
September 6, 2011 at 1:24 pm
Prabhatji, Apki pahal sarahaniya hai. Uttar Pradesh me sirf Lucknow me hi Dalalon ki Bharmar nahin hai. Sonbhadra me to yeh sankhya kafi adhik hai. Kahane ko to yeh Chhota sa Janpad hai, lekin yehan pa Dalalon ki bharmar hai. Yehan Farzi patrakaron ki jamat se lekr Satta k Dalalon ki Bharmar hai. Is Janpad me Adhiktar Akhbaron aur News Channelon k Stringers ko na hi koi Vetan milta hai aur na hi stori k badale me paisa. Isk bawjood Lucknow se lekr Varanasi k tathakathit Patrakaro ki jamat yahan mil jayegi. Patrakarita k nam par Dalali karne walon me Varanasi k Logon ki sankhya is Janpad me kuchh jyada hi hai. Company se paisa nahin milne ka bad bhi in janpadon k Tathakathit patrakar din bhar Camera aur mike lekr janpad ka chakkar lagate rahte hai. Yahan pa karib 2 darzan News channelo ki ID mil jayegi, Lekin habar do par bhi chal jaye to bahut badi bat hai. Yah Janpad patrakarita ki drishti se Desh ka sabase adhik news report wale janpado me sooomar hai, lekin yahan k Tathakathit patrakaron k Chalte Is janpad ki wastavik sthiti rastriya star par nahin pahunch pati hai. Prahatji Ab jaroorat hai milkar Awaz Uthane ka. Isk liye sangathit hokar yojanabaddha tarike se kam karne ki jaroot hai, Nahin to ye tahtakathi dalal Apne khilaf Uthane wali awaz ko Bhrashta tantra k madhyam se daba denge. Anna Hazare ko corporate media ne bhale hi samarthan diya, lekin Janwadi awaz ko ye samarthan nahin denge. Ap kadam badhao, ham har mod par apk sath milenge.
sudhir awasthi
September 6, 2011 at 2:25 pm
सर, क्षमा करना बडबोली की आदत है आपके विचारों को पढकर बहुत अच्छा लगा हमें लगता था कि हम ही पत्रकारों के कारनामों से दुखी हैं पर ऐसा नहीं और भी हमारे साथी पत्रकारों के कारनामों से हमसे भी ज्यादा दुखी हैं. मेरे पास शहरी पत्रकारिता करने के लिए कई प्रस्ताव आये उनको ठुकराकर ग्रामीण पत्रकारिता कर रहा हूँ. जीवन भर आदर्श ग्रामीण पत्रकारिता करने का मन भी है. बड़े पत्रकार क्या करते हैं कैसे करते हैं आम आदमी तो उनके कारनामों के बारे में सोच भी नही सकता शहरी पत्रकारिता बरेली, पानीपत, हरदोई में करने का मौका मिला तो शहरी पत्रकारिता और ग्रामीण पत्रकारिता को करीबी से देखा है. दोनों जगह पर कुंठा ही पाई, ख़ैर और भी लोगो को लिखना है. बस इतना ही ……….. हाँ एक बात लिखकर दे रहा हूँ कि पत्रकारों के हित में कोई भी आन्दोलन हो हम पूरी अपनी ताकत से उसमें भाग लेंगे…….. मुझे गर्व है कि में पत्रकार हूँ मेरे अन्दर पत्रकारिता रग रग में दौड़ रही है. पिछले ११ वर्षों से चाय नही पीता ४ वर्षों से नमकीन बिस्कुट आदि नही खाता हूँ घर से दाल रोटी खाकर जाता घर में भोजन करता हूँ. कर्षक परिवार से हूँ अपने बाप की गाड़ी कमाई पत्रकारिता में गंवाई है. पत्रकारों के भविष्य के बारे में जाने क्यों सोच करता हूँ……………………. sudhir awasthi पत्रकार baghauli हरदोई uttr prdesh 9454874675