एक के तीन करने वाले अहमदाबाद का महाठग डा. अशोक जडेजा इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में है। शायद ही कोई ऐसा चैनल होगा जो इस महाठग की बखिया न उधेड़ रहा हो। उसकी पुरानी जिन्दगी से लेकर नये कारनामों की फेहरिस्त हर चैनल पर बतौर न्यूज दिखाई जा रही है। उसके वीडियो, उसके फोटोग्राफ्स, उसकी सभाओं की सारी रिकार्डिंग हर चैनल के पास उपलब्ध हैं जिसे वे सनसनीखेज स्टोरी के रूप में दिखा रहे हैं पर सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि देश के हर कोने की खबर रखने वाले मीडिया को इस ठगी के धंधे की भनक क्यों नही लग सकी? जहां तक पुलिस की बात है तो पुलिस को इसलिये दोष नही दिया जा सकता क्योंकि पुलिस तो हर अपराध घटित होने के बाद ही एक्टिव होती है और यही उसने इस मामले में भी किया।
ऐसा नही है कि एक के तीन करने के इस गोरखधंधे की जानकारी पुलिस तक न पहुंची हो क्योंकि अशोक जडेजा के जो फुटेज चैनलों में आ रहे हैं, वे इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि यह काम चोरी छिपे नहीं बल्कि डंके की चोट पर किया जा रहा था। उसकी सभा में हजारों लोगों की भीड़ होती थी। बकायदा मंच से ये कहा जाता था कि देवी मां के अवतार डा. अशोक जडेजा लोगों के पैसे तीन गुनें कर देते हैं। लोग लाइन लगाकर नोट जमा कराते थे और फिर उन्हें उनके तीन गुने पैसे वापस मिल जाते थे।
सीबीआई, पुलिस, इन्कम टैक्स, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो जैसी कई संस्थायें देश में हैं। क्या इनमें से किसी ने यह जानने की कोशिश नही की कि आखिर एक आदमी लोगों की रकम तिगुनी कैसे कर रहा है? न केवल गुजरात बल्कि राजस्थान, महाराष्ट. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तक में इस ठग ने अपना जाल फैलाया था पर किसी भी प्रदेश की पुलिस या अन्य एजेन्सी ने इस ओर ध्यान नही दिया। चलिये मान भी लें कि ये सब सरकारी एजेंन्सियां हैं और जब तक इनके पास शिकायत नहीं आती तब तक ये हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती हैं पर अचरज तो इस बात का है कि जरा-जरा सी घटनाओं पर हल्ला मचाने वाले मीडिया ने इस गोरखधंधे की ओर अपनी नजरें इनायत क्यों नही की?
क्या यह हो सकता है कि मीडिया को इस ठगी के धंधे का पता न चला हो? ऐसा संभव तो नही है क्योकि इलेक्ट्रानिक चैनलों की आपसी होड़ तो हर छोटे से छोटे मामले को बड़ा बनाने के लिये तत्पर रहती है फिर क्या कारण था कि इस घटना पर मीडिया के किसी भी हिस्से ने संज्ञान नहीं लिया, चाहे वो इलेक्ट्रानिक मीडिया हो या फिर प्रिन्ट मीडिया। कहीं न कही तो इस पूरे मामले में मीडिया भी सवालों के घेरे में है। अपने आप को लोकतंत्र का पहरुआ कहने वाले मीडिया के रहते हजारों लोग कैसे अपने जीवन भर की कमाई से हाथ धो बैठे? ये सवाल मडिया से पूछे जाने के काबिल हैं ही। यदि इतनी बड़ी ठगी हो गई और मीडिया के लोग चुपचाप बैठे रहे तो यह प्रश्न सामने आता ही है कि कहीं मीडिया ने भी तो इस बहती गंगा में हाथ नही धो लिये? वैसे भी डा. अशोक जडेजा रसूखदार लोगों की रकम में हेराफेरी नहीं करता था क्योकि वो इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि इन लोगों से पंगा लेना उसे महंगा पड़ सकता है। उसके निशाने पर तो वे गरीब लोग थे जो येन-केन प्रकारेण अमीर बनने की चाहत रखते थे और इसका फायदा उसने जमकर उठाया।
आज भले ही मीडिया डा. अशोक जडेजा को पानी पी-पी कर कोस रहा हो पर उसके दामन भी संदेह के घेरे में हैं। स्टिंग आपरेशन कर सांसदों-अफसरों को जनता के कटघरे में खड़े करने वाले मीडिया ने इस मामले में स्टिंग आपरेशन क्यों नही किया? इस बात का जबाब कहीं न कहीं वे लोग मीडिया से मांगेंगे जो अपना सब कुछ
लुटा कर अब डा. अशोक डडेजा को कोस रहे है।
लेखक चैतन्य भट्ट वरिष्ठ पत्रकार हैं और इन दिनों पीपुल्स समाचार, जबलपुर के संपादक हैं। उनसे 09424959520 या फिर [email protected] के जरिए संपर्क कर सकते हैं।











