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दुख-दर्द

विनोद शुक्ला का लखनऊ में आज सुबह निधन

[caption id="attachment_14892" align="alignleft"]विनोद शुक्लाविनोद शुक्ला उर्फ भइया[/caption]विनोद शुक्ला नहीं रहे। हिंदी मीडिया के शीर्ष स्तंभों में से एक और अपने आप एक कंप्लीड मीडिया संस्थान विनोद शुक्ला उर्फ भइया का आज सुबह निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें कल शाम को लखनऊ स्थित पीजीआई में भर्ती कराया गया था। उन्हें पेट में इनफेक्शन के साथ-साथ किडनी की समस्या थी। डाक्टरों के अथक प्रयास के बावजूद भइया को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने आज सुबह साढ़े सात बजे अपनी आंखें हमेशा के लिए बंद कर ली। भइया का पार्थिव शरीर इस समय लखनऊ स्थित उनके आवास (बी-1, दिलकुशा) पर दर्शनार्थ रखा गया है। निधन की सूचना मिलते ही लखनऊ के पत्रकारों, नौकरशाहों, नेताओं, चिंतकों, साहित्यकारों, शुभचिंतकों का जमावड़ा भइया के आवास पर होने लगा। सभी लोगों ने विनोद जी का अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

विनोद शुक्लाविनोद शुक्ला नहीं रहे। हिंदी मीडिया के शीर्ष स्तंभों में से एक और अपने आप एक कंप्लीड मीडिया संस्थान विनोद शुक्ला उर्फ भइया का आज सुबह निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें कल शाम को लखनऊ स्थित पीजीआई में भर्ती कराया गया था। उन्हें पेट में इनफेक्शन के साथ-साथ किडनी की समस्या थी। डाक्टरों के अथक प्रयास के बावजूद भइया को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने आज सुबह साढ़े सात बजे अपनी आंखें हमेशा के लिए बंद कर ली। भइया का पार्थिव शरीर इस समय लखनऊ स्थित उनके आवास (बी-1, दिलकुशा) पर दर्शनार्थ रखा गया है। निधन की सूचना मिलते ही लखनऊ के पत्रकारों, नौकरशाहों, नेताओं, चिंतकों, साहित्यकारों, शुभचिंतकों का जमावड़ा भइया के आवास पर होने लगा। सभी लोगों ने विनोद जी का अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

भइया के बेहद करीबी रहे और हर दुख-सुख में उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार राजू मिश्रा ने बताया कि भइया का पार्थिव शरीर लखनऊ से कानपुर के लिए आज दिन में दो बजे रवाना होगा। कानपुर में भैरव घाट पर भइया की अंत्येष्टि शाम पांच बजे की जाएगी। भइया के परिवार में पत्नी और एक पुत्र व एक पुत्री हैं। दैनिक जागरण, लखनऊ को शिखर पर पहुंचाने विनोद शुक्ला के न रहने की सूचना मिलते ही दैनिक जागरण के निदेशक सुनील गुप्ता और संदीप गुप्ता लखनऊ पहुंचे और भइया को श्रद्धांजलि दी। दैनिक जागरण, लखनऊ के स्थानीय संपादक शेखर त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ के स्थानीय संपादक अशोक पांडेय समेत लखनऊ के दर्जनों पत्रकारों ने भइया के पार्थिव शरीर को नमन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और परिजनों को ढांढस बंधाया।


विनोद भइया के व्यक्तित्व और उनके सोचने के तरीके के बारे में विस्तार से जानने के लिए क्लिक करें-

  1. जीते जागते संस्थान हैं विनोद शुक्ला 
  2. मधुमक्खी का काम तिलचट्टे नहीं कर सकते
  3. भइया की विदाई

विनोद भइया से जुड़ा कोई संस्मरण, अनुभव, वाकया अगर आपके पास है तो उसे हम तक पहुंचाएं। उसे हम प्रकाशित करेंगे। हमारा पता है- [email protected]

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