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देशोन्नती के कर्मचारी बने आंदोलनकारी

विदर्भ पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तीन अखबारों मराठी हिंदी दैनिक देशोन्नती, मराठी साप्ताहिक कृषकोन्नती और हिंदी दैनिक राष्ट्रप्रकाश में से एक देशोन्नती के संपादकीय और पेजिनेशन विभाग के लोग आंदोलनकारी हो गए हैं। ये लोग पिछले काफी दिनों से आंदोलन पर है। कभी कलमबंद हड़ताल तो कभी कार्य बहिष्कार तो कभी नारेबाजी का सिलसिला जारी है। इन पत्रकारों-कर्मचारियों की शिकायत कम तनख्वाह मिलने और प्रबंधन द्वारा शोषण-उत्पीड़न किए जाने की है। नागपुर स्थित इस अखबार के मुख्यालय में उठापटक जारी है। सूत्रों का कहना है कि संपादकीय और पेजिनेशन विभाग के करीब चालीस लोगों ने पिछले दिनों हड़ताल कर दिया। बाद में इनमें से कई लोग काम पर लौट आए पर 22 लोग अब भी आंदोलन की राह पर हैं। इनका कहना है कि प्रबंधन वेज बोर्ड को लागू करे और उसी के अनुरूप सुविधाएं व तनख्वाह प्रदान करे। पत्रकारों ने जो कलमबंद हड़ताल किया था, उसे खत्म कर दिया है लेकिन श्रमिक पत्रकार संघ के नेतृत्व में आंदोलन जारी है। आंदोलन के तरफदार वरिष्ठ पत्रकार संघपाल गडलिंग का कहना है कि नए कर्मचारी काफी कम वेतन पर रखे जा रहे हैं और उन पर काम का बोझ बढ़ा दिया जा रहा है। पुराने कर्मचारियों के साथ इतनी सख्ती बरती जा रही है कि काम के भारी दबाव में उनसे कोई गलती होने पर बेवजह दंडित किया जा रहा है। उनका आरोप है कि अखबार प्रबंधन की इसी तरह की मनमानियों के चलते दो साल पूर्व एक कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली थी।

विदर्भ पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तीन अखबारों मराठी हिंदी दैनिक देशोन्नती, मराठी साप्ताहिक कृषकोन्नती और हिंदी दैनिक राष्ट्रप्रकाश में से एक देशोन्नती के संपादकीय और पेजिनेशन विभाग के लोग आंदोलनकारी हो गए हैं। ये लोग पिछले काफी दिनों से आंदोलन पर है। कभी कलमबंद हड़ताल तो कभी कार्य बहिष्कार तो कभी नारेबाजी का सिलसिला जारी है। इन पत्रकारों-कर्मचारियों की शिकायत कम तनख्वाह मिलने और प्रबंधन द्वारा शोषण-उत्पीड़न किए जाने की है। नागपुर स्थित इस अखबार के मुख्यालय में उठापटक जारी है। सूत्रों का कहना है कि संपादकीय और पेजिनेशन विभाग के करीब चालीस लोगों ने पिछले दिनों हड़ताल कर दिया। बाद में इनमें से कई लोग काम पर लौट आए पर 22 लोग अब भी आंदोलन की राह पर हैं। इनका कहना है कि प्रबंधन वेज बोर्ड को लागू करे और उसी के अनुरूप सुविधाएं व तनख्वाह प्रदान करे। पत्रकारों ने जो कलमबंद हड़ताल किया था, उसे खत्म कर दिया है लेकिन श्रमिक पत्रकार संघ के नेतृत्व में आंदोलन जारी है। आंदोलन के तरफदार वरिष्ठ पत्रकार संघपाल गडलिंग का कहना है कि नए कर्मचारी काफी कम वेतन पर रखे जा रहे हैं और उन पर काम का बोझ बढ़ा दिया जा रहा है। पुराने कर्मचारियों के साथ इतनी सख्ती बरती जा रही है कि काम के भारी दबाव में उनसे कोई गलती होने पर बेवजह दंडित किया जा रहा है। उनका आरोप है कि अखबार प्रबंधन की इसी तरह की मनमानियों के चलते दो साल पूर्व एक कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली थी।

कर्मचारियों को टीए, डीए नहीं दिया जाता है, न ही पीएफ कट रहा है। कर्मचारियों के कलमबंद हड़ताल पर चले जाने से पिछले दिनों समाचारपत्र के छह संस्करणों का प्रकाशन गंभीर रूप से प्रभावित रहा। प्रबंधन तीस कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की चेतावनी दे रहा है और नए कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है। कर्मचारी इसे मनमाने तरीके से स्थानापन्न भर्ती बता रहे हैं।  संघपाल ने बताया कि कर्मचारियों की मुख्य मांगें हैं- काम के घंटे 12 से घटाकर आठ घंटे किए जाएं, कार्य का अतिरिक्त लोड खत्म किया जाए, कर्मचारियों को वेजबोर्ड के अनरूप सुविधाएं व तनख्वाह दी जाए, हर साल कर्मचारियों के वेतन में पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की जाए और नए कर्मचारियों की नियुक्ति के समय उनसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर न कराए जाएं। संघपाल ने बताया कि जब लगभग साढ़े तीन दर्जन कर्मचारियों की हड़ताल से प्रकाशन व्यवस्था चरमराने लगी तो समाचारपत्र के मुख्य संपादक प्रकाश पोहरे ने एक प्रेस कांफ्रेस में घोषणा की कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगें एक माह में पूरी कर दी जाएंगी। एक माह की अवधि पूरी हो चुकी है। अब कर्मचारी नागपुर पत्रकार संघ के नेतृत्व में फिर आंदोलन तेज करने के मूड में हैं।

उधर, प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि देशोन्नती समूह में करीब नौ सौ लोग काम करते हैं। इनमें से मुट्ठी भर लोग बाहरी तत्वों के उकसावे पर भ्रमित हो गए हैं और प्रबंधन पर अनुचित दबाव बना रहे हैं। प्रबंधन के मुताबिक बाजार के इस दौर में किसी को भी रोका नहीं गया है। जिसे जहां अच्छी सेलरी मिल रही हो, जाकर काम कर सकता है। देशोन्नी समूह अपने कर्मचारियों और पत्रकारों को हमेशा से मार्केट रेट के मुताबिक उचित वेतन व सुविधाएं देता रहा है और आगे भी देगा। मंदी के इस दौर में भी प्रबंधन ने किसी कर्मचारी की तनख्वाह नहीं घटाई। पिछले साल सभी की सेलरी में पर्याप्त वृद्धि की गई। बावजूद इसके नारेबाजी करना और आंदोलन करना संस्थान को नुकसान पहुंचाने की नीयत दर्शाता है जो संस्थान विरोधी रवैया है। प्रबंधन के मुताबिक नागपुर के कुछ लोग संस्थान को कमजोर करने के लिए इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं और कर्मचारियों को उकसा रहे हैं।

इसी ग्रुप के हिंदी दैनिक राष्ट्रप्रकाश के संपादक सुदर्शन चक्रधर का कहना है कि कुछ लोग अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांगों पर प्रबंधन ने सुनवाई करने का भरोसा दिया हुआ है। सुदर्शन चक्रधर के मुताबिक वे करीब तीन साल से इस ग्रुप में हैं और विभिन्न वरिष्ठ पदों पर रहते हुए कार्य कर चुके हैं, उन्हें कभी यह नहीं लगा कि प्रबंधन कर्मचारियों का नुकसान चाहता या करता है। उन्होंने कहा कि मेरी निजी राय है कि दूसरे जगहों पर कर्मचारियों को जो सुविधाएं दी जाती हैं, लगभग वही कुछ यहां भी है। पर कुछ लोग असंतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास भी आंदोलन में शामिल होने का प्रस्ताव आया था लेकिन उन्हें कहीं से यह नहीं लगा कि प्रबंधन कुछ ऐसा कर रहा है जिसके खिलाफ आंदोलन की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी लोग फिर से शांतिपूर्वक काम करेंगे और संस्थान को मजबूत बनाने में योगदान देंगे। 

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