ई-सेंस इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, मुम्बई ने युवाओं को ध्यान में रखकर अंग्रेजी मैग्जीन ‘युवा’ लांच कर दी है। मैग्जीन का पहला अंक मार्केट में आ चुका है। इस अंक में कवर स्टोरी का विषय ‘गांधी बनाम गांधी’ है। राहुल गांधी और वरुण गांधी युवा हैं, अलग-अलग पार्टियों में हैं, युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं तो उनके बारे में देश के युवा क्या सोचते हैं, इस चीज की मैग्जीन ने पड़ताल की है। ‘युवा’ के पहले अंक के लिए मॉनिटरिंग एंड रिसर्च सिस्टम्स (एमएआरएस) द्वारा अप्रैल के पहले सप्ताह में युवाओं के बीच सर्वेक्षण कराया गया। सर्वे अप्रैल के पहले सप्ताह में देश के नौ राज्यों की राजधानियों में कराया गया। यह सर्वे दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर, अहमदाबाद, हैदराबाद और लखनऊ में 1050 शहरी युवाओं पर किया गया। इससे यह बात सामने आई कि भविष्य में वरुण गांधी के मुकाबले राहुल गांधी काफी बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे। 18 से 25 वर्ष के उम्र के बीच के 57 प्रतिशत युवाओं ने अपना मत राहुल को दिया। वरुण के पक्ष में केवल 19 प्रतिशत युवा थे।
हालांकि 24 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि इन दोनों में से कोई भी अच्छा प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। आश्चर्यजनक बात यह है कि केवल 27 प्रतिशत युवाओं ने पीलीभीत में वरुण के भाषण के पीछे भाजपा का हाथ बताया जबकि 73 प्रतिशत ने कहा कि इसके जिम्मेदार वरुण खुद थे। भाजपा के रणनीतिकारों ने पीलीभीत में वरुण गांधी के भाषण कांड से फायदा मिलने की जो कल्पना की थी, वह साकार नहीं हो पाएगी और इससे उन्हें निराशा का सामना करना पड़ेगा। इस सर्वे 71 प्रतिशत युवाओं ने यह मत जाहिर किया। कांग्रेस में राहुल की हैसियत के बारे में 87 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि सोनिया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का यह बेटा कांग्रेस के किसी भी नेता से ज्यादा ताकतवर है। सर्वे में शामिल की गई युवतियों में से 62 प्रतिशत ने राहुल गांधी को मनपसंद कुंवारा बताया, जबकि 21 प्रतिशत ने इसके लिए वरुण को चुना। 17 प्रतिशत ने यह भी माना कि इनमें से कोई भी उनका मनपसंद कुंवारा नहीं है।
युवाओं ने अपने प्रेरक के रूप में राहुल को 10 में से 7.8 और वरुण को 5.5 अंक दिये। 21 से 25 वर्ष तक के आयु के युवाओं ने तो राहुल को 8 अंक दिये। जब उनसे यह पूछा गया कि नेहरू-गांधी परिवार के इन दोनों युवकों में से देश का नेतृत्व करने के लिए कौन बेहतर है तो अहमदाबाद, बैंगलोर, भुवनेश्वर, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता और लखनऊ के ज्यादा युवाओं ने राहुल का नाम लिया। देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई, जहां बाल ठाकरे ने वरुण का पक्ष लिया था, वरुण के ही साथ रही। जब ‘युवा’ ने इन दोनों चचेरे भाइयों की तुलना भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से करने को कहा, तो उन्होंने धोनी को 10 में से 8, राहुल को 7.3 और वरुण को 5.9 अंक दिये। सर्वे में शामिल युवाओं में से 41 प्रतिशत ने कहा कि युवा सांसदों ने संसद का चेहरा बदला है। हालांकि 59 प्रतिशत ने कहा कि युवा सांसदों से संसद पर कोई असर नहीं पड़ा। लगभग 49 प्रतिशत का मानना था कि युवा राजनीतिज्ञों को अच्छा काम करने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। 80 प्रतिशत ने माना कि इन युवा नेताओं को बदलाव लाने के लिए 10 से 15 साल के संसदीय अनुभव की जरूरत होगी।











