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‘यूपी की मीडिया में कोई असंतोष नहीं’

वर्तमान मान्यता कमेटी ठीक : उत्तर प्रदेश की मडिया में सरकार के प्रति भारी असंतोष है… इस तरह की खबरें पूरी तरह से भ्रामक हैं। ये खबरें हमारे कुछ मुट्ठी भर पत्रकारों ने भड़ास4मीडिया को मेल भेजकर और बयान देकर फैलाई हैं। मै राजधानी लखनऊ से विगत 20 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं। मैं जब लखनऊ में आया था तो उस समय एनेक्सी मीडिया सेंटर में इतना आतंक नये पत्रकारों के लिये था, जिसका बयान करना मुमकिन नहीं है। कुछ मुट्ठी भर पत्रकारों ने पूरे प्रदेश के पत्रकारों के नाम से प्रदेश की मीडिया जगत की छवि को खराब करने का काम किया है। मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता। मैंने सत्रह वर्ष तक इन पत्रकारों का उत्पीड़न झेला है, जो मान्यता कमेटी के नाम पर या फिर अपनी मठाधीशी के नाम पर यहां की पत्रकारिता को अंजाम देते थे। मैं दो बार राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था लेकिन कुछ मुट्ठी भर पत्रकारों के मीडिया के हाईजैक करने के कारण मैं चुनाव नहीं जीत सका। लेकिन मेरा उन मुट्ठी भर पत्रकारों के खिलाफ संघर्ष जारी रहा। 

वर्तमान मान्यता कमेटी ठीक : उत्तर प्रदेश की मडिया में सरकार के प्रति भारी असंतोष है… इस तरह की खबरें पूरी तरह से भ्रामक हैं। ये खबरें हमारे कुछ मुट्ठी भर पत्रकारों ने भड़ास4मीडिया को मेल भेजकर और बयान देकर फैलाई हैं। मै राजधानी लखनऊ से विगत 20 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं। मैं जब लखनऊ में आया था तो उस समय एनेक्सी मीडिया सेंटर में इतना आतंक नये पत्रकारों के लिये था, जिसका बयान करना मुमकिन नहीं है। कुछ मुट्ठी भर पत्रकारों ने पूरे प्रदेश के पत्रकारों के नाम से प्रदेश की मीडिया जगत की छवि को खराब करने का काम किया है। मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता। मैंने सत्रह वर्ष तक इन पत्रकारों का उत्पीड़न झेला है, जो मान्यता कमेटी के नाम पर या फिर अपनी मठाधीशी के नाम पर यहां की पत्रकारिता को अंजाम देते थे। मैं दो बार राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था लेकिन कुछ मुट्ठी भर पत्रकारों के मीडिया के हाईजैक करने के कारण मैं चुनाव नहीं जीत सका। लेकिन मेरा उन मुट्ठी भर पत्रकारों के खिलाफ संघर्ष जारी रहा। 

वर्तमान में जो मान्यता समिति की कमेटी है, जिसमें प्रमोद गोस्वामी अध्यक्ष हैं और हेमंत तिवारी सचिव हैं, उसके कार्यकाल से मै पूरी तरह से सहमत हूं क्योंकि इन दोनों वरिष्ठ पत्रकारों ने कुछ मुट्ठी भर पत्रकारों की परवाह न करते हुए कुछ ऐसे कार्य मीडिया जगत के लिये कर दिए हैं जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। एक समय तक इन मुट्ठी भर पत्रकारों का जबरन एनेक्सी मीडिया सेंटर पर कब्जा रहता था। देर शाम सरकार को गाली देना और बाद में अपना उल्लू सीधा करना इनका काम रहता था। आज उसी कड़ी को सरकार के सहयोग से इस मान्यता समिति ने तोड़ने का काम किया है। पहले कोई बाहर का पत्रकार मीडिया सेंटर में घुस नहीं सकता था। लेकिन आज सरकार की व्यवस्था के अनुसार हर वह पत्रकार आराम से मीडिया सेंटर में आ-जा सकता है जिसके लिये मीडिया सेंटर बना है। आप आइये और पत्रकारिता कीजिए, इसके लिए मीडिया सेंटर है। जिसका स्वरूप अब पूरी तरह से  सुधर चुका है। बीच में इन्ही मुट्ठी भर पत्रकारों ने पूरे देश में एक खबर को जन्म दे दिया कि पत्रकारों में सरकार को लेकर काफी असंतोष है। मै इस पर सफाई तो नहीं देना चाह रहा हूं लेकिन सत्यता को बताना भी मेरा काम है। इस तरह का कोई असंतोष पत्रकारों में नहीं है। सरकार अपना काम कर रही है और लिखने-पढ़ने वाले पत्रकार अपना काम कर रहे हैं।

किसी उस पत्रकार को कोई नाराजगी नहीं है जो वाकई में पत्रकार है। ऐसा इसलिए मैं लिख रहा हूं कि आखिर उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के कारनामों से पूरे देश में जो छवि इन मुठ्ठी भर पत्रकारों ने पेश की है, उसे मैं सही तरह से रख सकूं। मेरे इलेक्ट्रानिक चैनल के नामी गिरामी पत्रकार और फोटो जर्नलिज्म के नामी फोटोग्राफरों तथा प्रिंट मीडिया के नामी पत्रकारों से अगर बात की जाये तो सही तस्वीर उत्तर प्रदेश मीडिया की खुद मिल जायेगी। मैं न तो प्रमुख सचिव विजय शंकर पाण्डेय की तारीफ में कसीदे पढ़ रहा हूं और न ही वर्तमान कमेटी के अध्यक्ष प्रमोद गोस्वमी व सचिव हेमंत तिवारी के। यह तो राजधानी के मीडिया सेंटर पर आने पर पता चल सकेगा कि सरकार कितनी अच्छी तरह से एनेक्सी स्थित मीडिया सेंटर का संचालन करा रही है। सरकार और कमेटी मिलकर उन मुट्ठी भर पत्रकारों को इस आधुनिक सेंटर से बाहर करने में लगी है जो सरकारी सुविधा का भोग तो करते हैं लेकिन तथाकथित पत्रकार होने के बावजूद सरकार के आला अधिकारियों को गाली-गलौज करके शब्दों का वाण चलाते हैं। मैरे हिसाब से यह पत्रकारिता नहीं है। इसलिये मैं आज भड़ास4मीडिया से यह अनुरोध करना चाहता हूं कि वह उत्तर प्रदेश के पत्रकारों की जो छवि वास्तव में है, उसे ही सही तरह से पेश करे।

मैं आगामी चुनाव का प्रत्याशी कतई नहीं हूं। मै सिर्फ उत्तर प्रदेश के पत्रकारों की निरन्तर गिरती छवि से दुखी हूं, जिसे तत्काल सुधारा जाना चाहिए। अभी चुनाव कराने का भी वक्त नहीं है। पहले हमें अपने अंदर सब कुछ ठीक-ठाक कर लेना चाहिए और इस व्यवस्था से उन मुट्ठी भर पत्रकारों को बाहर कर देना चाहिए जो सरकार और पत्रकारों के बीच खाई खोदने का काम कर रहे हैं। सरकार अपना काम करती है, पत्रकार अपना काम तो फिर दोनों के बीच खाई खोदने का कोई काम नहीं होना चाहिए।


लेखक प्रभात त्रिपाठी ‘समाजवाद का उदय’ के ब्यूरो प्रमुख हैं और उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता संवाददाता समिति, लखनऊ के अध्यक्ष पद के चुनाव लड़ चुके हैं। इनसे संपर्क 09450410050 या [email protected] के जरिए किया जा सकता है। प्रभात ने जो कुछ लिखा है, उससे अगर आप असहमत हैं तो अपनी बात [email protected] पर मेल कर सकते हैं।

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