आईआरएस (राउंड एक-2009) के आंकड़ों की अगर आईआरएस (राउंड दो-2008) के आंकड़ों से तुलना करें तो पता चलता है कि सबसे ज्यादा घाटे में रहने वाला हिंदी अखबार भी दैनिक जागरण ही है। इस अखबार की टोटल रीडरशिप में 1,160,000 की कमी आई है। जागरण के बाद सबसे ज्यादा नुकसान उठाया है अमर उजाला ने। अमर उजाला को संपूर्ण रीडरशिप में अबकी 706,000 का नुकसान उठाना पड़ा है। नंबर थ्री लूजर है आज अखबार। इसे टोटल रीडरशिप में 536,000 का घाटा हुआ है। इन तीनों अखबारों के घाटे को प्रतिशत के हिसाब से देखें तो दैनिक जागरण को पिछले और इस आईआरएस में 2.08 प्रतिशत का घाटा हुआ, अमर उजाला को 2.40 फीसदी का नुकसान हुआ और आज अखबार की रीडरशिप में 8.32 प्रतिशत की कमी आई है। नुकसान झेलने में नंबर चार पर है पंजाब केसरी।
इस अखबार को टोटल रीडरशिप में 323,000 का नुकसान उठाना पड़ा है। रीडरशिप में यह नुकसान कुल 2.94 प्रतिशत है। घाटा झेलने में पांचवें पोजीशन पर दैनिक भास्कर है। इस अखबार को टोटल रीडरशिप में 281,000 का नुकसान हुआ है जो बहुत मामूली 0.83 प्रतिशत बैठता है। प्रभात खबर को भी थोड़ा सा झटका लगा है। इस अखबार की टोटल रीडरशिप आईआरएस (राउंड दो-2008) में 4,946,000 थी जो अब इस (आईआरएस राउंड एक-2009) बार 4,671,000 रह गई है। प्रभात खबर को कुल 275,000 का नुकसान उठाना पड़ा है जो प्रतिशत में 5.56 बैठता है।
टोटल रीडरशिप में नुकसान झेलने वाले देश के सभी भाषाओं के 49 अखबारों-पत्रिकाओं के नाम, घाटा उठाने का क्रम, टोटल रीडरशिप के तुलनात्मक आंकड़े और अंकों व प्रतिशत में नुकसान इस प्रकार है-












