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70 करोड़ की केबीए मशीन लाया भास्कर

KBA Machineप्रिंटिंग टेक्नालजी पर 315 करोड़ रुपये निवेश कर रहा : देश के भीमकाय मीडिया हाउसों में से एक भास्कर समूह टेक्नालजी के मामले में खुद को बड़े पैमाने पर अपग्रेड करने की योजना बना चुका है। खासकर प्रिंटिंग टेक्नालजी के मामले में वह भाषाई अखबारों में नंबर वन बनना चाहता है। इसके लिए पूरे 315 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। भास्कर ग्रुप के निदेशकों में से एक गिरीश अग्रवाल ने एक लिखित वक्तव्य जारी कर समूह की इस योजना का खुलासा किया है। सूत्रों का कहना है कि 315 करोड़ रुपये में से करीब दो तिहाई हिस्सा केबीए (Koenig & Bauer AG) प्रिंटिंग मशीनों की खरीद में व्यय होगा। हर घंटे अखबार की 85 हजार कापियां छापने वाली यह मशीन जर्मनी में निर्मित हैं। यह मशीन भास्कर समूह जयपुर में लगा चुका है और अब अहमदाबाद में लगाने की तैयारी है।

KBA Machineप्रिंटिंग टेक्नालजी पर 315 करोड़ रुपये निवेश कर रहा : देश के भीमकाय मीडिया हाउसों में से एक भास्कर समूह टेक्नालजी के मामले में खुद को बड़े पैमाने पर अपग्रेड करने की योजना बना चुका है। खासकर प्रिंटिंग टेक्नालजी के मामले में वह भाषाई अखबारों में नंबर वन बनना चाहता है। इसके लिए पूरे 315 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। भास्कर ग्रुप के निदेशकों में से एक गिरीश अग्रवाल ने एक लिखित वक्तव्य जारी कर समूह की इस योजना का खुलासा किया है। सूत्रों का कहना है कि 315 करोड़ रुपये में से करीब दो तिहाई हिस्सा केबीए (Koenig & Bauer AG) प्रिंटिंग मशीनों की खरीद में व्यय होगा। हर घंटे अखबार की 85 हजार कापियां छापने वाली यह मशीन जर्मनी में निर्मित हैं। यह मशीन भास्कर समूह जयपुर में लगा चुका है और अब अहमदाबाद में लगाने की तैयारी है।

केबीए मशीनों की कीमत करीब 70 करोड़ रुपये है। इस मशीन की कई खासियत है। एक तो यह परंपरागत मशीनों से करीब 60 फीसदी ज्यादा रफ्तार से प्रिंटिंग करती है। नंबर दो- परंपरागत मशीनों की तुलना में करीब 80 फीसदी कम जगह में इसकी स्थापना हो जाती है। रद्दी निर्माण कार्य परंपरागत मशीनों की तुलना में 10 फीसदी कम करती है। और सबसे बड़ी बात कि बिजली व्यय में 58 फीसदी की बचत करती है। यह मशीन पैकिंग, फोल्डिंग व इनसर्ट करने के काम को भी बखूबी अंजाम देती है। इस काम को अभी तक बड़े-बड़े मीडिया हाउस मैनुवली कराते हैं लेकिन केबीए मशीनों में यह सुविधा आटोमेटेड है। केबीए मशीन करीब 64 पेज के टैबलायड अखबार को छापने की कूव्वत रखती है।

गिरीश अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा है कि भास्कर समूह हमेशा से इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रौद्योगिकी में निवेश करने में यकीन रखता रहा है और यह भास्कर समूह के बिजनेस का अभिन्न अंग है। भास्कर समूह अपने पाठकों और विज्ञापनदाताओं को सर्वोत्तम देना चाहता है, इसीलिए उन्नत प्रौद्योगिकी को हमेशा वरीयता दी जाती है। ज्ञात हो कि भास्कर समूह के चीफ टेक्नालजी आफिसर आरडी भटनागर हैं और उन्हीं की देखरेख में भास्कर समूह प्रिंटिंग टेक्नालजी को अपग्रेड कर रहा है। अपग्रेडेशन का काम अक्टूबर महीने तक पूरा होने के आसार हैं। सूत्रों का कहना है कि भास्कर समूह केबीए मशीनों के अलावा कई अन्य प्रतिष्ठित निर्माताओं की मशीनों को भी खरीद रहा है। इन मशीनों को भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर, रायपुर आदि बड़े केंद्रों पर स्थापित किया जाएगा।  

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