दो पत्रकारों की भिड़ंत। जमकर आरोप-प्रत्यारोप। क्या सही, क्या गलत, कुछ समझ में नहीं आ रहा। गलत-सही तय करने वाले हम लोग होते भी नहीं। यह मामला दैनिक जागरण का है और जागरण प्रबंधन को जांच कराकर सही-गलत का फैसला करना चाहिए पर हम यहां पीड़ित पत्रकार और आरोपी पत्रकार, दोनों की बातों को एक साथ रख रहे हैं ताकि दोनों के पक्ष सामने आ सकें। आरोप लगाने वाले पत्रकार कौशलेंद्र पांडेय को अब जागरण से हटा दिया गया है। उन पर गबन का आरोप है। कौशलेंद्र का कहना है कि गबन के असली सूत्रधार तो ब्यूरो चीफ चंद्रकांत पांडेय हैं। मामला दैनिक जागरण की बनारस यूनिट से संबद्ध सोनभद्र जिले का है। इस जिले के ब्यूरो चीफ चंद्रकांत पांडेय कहते हैं कि कौशलेंद्र उत्पाती और खुराफाती है। वह समय-समय पर बहुत परेशान करता रहा है और उसकी नौकरी उसकी करनी से गई है। चंद्रकांत दावा करते हैं कि उन पर जो भी आरोप कौशलेंद्र ने लगाए हैं, उसकी जांच करा ली जाए।
यहां हम पहले कौशलेंद्र का वो पत्र प्रकाशित कर रहे हैं जो उन्होंने दैनिक जागरण, वाराणसी के संपादक और निदेशक को भेजने के साथ-साथ ग्रुप के संपादक और सीईओ संजय गुप्ता को भी भेजा है। इस पत्र के ठीक बाद दैनिक जागरण, सोनभद्र के ब्यूरो चीफ चंद्रकांत पांडेय का जवाब प्रकाशित है। कौशलेंद्र के पत्र और चंद्रकांत के जवाब में कई ऐसी बातें हैं जिसके जरिए पत्रकारिता के धंधे और पत्रकारों की वर्तमान मनःस्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। -एडिटर, भड़ास4मीडिया
कौशलेंद्र पांडेय द्वारा दैनिक जागरण, वाराणसी के संपादक और प्रबंधन से जुड़े अन्य लोगों को लिखा गया पत्र
आदरणीय प्रधान सम्पादक महोदय
दैनिक जागरण, वाराणसी
विषय : सोनभद्र ब्यूरो चीफ द्वारा मेरे खिलाफ निदेशक वाराणसी के यहां गलत तथ्य प्रस्तुत कर कार्रवाई कराने के संबंध में
श्रीमान् जी
निवेदन है कि प्रार्थी निर्दोष है और ईमानदार प्रवृत्ति का आदमी है. प्रार्थी ने आपका अखबार ज्वाइन करने से लेकर आज तक पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य किया है. चूंकि ब्यूरो चीफ चंद्रकांत पाण्डेय व विशेष संवाददाता बशीर बेग दोनों लोग अखबार की आड़ में अवैध कार्यों को अंजाम देने मे लगे हुए हैं, रिपोर्टरों का शोषण, उनके विज्ञापन कमीशन पर डाका, खबरो की सौदेबाजी, अवैध वसूली, सुरा-मांस का सेवन जैसे कार्यों में आदरणीय ब्यूरो चीफ महोदय पूरी तरह से रम भी चुके है. कमोबेश इसी तरह खबरों की सौदेबाजी कर खदानों में हिस्सेदारी, अवैध खनन, ब्लैकमेलिंग, अवैध वसूली जैसा कार्य श्री बेग द्वारा भी जारी है. प्रार्थी को जब जिला कार्यालय से ओबरा कार्यालय की जिम्मेदारी संभालने के लिए भेजा गया तो इन दोनो लोगों द्वारा कई गलत मांगें व शर्तें प्रार्थी के सामने रखी जाने लगीं. इनकार करने पर प्रार्थी को मानसिक तौर पर जमकर प्रताड़ित तो किया ही गया, विगत 19 जून को सुनियोजित तरीके से एरिया मैनेजर गोविंद श्रीवास्तव को अपने साजिश में शामिल कर आदरणीय डायरेक्टर साहब, वाराणसी के समक्ष गलत तथ्यों को प्रस्तुत कर प्रार्थी के उपर कुछ सौ रुपये के गबन का आरोप लगाकर कार्रवाई करा ली गयी. इसके संबंध में निम्न तथ्य उल्लिखित हैं, जिस पर न्यायहित में निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई किया जाना आवश्यक है:-
1- सरकारी विज्ञापन वसूली का सारा कमीशन ब्यूरो चीफ श्री चंद्रकांत पाण्डेय द्वारा हजम कर लिया जा रहा है. एतराज जताने पर नौकरी से निकालने की धमकी देकर चुप करा दिया जाता है. बता दें कि इस जनपद में विज्ञापन का कोड सिर्फ श्री चंद्रकांत
पाण्डेय के नाम आवंटित है जबकि और अखबारों में हर रिपोर्टर का अलग-अलग कोड निर्धारित है. इसी का फायदा उठाकर बडे ही आसानी से हर साल रिपोर्टरों की मेहनत का लाखों रुपये डकार लिया जा रहा है. प्रार्थी का भी करीब सरकारी वसूली 45 हजार रुपये का कमीशन डकार लिया गया है.
2- सर्वविदित है कि आपके अखबार में कामरशियल विज्ञापन का कमीशन 15 प्रतिशत है. बावजूद इसके, सोनभद्र में 10 प्रतिशत ही कमीशन दिया जाता है. एतराज जताने पर वही धमकी- निकाल दिये जाओगे. किसी ने उपर शिकायत की जुर्रत की तो अंतत: कोई न कोई षडयंत्र रच कर उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है जिसमें एरिया मैनेजर श्री गोविंद श्रीवास्तव की भूमिका अहम होती है. इस मामले में भी प्रार्थी का ओबरा में कार्य के दौरान दिये गये कामरशियल विज्ञापन का करीब दो लाख रुपये का पांच प्रतिशत कमीशन हजम कर लिया गया है.
3- पैसे लेकर रिपोर्टरों की नियुक्ति व नये हेड का सृजन भी श्री चंद्रकांत पाण्डेय की आदत में शुमार है. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण महुली हेड है जिस पर पहले किसी मिश्रा की तैनाती दी गयी फिर कुछ दिनों बाद पैसे लेकर एक ठेकेदार को महुली हेड का पद थमा दिया गया. इसकी कुछ दिन तक खबर छपी. आगे के नाजायज मांगों की पूर्ति नहीं हुई तो यह हेड भी बंद कर दिया गया.
4- पिछले साल हिण्डाल्को के जीएम के खिलाफ इनके द्वारा जानबूझकर पैसे का खेल खेलने के लिए खबर प्रकाशित की गयी थी. जिस पर श्री चंद्रकांत पाण्डेय के खिलाफ कार्रवाई भी की गयी लेकिन 15 दिनों बाद से फिर से उन्हें लौटा लिया गया और अंतत: इस मामले में श्री पाण्डेय पैसे का खेल खेलने में कामयाब हो गये और खबर का आरोपी किसी और को ठहरा दिया गया.
5- श्री पांडेय व श्री बेग के चरित्र के खिलाफ भी सार्वजनिक तौर पर कई सवालिया निशान लग चुके हैं जबकि प्रार्थी के अब तक के जीवन का इतिहास पूरी तरह पाक-साफ रहा है. बावजूद इसके, उक्त दोनों लोगों के जरिये एरिया मैनेजर श्री गोविंद श्रीवास्तव बराबर किसी न किसी आरोप को स्टैण्ड करने में लगे रहे और अंतत: विगत 19 जून को आदरणीय डायरेक्टर साहब के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत कर तात्कालिक तौर पर कामयाब भी हो गये.
6- श्री पाण्डेय द्वारा बार-बार जिले से जाने वाले विज्ञापनों का श्रेय खुद द्वारा लिया जाता है. जबकि असलियत यह है कि सारा काम रिपोर्टरों द्वारा किया जाता है. चूंकि कोड जनपद में सिर्फ चंद्रकांत पाण्डेय का निर्धारित है, इस आधार पर श्री पाण्डेय यह विश्वास दिलाने में आसानी से कामयाब हो जाते हैं कि सब कुछ मैंने किया है. जबकि असलियत पूरी तरह इसके विपरीत है.
7- इन दोनों लोगों की कार्यकुशलता व ख्याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विगत छह दिसम्बर 2008 को जब मैं ओबरा में आया तो यहां जागरण का सरकुलेशन 1580 के करीब था, जबकि आज के डेट में यह बढकर 2100 के करीब पहुंच चुका है. वह भी भीषण गर्मी जैसे समय में, जब सौ दो सौ कापी का सरकुलेशन लोगों के घर चले जाने के कारण हर साल प्रभावित होता है. यहां के विपरीत जिला मुख्यालय पर सरकुलेशन काफी तेजी से गिरा है. इस बात का प्रमाण आपके वाराणसी कार्यालय से आसानी से मिल सकता है.
8- इसी तरह जब से मैं ओबरा में आया हूं, यहां के लिए एकदम नया होने के बावजूद हर परिशिष्ट पर पिछले लोगों के कार्यकाल से ज्यादा विज्ञापन अखबार को गया है. रही कुछ रुपये के गबन के आरोप की तो किसी भी निष्पक्ष व्यक्ति को ओबरा में भेजकर आमजन से लेकर उद्यमी व तापीय परियोजना के अधिकारियों व कर्मचारियों से मेरे चरित्र व व्यवहार के बारे में जानकारी ली जा सकती है.
9- मेरे आने के करीब माह भर पूर्व श्री बेग ने ओबरा सी से जुडा एक टेण्डर न मिलने से खफा होकर झूठी खबर प्रकाशित कर दी थी. इससे खफा परियोजना अधिकारी ने कड़ी आपत्ति जताने के साथ अखबार को विज्ञापन देना बंद कर दिया था, जिसे करीब तीन माह की कड़ी मशक्कत के बाद प्राथी ने चालू करवाने में कामयाबी पा ली. बावजूद इसके, प्रार्थी पर अखबार की नीतियों के विपरीत काम करने का आरोप कहां तक न्याय संगत है! इस बात का भी प्रमाण जनवरी 2009 से लेकर अप्रैल माह तक तापीय परियोजना द्वारा मिलने वाले विज्ञापनों में गैपिंग से साबित है और इसकी तस्दीक भी तापीय परियोजना अधिकारी से सीधे संपर्क कर किया जा सकता है.
अब प्रार्थी पर लगाये गये आरोप का स्पष्टीकरण…
प्रार्थी पर 20-20 विश्व कप के विसेज कूपनों में से कुछ में पार्टी से पांच सौ रुपये लेकर तीन सौ रुपये का कूपन ही प्रकाशित करवाने का आरोप लगाया गया है और इसी को आधार बनाकर मेरे खिलाफ कार्रवाई होने की बात बतायी गयी है. इसके संबंध में कहना है कि प्रार्थी ने कुल 138 कूपन काटे हैं जिसमें कुछ कूपन पांच सौ रुपये के थे. पार्टी का फोटो उपलब्ध न होने पर इस कूपन को तीन सौ रुपये व दो सौ रुपये में कनवर्ट कर दिया गया. इसकी जानकारी पार्टी को देने के साथ उसकी सहमति लेने के बाद ब्यूरो चीफ से भी इस बात की मौखिक अनुमति ली गई. आदरणीय समाचार संपादक को भी इस बात की जानकारी दी गई और कूपन छपने के लिए भेज दिया गया, जो क्रमश: आठ व नौ जून 2009 के अंक में संबंधित पार्टी से मिले पांच सौ रुपये का तीन सौ व दो सौ रुपये का कूपन प्रकाशित भी है. साथ ही 138 कूपनों में से 55 कूपन अभी तक प्रकाशित नहीं किये गये हैं जबकि पैसा सभी कूपनों का हिसाब कर मुझसे ले लिया गया है. जानकारी चाहने पर ब्यूरो चीफ द्वारा मैनेजमेण्ट की बात कहकर पल्लू झाड़ लिया जा रहा है. ऐसे में बिना जांच, बिना स्पष्टीकरण का मौका दिये प्रार्थी के खिलाफ कार्रवाई आखिर कहां तक न्यायसंगत है!
प्रार्थी को जब 19 जून की रात इस आरोप और इसके आधार पर कार्रवाई की जानकारी मिली तो 20 जून को प्रार्थी सारे सबूतों के साथ वाराणसी कार्यालय पहुंचा और समाचार संपादक जी से मिलकर सारे तथ्यों से साक्ष्य के साथ अवगत कराया और पार्टी से भी इस संबंध में बात कर लेने का निवेदन किया तो उन्होंने विज्ञापन से जुड़ा मसला होने की बात कहते हुए श्री गोविंद श्रीवास्तव जी से संपर्क करने की बात कही. श्री श्रीवास्तव से मिलने प्रार्थी जब पहुंचा तो उन्होंने इस मसले पर किसी तरह से बात करने से इंकार करते हुए कहा कि मैं जानता हूं कि तुम बहुत बड़े ईमानदार की पूंछ हो, मुझे अपनी औकात दिखानी थी, दिखा दी, अब जाओ अपने एडिटोरियल वाले गाडफादरों से मिलकर खुद को पाक-साफ साबित कर लो. इस तरह की वर्डिंग का भी अर्थ बखूबी समझा जा सकता है.
अत: श्रीमान् जी से निवेदन है कि आप नंबर वन अखबार के प्रधान की कुर्सी यानी अखबारी दुनिया के भगवान की कुर्सी पर विराजमान हैं. कहा जाता है कि भगवान के यहां देर होती है पर अंधेर नहीं. ऐसी दशा में प्रार्थी के मामले में भी संजीदगी बरतते हुए उपरोक्त उल्लिखित सारे बिंदुओं की जांच कराकर न्यायसंगत कार्रवाई करने की कृपा करें ताकि सच पर भरोसा कायम रहे.
दिनांक : 20 जून 2009
प्रार्थी
कौशलेन्द्र पाण्डेय
पूर्व रिपोर्टर जिला कार्यालय व निवर्तमान कार्यालय
इंचार्ज ओबरा
दैनिक जागरण, सोनभद्र
दैनिक जागरण, सोनभद्र के ब्यूरो चीफ चंद्रकांत पांडेय ने अपने उपर लगाए गए आरोपों को लेकर जो कुछ बी4एम से कहा, वह इस प्रकार है-
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…..ये सज्जन अमर उजाला में काम कर रहे थे। वहां से निकाल दिए गए तो हमारे पास आए। हम लोगों को भी आदमी की जरूरत थी। टेस्ट के लिए इनको बनारस भेजा गया। ये कंपोंजिंग जानते थे इसलिए इनको 1500 रुपये में रख लिया गया। महीने भर बनारस में काम करने के बाद इनको सोनभद्र में काम करने के लिए भेज दिया गया। इनका स्वभाव खुराफाती और उत्पाती का है, इसलिए ये बार-बार मुझे परेशान करने और मुझे फंसाने में लगे रहे। मैं कुछ उदाहरण बताना चाहूंगा। हिंडाल्को के जीएम के खिलाफ एक लड़की ने दुष्कर्म करने का आरोप लगाया तो इन्होंने जो खबर बनाई, उसमें कहीं भी हिंडाल्को का नाम नहीं लिखा। सिर्फ जीएम का नाम आरएस यादव लिख दिया। खबर छपने के बाद पता चला कि आरएस यादव तो हिंडाल्को के जीएम हैं। खबर कौशलेंद्र पांडेय की थी लेकिन तबादला कर दिया गया मेरा। मुझे इलाहाबाद भेज दिया गया। मेरी जगह हिमांशु उपाध्याय ब्यूरो चीफ बनकर सोनभद्र आए तो कौशलेंद्र उन्हें पटाने के लिए और तालमेल बिठाने के लिए घर पर दही पहुंचाना शुरू कर दिया।
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……जिस खबर के छपने से मेरा तबादला किया गया था, उस खबर व मामले की आंतरिक जांच पूरी हुई तो मुझे निर्दोष पाया गया और मुझे फिर से वापस सोनभद्र बुला लिया गया।
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……एक दिन पता चला कि आफिस के पांचों कंप्यूटर में वायरस डाला गया है। इन कंप्यूटरों को बनारस आफिस भेजा गया और वहां से दो नए कंप्यूटर आए तो इनमें भी वायरस डाल दिया गया. बनारस से फिर तीन नए कंप्यूटर आए लेकिन हम लोगों को निर्देश दे दिया गया कि अगर कंप्यूटर फिर खराब हुए तो मरम्मत का पैसा सेलरी से काट लिया जाएगा। बाद में इंजीनियरों व बिजली कर्मियों से चेक कराया गया तो पता चला कि किसी ने मेन लाइन का तार ही ढीला कर दिया है। इसी चक्कर में हम लोगों का जनरेटर भी तीन चार-बार खराब हो गया था। यह सब चलता रहा।
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…एक दिन मैंने कौशलेंद्र से कहा कि तुम आज की खबरें भेज दो, मैं मार्केट से विज्ञापन वसूली से आता हूं तो कौशलेंद्र ने पांच पुरानी खबरों की फाइल भेज दी और अगले दिन ये खबरें अखबार में छप भी गईं। इसी तरह दशहरा के दिन मैंने उससे कहा कि तुम दशहरा और दुर्गा पूजा की खबरें भेज दो, मैं अन्य खबरों को एडिट करके भेज देता हूं। तो उसने हेडिंग और इंट्रो में लिखकर भेज दिया कि ‘सत्य पर असत्य की जीत का पर्व आज’। बनारस से डाक प्रभारी जी का मेरे पास फोन आया कि आप अपना इस्तीफा लेकर चले आइए। मैं यह सुनकर बड़ा चक्कर में पड़ा। मैंने पूछा क्या हुआ सर, तो डाक प्रभारी जी ने मुझसे खबर पढ़ने को कहा। हेडिंग तो हेडिंग, इंट्रो में भी ‘सत्य पर असत्य’ की विजय की बात लिखी गई थी। अगर यह खबर छप जाती तो सोनभद्र में अखबार फूंक दिया जाता। मैंने डाक प्रभारी जी को बताया कि यह हरकत कौशलेंद्र ने की है। उन्होंने कहा कि उसे दस दिन तक घर बैठा दीजिए। मैंने कौशलेंद्र को दस दिन तक आफिस न आने के लिए कह दिया।
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….कौशलेंद्र ने समाचार संपादक महोदय चड्ढा जी से बात करके अपना तबादला बनारस करा लिया। वहां एक महीने के करीब काम किया और फिर सोनभद्र आ गया। जब वह आया तो फिर कंप्यूटरों में वायरस भर गया। मैंने बनारस आफिस से रिक्वेस्ट किया कि यह फिर खुराफात करता रहेगा इसलिए इसको यहां से हटाकर कहीं भेज दो। इस तरह से इसको ओबरा शिफ्ट करा दिया गया।
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…..ओबरा में पुराने वर्कर हैं बशीर बेग। बीसों साल से वे काम कर रहे हैं। कौशलेंद्र वहां जाते ही उनके एंटी हो गया और उनके खिलाफ वही सब हरकतें करने लगा। वहां ओबरा में उसे सतीश भाटिया (राष्ट्रीय सहारा के प्रतिनिधि) एंड कंपनी का सपोर्ट मिला और उनके इशारे पर यह काम करने लगा। कौशलेंद्र ने मुझसे मतलब रखना बिलकुल बंद कर दिया।
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…..ट्वेंटी ट्वेंटी के मौके पर कूपन दिए गए थे तो इसने 26 कूपनों की कटिंग करके दाम पांच सौ रुपये की जगह 200 रुपये कर दिया। हमको इस बारे में बताया भी नहीं। पैसा जमा करके चला गया। बनारस आफिस में जब चेक किया गया तो उन लोगों ने पूछा कि ये कटिंग क्यों है? इसको लेकर जांच कराने के लिए चिट्ठी आई। जांच में पता चला कि इसने गड़बड़ किया है। पूरी जांच रिपोर्ट को बनारस भेजा गया। ओरीजनल कूपनों की छाया प्रति को भी भिजवाया। बाद में डायरेक्टर साहब ने इसको हटाने के लिए कह दिया।
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….मुझे भी पता चला है कि इसने मेरे बारे में अंड-बंड मेल कई जगहों पर भेजा है। इसने जो आरोप लगाए हैं उसकी जांच करा लीजिए। एक-एक प्वाइंट पर जांच कराने के लिए हम तैयार हैं। गिट्टी बालू का मामला हो, ठेकेदारी का मामला हो, विज्ञापन का मामला हो, कोई मेरे पर उंगली नहीं उठा सकता। मैं जांच चाहता हूं।
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…..जो लोग अवैध खदानें चला रहे हैं, उनके इशारे पर कौशलेंद्र यह सब कर रहा है।
चंद्रकांत पांडेय
ब्यूरो चीफ
दैनिक जागरण, सोनभद्र











