चंडीगढ़ के बसपा प्रत्याशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन मीडिया हाउसों की ‘ब्लैकमेलिंग’ और ‘उत्पीड़न’ से आजिज आकर आखिरकार वो सब कुछ बोल पड़े, जिसे वो बोलने से बचना चाहते थे। चौथे खंभे के प्रतिनिधि कहे जाने वाले मीडिया हाउसों की संगठित ‘बेईमानी’ और संस्थाबद्ध ‘भ्रष्टाचार’ ने लोकसभा चुनाव लड़ रहे हरमोहन धवन को मुंह खोलने के लिए मजबूर किया। बहुजन समाज पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ रहे इस प्रत्याशी को रुटीन कवरेज के लिए पैसे देने और विशेष कवरेज के लिए डील करने के वास्ते मजबूर करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाने वाले मीडिया हाउसों के प्रबंधकों और संपादकों को यह कतई अंदाजा नहीं रहा होगा कि उनकी करनी की पोल इस तरह खुल जाएगी। धवन ने चंडीगढ़ में शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर इन मीडिया हाउसों की करतूतों का पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि तीन अखबारों के प्रतिनिधियों ने उनसे खबर छापने के लिए लाखों रुपये की मांग की थी। धवन ने तीनों अखबारों का नाम भी बताया। ये तीन अखबार हैं- दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और पंजाब केसरी।
धवन ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि दैनिक भास्कर ने रोजाना के रूटीन कवरेज के लिए पैसे मांगे थे जबकि दैनिक जागरण ने पैकेज की बात की थी। धवन के मुताबिक दैनिक भास्कर के जनरल मैनेजर उनके घर आए थे। वे बोले कि चुनाव के अब चार दिन रह गए हैं। हम चाहते हैं कि आपका कवरजे हो। इसके लिए आपको चार दिनों का पैकेज लेना पड़ेगा। उन्होंने मेरे ही घर आकर मुझे पैकेज लेने के लिए समझा रहे थे। जीएम ने उनसे कहा कि भास्कर समूह चाहता है कि उन्हें जमकर कवरेज मिले लेकिन इसके लिए एक नीति बनी है जिसके तहत कवरेज के लिए पैसा चाहिए। धवन ने कहा कि दैनिक भास्कर के जनरल मैनेजर को साफ शब्दों में उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया और कहा कि वे खबरों को छपवाने के लिए ब्लैकमेल नहीं होंगे। धवन के अनुसार एक तरफ जहां जनरल मैनेजर पैकेज की बात कर रहे थे वहीं दूसरी तरफ अपने अखबार के नाम का खुलासा नहीं करने का आग्रह भी कर रहे थे। धवन ने बताया कि कवरेज नहीं मिलने से नाराज बसपा कार्यकर्ता अखबारों की प्रतियां जलाने की तैयारी में थे। लेकिन उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं को इस तरह के कदम उठाने से रोका क्योंकि वे विरोध के लोकतांत्रिक तरीके में भरोसा करते हैं। धवन के मुताबिक समय आने पर पता चल जाएगा कि चंडीगढ़ में कौन-सा प्रत्याशी मजबूत है। धवन के अनुसार अखबार न तो चुनाव जिता सकते हैं और न ही हरा सकते हैं पर कुछ अखबारों ने लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ को सरेआम नीलाम कर अपनी औकात जरूर बता दिया है।
उल्लेखनीय है कि धवन ने यह प्रेस कांफ्रेंस वर्तमान वित्त राज्य मंत्री पवन बंसल के खिलाफ चार्जशीट पेश करने के लिए बुलाई थी लेकिन मीडिया ने चुनाव में जिस तरह का रूप दिखाया और जो जख्म दिए, उससे धवन खुद को रोक नहीं पाए और वो सब कुछ बता गए जो उन्होंने भुगता था। इससे पहले चंडीगढ़ में बसपा की एक रैली के दौरान मायावती की मौजूदगी में धवन ने बिना नाम लेते हुए कुछ अखबारों पर खबर छापने के लिए पैसे मांगने का आरोप लगाया था और उनसे सुधरने का अनुरोध किया था लेकिन मीडिया हाउस बजाय सुधरने के, उगाही के धंधे में और तेजी से जुट गए। धवन ने शनिवार को जो प्रेस कांफ्रेंस की, उसके बारे में दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और पंजाब केसरी में एक लाइन भी कुछ नहीं छपा। इससे जाहिर होता है कि ये अखबार वाकई अपराधी है और धवन के आरोप को चुपचाप स्वीकार कर रहे हैं। इन अखबारों में अगर नैतिक साहस होता तो वे धवन के आरोपों
को छापने के साथ-साथ उनका जवाब भी कलम और अखबार के माध्यम से देते। लेकिन जब कलम बिक गई हो तो उसमें इतनी ताकत नहीं रह जाती कि वह गलत और सही का विश्लेषण कर सके।
लेखक संजीव जुझारू पत्रकार हैं और पिछले कई वर्षों से चंडीगढ़ में विभिन्न मीडिया माध्यमों से जुड़े हुए हैं। उनसे संपर्क के लिए [email protected] पर मेल कर सकते हैं या फिर 09417005113 पर रिंग कर सकते हैं।











