मीडियावालों के लिए सपनों की नगरी दिल्ली में रहने के दुख कम नहीं हैं। न जाने कब आपके साथ कोई बैठे-ठाले, चलते-चलाते हादसा हो जाए और आपके परिचितों तक खबर पहुंचते-पहुंचते आपके प्राण पखेरू हो जाएं, कहा नहीं जा सकता। शैलेंद्र को जिस दिल्ली-एनसीआर की सड़क ने छीना, उसी दिल्ली-एनसीआर की एक सड़क पर एक और मीडियाकर्मी अपनी जान गंवा बैठा। इलेक्ट्रानिक मीडिया में काम करने वाले उस युवक ने चार महीने पहले ही प्रेम विवाह किया था। रात की नौकरी खत्म कर घर के लिए चला। बगल के मोहल्ले में रहने वाले एक सहकर्मी को भी बाइक पर बिठा लिया। सहकर्मी को उसके घर पर छोड़ अपने घर के लिए वो मुड़ा लेकिन घर नहीं पहुंच पाया। सुबह उसकी लाश मिली। दुर्गेश सहारा समय न्यूज चैनल के नोएडा स्थित आफिस में विजन मिक्सर का काम करते थे। 26 वर्षीय दुर्गेश श्रीवास्तव मूल रूप से कानपुर के निवासी थे। वह सहारा समय के नोएडा स्थित आफिस के ठीक बगल में स्थित मयूर विहार फेज थ्री के पाकेट नंबर चार में रहते थे।
रविवार की रात करीब 12 बजे दुर्गेश अपने दोस्त प्रमोद के साथ बाइक से घर के लिए निकले। प्रमोद के अनुसार रात करीब दो बजे दुर्गेश ने उसे कोंडली, गली नंबर पांच स्थित उसके घर के बाहर उतारा और उसके बाद बाइक से मयूर विहार की ओर चले गए। सुबह करीब साढ़े छह बजे किसी ने पुलिस को सूचना दी कि कोंडली सब्जी मंडी तिराहे के पास नाले में युवक का शव पड़ा है। बाद में शिनाख्त दुर्गेश के रूप में हुई।
पुलिस ने परिजनों को दुर्गेश की मौत की सूचना दे दी है। दुर्गेश श्रीवास्तव के माथे पर चोट के निशान थे। उनकी बाइक वहीं पास में पड़ी थी जिसका अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त था। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि पहले उन्हें किसी तेज रफ्तार वाहन ने टक्कर मारी होगी जिससे वह उछलकर नाले में गिरे होंगे। चोट के कारण बेहोश होने व कई घंटे पानी में डूबे रहने से उनकी मौत हो गई होगी। दुर्गेश के परिवार में उनकी पत्नी अनामिका श्रीवास्तव जो लखनऊ की रहने वाली हैं। दुर्गेश के पिता एसके श्रीवास्तव, बहन मोना और सोना, भाई श्याम श्रीवास्तव एवं परिवार के अन्य सदस्य कानपुर में ही रहते हैं।











