रायपुर में एक पुराने मामले में पुलिस ने छह टीवी जर्नलिस्टों- रवि (सहारा समय), अभिषेक झा (वीओआई), शैलेष पांडेय (ईटीवी), सुखनंदन बंजारे (ईटीवी), विजय ठाकुर (साधना टीवी) मोहन राव (लोकल चैनल में कैमरामैन) को गिरफ्तार करने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के मुताबिक 14 सितंबर 2007 में एक स्कूल की छात्रा के साथ स्कूल के गार्ड द्वारा छेड़छाड़ की घटना को कवर करने पहुंचे टीवी जर्नलिस्टों और स्कूल प्रबंधन के बीच जमकर मारपीट हुई थी। तत्कालीन पुलिस अधिकारी जो मौके पर पहुंचा था, उस पर स्कूल प्रबंधन से मिलीभगत का आरोप था।
उस पुलिस अधिकारी ने स्कूल प्रबंधन के साथ मिलकर दोनों पक्षों के खिलाफ जो रिपोर्ट दर्ज की, उसमें छह पत्रकारों को नामजद कर दिया। उस वक्त पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से खुद को फंसाए जाने की शिकायत की थी और आंदोलन शुरू कर दिया था। पत्रकारों ने खुद को फंसाए जाने के खिलाफ सरकारी कार्यक्रमों का कई दिनों तक बहिष्कार भी किया। बाद में सीएम ने मामले को खत्म कराने का जब आश्वासान दिया तभी पत्रकार माने। इस मामले की पुलिस जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट आईजी के पास सौंप दी गई थी लेकिन इस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई करने में पुलिस अधिकारी हिचकते रहे। इसके चलते जांच की फाइल आईजी आफिस में ठंडे बस्ते में पड़ी रही।
सूत्रों का कहना है कि एसपी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर पत्रकारों को गिरफ्तार करने का आदेश आईजी से मांगा था। अब नए आईजी ने पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए हैं। आदेश मिलने के बाद कल पुलिस पत्रकारों को अरेस्ट करने के लिए सक्रिय हो गई है। पत्रकार संगठन पत्रकारों को गिरफ्तारी से बचाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिल पुसदकर के नेतृत्व में पत्रकारों का एक दल इस मामले में हस्तक्षेप के लिए मुख्यमंत्री से वार्ता करने की तैयारी कर रहा है। नामजद पत्रकारों में से एक ने भड़ास4मीडिया को बताया कि इस मामले में पुलिस की भूमिका शुरू से ही स्कूल प्रबंधन के पक्ष में रही है। स्कूल के सचिव ने मीडियावालों को मारने के लिए कहा था। पुलिस ने भी जो लाठीचार्ज किया उसमें पत्रकारों को ही निशाना बनाया गया। हालांकि पत्रकारों ने भी खुद की रक्षा के उद्देश्य से पुलिस और स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों पर हमला किया था। स्कूल प्रबंधन उस वक्त पीड़ित छात्रा के मां-पिता को धमकाने और गार्ड को बचाने की कार्यवाही में जुटा था। प्रेस वालों ने जब प्रबंधन पर गार्ड के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने के लिए दबाव डाला और पीड़िता छात्रा के मां-पिता से अभद्रता न करने का अनुरोध किया तो स्कूल के सचिव ने पत्रकारों को पीटने के लिए कह दिया था। उस घटना में जो पुलिस अधिकारी स्कूल प्रबंधन के पक्ष में कार्य कर रहा था, वही इन दिनों आईजी आफिस में आ गया है और उसी के इशारे पर यह पुरानी फाइल फिर खोली गई है। पत्रकारों ने कहा है कि अगर पुलिस ने उन्हें हाथ लगाया तो वे एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।











