Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

मदद-अपील

दर्जनों मीडियाकर्मियों की सांस अटकी, करोड़ों रुपये डूबने के आसार

: कई पत्रकारों पर लगे गंभीर आरोप : एक बड़ा प्रकरण सामने आया है. मीडियाकर्मियों वाली एक हाउसिंग सोसायटी के कर्ताधर्ताओं पर गड़बड़-घोटाले के आरोप लग रहे हैं. प्रकरण ग्रेटर नोएडा की एक सोसाइटी का है जिसमें दिल्ली-एनसीआर के छोटे-बड़े करीब 40 मीडियाकर्मी जुड़े हैं और बाकी पिचहत्तर मेंबर नान मीडिया के हैं. सदस्यों की कुल संख्या है 115. सोसायटी का नाम है मीडिया विला सहकारी समिति.

: कई पत्रकारों पर लगे गंभीर आरोप : एक बड़ा प्रकरण सामने आया है. मीडियाकर्मियों वाली एक हाउसिंग सोसायटी के कर्ताधर्ताओं पर गड़बड़-घोटाले के आरोप लग रहे हैं. प्रकरण ग्रेटर नोएडा की एक सोसाइटी का है जिसमें दिल्ली-एनसीआर के छोटे-बड़े करीब 40 मीडियाकर्मी जुड़े हैं और बाकी पिचहत्तर मेंबर नान मीडिया के हैं. सदस्यों की कुल संख्या है 115. सोसायटी का नाम है मीडिया विला सहकारी समिति.

वर्ष 2004 में यह सोसाइटी बनी. वर्ष 2007 में मकान बनाकर सबको देना था. तीन तरह के प्लाट लिए गए थे. डेढ़ सौ स्क्वायर यार्ड, दो सौ स्क्वायर यार्ड और तीन सौ स्क्वायर यार्ड. डेढ़ सौ स्क्वायर यार्ड वालों ने करीब बीस लाख रुपये जमा किए. दो सौ स्क्वायर यार्ड वालों ने तीस लाख रुपये जमा किए और तीन सौ स्क्वायर यार्ड वालों ने बयालीस लाख रुपये दिए. इसी कैटगरी के प्लाटों के लिए नान-मीडिया वालों के लिए रेट क्रमशः सत्तर लाख रुपये, नब्बे लाख रुपये और डेढ़ करोड़ रुपये रखा गया. ऐसा इसलिए ताकि मीडिया वालों को प्लाट व मकान सस्ते में पड़ें.

इस हाउसिंग सोयाटी का प्रेसीडेंट प्रभात डबराल को बनाया गया और सेक्रेट्री अनिल कुमार शर्मा (उस समय सहारा में कार्यरत). अन्य जो कुछ लोग प्रमुख फंक्शनरीज थे, उनके नाम हैं- राज मिश्रा, राजेश कुमार सिंह आदि. ये लोग भी दिनों सहारा में हुआ करते थे और संभवतः आज भी हैं. इस हाउसिंग सोसायटी ने ग्रेटर नोएडा अथारिटी को जमीन की पूरी कीमत नहीं दी है. आठ करोड़ रुपये मूल्य के जमीन में अभी करीब डेढ़ करोड़ रुपये देने बाकी हैं. पैसे न देने के कारण अथारिटी वाले जो चक्रबृद्धि ब्याज लेते हैं, वह ब्याज की रकम करीब 85 लाख रुपये है. इस तरह ढाई करोड़ रुपये अभी तक जमीन के नहीं दिए गए. सोसाइटी को वर्ष 2007 में मकान बनाकर देने थे पर काम कंप्लीट नहीं हुआ है. आरोप है कि आधे अधूरे कुछ मकान बने हैं. इस बात को लेकर सोसाइटी के सदस्यों ने हल्ला मचाया तो पिछले महीने की 18 तारीख को इजीएम बुलाई गई. इसमें सदस्यों ने सोसाइटी के कर्ताधर्ताओं पर करोड़ों रुपये हड़पने और मीडियाकर्मियों के साथ धोखा करने के आरोप लगाए.

इसी के बाद ईजीएम में सोसाइटी के पदाधिकारियों ने इस्तीफा देकर अपना पल्ला झाड़ लिया. पर सोसाइटी के सदस्यों का गुस्सा ठंढा नहीं पड़ा है. भड़ास4मीडिया को फोन पर कई सदस्यों ने सूचित किया कि वे करोड़ों रुपये हड़पने वाले पत्रकारों को छोड़ेंगे नहीं. उन्हें एक-एक पैसे का हिसाब देना पड़ेगा. आधे अधूरे काम और जमीन का पैसा अथारिटी को ना देने का खामियाजा अब मेंबरों के मत्थे पड़ेगा. उन्हें फिर से अपनी जेब से पैसे देने होंगे. इस बात को लेकर सदस्यों में भारी गुस्सा है. इन सदस्यों ने कई स्तर पर शिकायत दर्ज कराने का मन बना लिया है.

इन आरोपों के बारे में सोसाइटी के प्रबंधन से जुड़े रहे कुछ लोगों का कहना है कि गलती सोसाइटी के पदाधिकारियों की नहीं बल्कि ग्रेटर नोएडा अथारिटी की है. सोसाइटी की तरफ से पूरा पैसा एक साथ जमा करा दिया गया बैंक से लोन लेकर. पर अथारिटी के लोगों ने पैसे इकट्ठे अपने पास रख लिया और महीने का इंस्टालमेंट काटकर जमा करते रहे. सोसाइटी के प्रबंधन से जुड़े लोगों के मुताबिक ग्रेटर नोएडा अथारिटी में कार्यरत कुछ कर्मियों ने कागज पूरे नहीं किए और कह दिया कि इतना ब्याज देना अभी बाकी है. जो पैसा पांच साल में देना था, उसे हम लोगों ने तो कुछ ही महीनों में दे दिया.

लेकिन अथारिटी वालों ने लापरवाही की. कागज आधा अधूरा रखा क्लर्कों ने. फिर पांच साल बाद बता दिया कि पेमेंट नहीं किया है इस तरह मिस्टेक टेक्निकल है, जो ग्रेटर नोएडा की तरफ से हुई है. वे लोग उसे ठीक करने जा रहे हैं. सारा पैसा जब दे दिया था तो ग्रेटर नोएडा अथारिटी को इंस्टालमेंट खत्म करके एक साथ ले लेना चाहिए था. पर कागजों में ये काम कंप्लीट नहीं हुआ. पैसा अपने पास रखकर हर महीने इंस्टालमेंट काटते रहे और इंट्रेस्ट जोड़ते रहे. प्रबंधन के लोगों का कहना है कि सोसाइटी फंक्शनल है. लोग वहां रह रहे हैं. थोड़े बहुत जो विवाद हैं, उसे सुलझा लिया जाएगा.

इस प्रकरण के बारे में अगर आपके पास भी कुछ जानकारी हो तो भड़ास के पास [email protected] के जरिए पहुंचाएं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. मनीष सिंह

    October 12, 2011 at 5:57 pm

    एक और फर्जी सोसायटी बनाई जा रही है। जिसका नाम है। उत्कृष्ट मीडिया सहकारी गृह आवास समिति ….ये सोसायटी गाजियाबाद में बन रही है। कुछ तथाकथित बड़े और कुछ टुच्चे पत्रकार भोले भाले लोगों को फांसने में लगे हैं। अपने मित्रों तक को धोखा दिया जा रहा है। इस सोसायटी का न तो कोई ऑफिस है न ही कोई पता और न ही कोई जिम्मेवार आदमी इसमें है। बिल्डिंग कितनी तेजी से बन रहा है पता नहीं लेकिन एक बार पैसा लेकर लोगों को मूर्ख बनाने का काम जोरों पर है। भैय्या पत्रकार भी बिल्डर बन रहे हैं अब…

  2. yadav sri ram

    October 13, 2011 at 7:31 am

    co-operative society mai ghar ki kimat ek honi chahiye ,ispar non- media member jara gaur karen…… ye media walon ka atychachar hai —-.Non media member

  3. r k garg

    October 14, 2011 at 2:21 am

    Yashwant jee… MERI TO MATI MARI GAYEE

    jo maine patrkaron ki society mai makan liya,,,ye log patrkaron ko jo makan 20 lakh mai diye wahi hame ek karore mai mila,,, aur aaj society ko paise ki dikkat isliye hui kyonki in patrakaron ne samay par paise nahi diye aur abhi bhi defaulter hai jise tatkalin managment kamitee ne bachaya…… ham log baar- baar kamiti se kahte rahe ki inhe nikalo ispar dhyan nahi diya….. aur in patrkaron ko bachate rahe…. aaj yahi patrkar inke pichhe pade hain….. aur karoron ki makan saste mai leker unki charcha tak nahi kar rahen hai aur ghotala ka naam de rahen hai… aakhir inki kya gayee hai…… hamari kismat inke hathon mai hai,,,,,tajubb ki baat ye hai ki intrim comitee bhi ispar kutch nahi bol rahi hai….. kabhi bhi patrkaron , wakil aur police walon ke saath nahi rehna chahiye… NON MEDIA MEMBER.

  4. Yasin Ali

    October 14, 2011 at 9:28 am

    मैंने भी मीडिया की इस सोसाइटी में घर एक करोड़ में ख़रीदा है, मुझे यहाँ इस सोसाइटी को बनाने वाले बिल्डर ने फंसाया. बाद में पता चला की येही मकान मीडिया के लोगों को अठाईस लाख के दिए गए थे. आज मीडिया के ही लोग एक दुसरे को गली दे रहे हैं. कल तक जब येही कमिटी मीडिया के लोगों को नोटिस नहीं भेज रही थी उनके दाम नहीं में इजाफा करने या फिर इंटेरेस्ट लगाने से मुकर रही थी तो सभी मीडिया वाले एक साथ थे. सही कहा जाता है की मीडिया पुलिस और वकील की ना तो दोस्ती भली ना दुश्मनी. मुझे सही मायने में मजा आ रहा है. यह अपने आप को ज़हीन समझने वाले जाहिलों की तरह आपस में लड़ रहें हैं ये यह नहीं समझ रहे हैं की असली मजा तो बिल्डर ने उठाया पहले पुराने कमिटी के लोगों को सलाह दे कर और अब दुसरे लोगों को सलाह देकर. वो तो अपना माकन महल की तरह बना कर मजे उठा रहा है. ऐसे में कुछ समझदार लोगों को सामने आना चाहिए हम तो नॉन मीडिया के कारण कुछ नहीं कर सकते हैं पर ये अपने आपको पढ़ा लिखा कहने वालों को आपस में ना लड़ कर आगे बढ़ने का रास्ता तलाशना चाहिए. इंसा अलाह इन लोगों को सही गलत समझने की क़ाबलियत मिले. यासीन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...