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चौथी दुनिया ने भावी पीएम का नाम बताया

प्रेस विज्ञप्ति : साप्ताहिक अखबार ‘चौथी दुनिया’ का नया अंक (10 मई 2009) आ चुका है। मुख्य संपादक और मशहूर पत्रकार संतोष भारतीय इस बार कवर स्टोरी के लेखक हैं। कवर स्टोरी है- ‘कांग्रेस जानबूझ कर हारना चाहती है’। इस विश्लेषण में कांग्रेस और अन्य दलों के दांव-पेंच, पिछले पांच वर्षों के कार्यों, भविष्य की स्थिति-रणनीति-राजनीति के बारे में सटीक जानकारी दी गई हैं। कई सवाल उठाए गए हैं तो कई रणनीतिक बिंदुओं को बयान किया गया है। शुरुआत यूं है- ”कांग्रेस क्या जानबूझ कर चुनाव हारना चाहती है? यह सवाल भारतीय राजनीति की परीक्षा का अनिवार्य प्रश्न है, जिसका उत्तर देना ही होगा. और इसी के सही उत्तर पर पंद्रहवीं लोकसभा और नई बनने वाली सरकार का बीजगणित हल हो सकता है। आइए, इसे हल करने की कोशिश करते हैं…”’।

प्रेस विज्ञप्ति : साप्ताहिक अखबार ‘चौथी दुनिया’ का नया अंक (10 मई 2009) आ चुका है। मुख्य संपादक और मशहूर पत्रकार संतोष भारतीय इस बार कवर स्टोरी के लेखक हैं। कवर स्टोरी है- ‘कांग्रेस जानबूझ कर हारना चाहती है’। इस विश्लेषण में कांग्रेस और अन्य दलों के दांव-पेंच, पिछले पांच वर्षों के कार्यों, भविष्य की स्थिति-रणनीति-राजनीति के बारे में सटीक जानकारी दी गई हैं। कई सवाल उठाए गए हैं तो कई रणनीतिक बिंदुओं को बयान किया गया है। शुरुआत यूं है- ”कांग्रेस क्या जानबूझ कर चुनाव हारना चाहती है? यह सवाल भारतीय राजनीति की परीक्षा का अनिवार्य प्रश्न है, जिसका उत्तर देना ही होगा. और इसी के सही उत्तर पर पंद्रहवीं लोकसभा और नई बनने वाली सरकार का बीजगणित हल हो सकता है। आइए, इसे हल करने की कोशिश करते हैं…”’।

चौथी दुनियासंतोष भारतीय उन कुछ दिग्गज पत्रकारों-संपादकों में से हैं जिन्होंने अपने जीवन के कई दशक जमीनी सच्चाइयों को बयान करने वाली रिपोर्टों को लिखने में गुजारा। इन रिपोर्टों के जरिए उन्होंने न सिर्फ समकालीन राजनीति और समाज के सच-झूठ व पाखंड का खुलासा किया बल्कि उन विषमताओं को भी सत्ताधारियों के सामने लाने में कामयाबी हासिल की जो आमतौर पर शहरी चमक-दमक और एयरकंडीशंड कमरों तक यूं ही नहीं पहुंच पाती। वो चाहे चंबल का सच हो या दिल्ली के गलियारों की केंद्रीय राजनीति। हर तरह की रिपोर्टिंग में धार और तेवर बरकरार रखने वाले संतोष भारतीय ने चौथी दुनिया की दूसरी पारी में भी एक आम रिपोर्टर की भांति कलम उठा लिया है। अब जबकि संपादकों के पास संपादकीय लिखने तक का वक्त नहीं होता, ऐसे में संतोष भारतीय द्वारा कवर स्टोरी करना नए पत्रकारों के लिए एक मिसाल भी है।

इस कवर स्टोरी के साथ एक छोटी स्टोरी और भी है जिसका शीर्षक है- ”और भी हैं पहेलियां”। इसमें चुनाव बाद के परिदृश्य का आंकलन पेश किया गया है। इस स्टोरी की शुरुआत कुछ यूं है- ”अगर गैर भाजपा गठबंधन प्रधानमंत्री पद के लिए नाम तय करता है तो उसका आधार क्या होगा, इसे परखना चाहिए। यदि कांग्रेस के एक सौ तीस से ज्यादा सांसद चुनकर आते हैं तो प्रधानमंत्री पद पर कांग्रेस का ही कोई व्यक्ति बैठेगा. मनमोहन सिंह पहला नाम हैं, जिसकी घोषणा सोनिया गांधी ने की है। लेकिन मनमोहन सिंह के नाम पर वामपंथी बिलकुल तैयार नहीं होंगे, इसलिए दूसरा नाम प्रणव मुखर्जी का है। प्रणव मुखर्जी को भी सोनिया गांधी कभी प्रधानमंत्री नहीं बनाना चाहेंगी और न तीसरे व्यक्ति दिग्विजय सिंह को बनाना चाहेंगी। चौथी महिला शीला दीक्षित हैं लेकिन वह भी सोनिया गांधी की लिस्ट में नहीं हो सकतीं, क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी छवि बहुत मजबूत बना ली है। जब उनका इस्तेमाल लोकसभा चुनावों में नहीं हुआ तो उन्हें प्रधानमंत्री पद पर तो कांग्रेस देख ही नहीं सकती….”। इस विश्लेषण में संतोष भारतीय सभी हालात व परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस के सर्वमान्य उम्मीदवार के नाम का ऐलान करते हैं। यह नाम किसका है, किस आधार पर यह घोषित किया गया है, इसके बारे में तफसील से जानकारी दी गई है।

संपूर्ण विश्लेषण और रिपोर्ट पढ़ने के लिए चौथी दुनिया का 10 मई का अंक देख सकते हैं।


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