देश के सबसे जिम्मेदार, साहसी और पत्रकारीय नैतिकता के हिसाब से खरा माने जाने वाले अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने आज बड़ी गलती कर दी है। इस अखबार के फ्रंट पेज पर मुंबई आतंकी हमले के जीवित आरोपी कसाब के मुकदमें में गवाही देने वाली लड़की और उसके पिता की तस्वीर प्रकाशित की गई है। तस्वीर में लड़की और पिता, दोनों के चेहरे स्पष्ट नजर आ रहे हैं।
टीवी न्यूज चैनलों ने इस खबर को दिखाते वक्त लड़की और उसके परिचितों-रिश्तेदारों की पहचान किसी भी तरह उजागर न हो, इसकी पूरी सावधानी बरती। अखबारों ने भी लड़की की तस्वीर प्रकाशित नहीं की। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने पर लड़की और उसके पिता की दो कालम लंबी तस्वीर प्रकाशित की है। इसी अखबार में आज के ही अंक में सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी एडवाइजरी भी प्रकाशित की गई है जिसमें मंत्रालय की ओर से चैनलों को कहा गया है कि वे बच्चों के मामलों को लेकर संवेदनशील रहें और सतर्कता बरतें। इस खबर को आप इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट पर पढ़ने के लिए Be sensitive to child victims: I&B Ministry tells channels पर क्लिक कर सकते हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने जो तस्वीर आज पहले पन्ने पर प्रकाशित की है, उसे देखने के लिए आप इंडियन एक्सप्रेस फ्रंट पेज पर क्लिक कर इस अखबार के ई-पेपर पर जा सकते हैं।
चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय इस प्रकरण पर कहते हैं कि इंडियन एक्सप्रेस को ऐसा बिलकुल नहीं करना चाहिए था। मुंबई आतंकी हमले के आरोपी कसाब के मुकदमें में गवाही देने वाली लड़की की तस्वीर प्रकाशित करने से इस लड़की की जान को खतरा पैदा हो गया है। अगर लड़की के साथ कुछ होता है तो क्या एक्सप्रेस समूह इसकी जिम्मेदारी लेगा? आतंकी हमले के दौरान प्रत्यक्षदर्शी रही इस लड़की को तस्वीर प्रकाशित करना न सिर्फ गलत है बल्कि अनैतिक और गैर-कानूनी भी है।
न्यूज 24 के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम कहते हैं- ”मैं आज सुबह-सुबह इंडियन एक्सप्रेस देखकर चौंक गया। अखबार के फ्रंट पेज पर गवाही देने वाली लड़की और उसके पिता की तस्वीर है। कल जब यह खबर आई थी तो हम लोगों ने पूरी सावधानी बरती। लड़की व पिता के चेहरे को ब्लर कर टेलीकास्ट किया ताकि उन्हें पहचाना न जा सके। न्यूज टीम को खासतौर पर इंसट्रक्शन दिया गया कि किसी हालत में लड़की व उसके परिचितों का चेहरा न टेलीकास्ट हो। एक पत्रकार की ड्यूटी लगाई गई कि वे खबर के टेलीकास्ट होने से पहले संबंधित विजुअल चेक कर लें।”
श्री अंजुम कहते हैं कि कसाब प्रकरण के मामले में कोर्ट ने पहले ही कह रखा है कि किसी विटनेस की तस्वीर न छापें और न दिखाएं। यह लड़की मुंबई हमले की चश्मदीद गवाह है। तस्वीर छपने से इसकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसलिए इसे नहीं दिखा सकते। हैरत की बात है कि सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस ने लड़की की तस्वीर को प्रकाशित किया है। किसी टीवी चैनल और अखबार ने लड़की की पहचान को उजागर नहीं किया है।”
यह पूछे जाने पर कि क्या इंडियन एक्सप्रेस ने यह गलती जानबूझकर की है या फिर चूक के चलते हुई होगी, श्री अंजुम कहते हैं- ”जिस भी वजह से ऐसा हुआ है, इसे गलत कहा जाएगा। अगर ऐसी गल्ती टीवी चैनल करते हैं तो प्रिंट के लोग उन्हें कटघरे में खड़ा कर देते हैं। पर अब जबकि प्रिंट की तरफ से ऐसी गल्ती की गई है तो कहीं से कोई आवाज नहीं उठ रही। प्रिंट और इलेक्ट्रानिक के लिए दो विधान, दो नियम, दो कानून नहीं होने चाहिए। टीवी वालों की नकेल कसने के लिए तो सरकारी तंत्र भी सक्रिय हो जाता है पर प्रिंट वालों की लापरवाही पर सब चुप हो जाते हैं। वैसे भी, टीवी में कहीं कोई ऐसा प्रोग्राम नहीं होता जिसमें प्रिंट की कमियों को गिनाया जाए लेकिन प्रिंट वाले खबर व कालम के जरिए टीवी वालों की चूक को पकड़ने और उन्हें प्रकाशित करने का काम करते रहते हैं। एक्सप्रेस ग्रुप को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि लड़की की तस्वीर को उन्होंने किन स्थितियों में प्रकाशित किया। उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे इस मामले में दुनिया को अपना स्टैंड बताएं।”
वायस आफ इंडिया के ग्रुप एडिटर किशोर मालवीय मुंबई आतंकी हमलों के दौरान खुद वहां पर लाइव कवरेज के लिए गए हुए थे। वे तब इंडिया न्यूज में हुआ करते थे। किशोर मालवीय इस प्रकरण पर कहते हैं- ”लड़की की तस्वीर प्रकाशित करना, पहचान उजागर करना कानूनन गलत है। बच्चा चाहे अपराधी हो, आरोपी हो, गवाह हो या पीड़ित हो, उसकी तस्वीर नहीं दिखा सकते। उसकी पहचान नहीं उजागर कर सकते। उसकी आइडेंटिटी नहीं बता सकते। लड़की की तस्वीर प्रकाशित करने से उसे जान का जो खतरा पैदा हो गया है, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? वैसे भी, इस तरह के मामलों में लड़का या लड़की की आइडेंटिटी उजागर करना पत्रकारिता के बेसिक के खिलाफ है। ये कभी नहीं होना चाहिए। इलेक्ट्रानिक मीडिया को पाठ बढ़ाने वाले खुद लापरवाही और चूक करने वाले हो जाते हैं, यह सही नहीं है।”











