भाई यशवंत सिंह, नमस्कार. भड़ास4मीडिया के माध्यम से कुछ सवाल अख़बारों के प्रबंधन से उठाना चाहता हूँ. गोरखपुर से निकलने वाले प्रमुख अख़बारों के चर्चित कालम न जाने कहाँ गुम हो गए है. अख़बार बौद्धिक खुराक की जगह आपराधिक सूचना के पेम्फलेट बनते जा रहे है. हम आपके माध्यम से पूर्वांचल के उन लोगों की बात उठा रहे है जो प्रायः ये चर्चा करते मिल जाते है की यार फलां का कालम बहुत अच्चा था अब नहीं छप रह है. गोरखपुर के महत्वपूर्ण अख़बार और उनके कालमों का जिक्र कर रहा हूँ. दैनिक जागरण में सम्पादकीय प्रभारी शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी का “चिंतन”, राजेश सिंह बसर का “तीरे नजर”, रोहित पाण्डेय का “हफ्ते की बात”, नर्वदेश्वर पाण्डेय का ” देहाती की दिल्लगी”, संजय तिवारी का “यायावरी” कालम पूर्वांचल में खूब पढा गया, लेकिन अपने को नम्बर एक का दावा करने वाले इस अख़बार के पास मौजूदा वक्त में स्थानीय स्तर का कोई स्थाई कालम नहीं है.
राष्ट्रीय सहारा में कुमार हर्ष का चर्चित कालम “वक्रदृष्टि”, राजेश त्रिपाठी की “दक्शिदांचल की डायरी”, रमेश शुक्ल, दिलीप सिंह व रितेश मिश्र की संयुक्त टीम “घूमते-घामते” नाम से एक कालम निकालती थी. वह भी “घूमते-घामते” न जाने कहाँ गुम हो गया. अमर उजाला गोरखपुर में आया और तुंरत छा गया. इस अख़बार के चर्चित कालम “बेताल की डाल” संयुक्त रूप से चार अलग-अलग पत्रकार साथी लिखते थे पर अब बेताल को ढोते रहना अमर उजाला को गंवारा नहीं है. “देहाती की पाती” ने महानगर से लेकर गाँव की गलियों तक खूब धूम मचाई. गुरुवार को मात्र इस कालम के लिए लोग अलग से अमर उजाला खरीदते थे, लेकिन “देहाती की पाती” से पाठक वंचित हो रहे है.
क्या अख़बारों का प्रबंधन पूर्वांचल में खून-खराबा, लूटमार, चोरी-डकैती, छेड़खानी-बलात्कार और राजनेताओं के गुणगान ही पढायेंगे या फिर कुछ बौद्धिक खुराक, हास्य-वयंग्य से भी पाठकों को रूबरू कराएँगे. बहुत से पाठकों की निगाह अब “हिंदुस्तान” को तलाश रही है. लोग बेचैन हैं कि गोरखपुर से ‘हिंदुस्तान’ का प्रकाशन शीघ्र हो. नयी उर्जा के साथ लोग “हिंदुस्तान” का इंतजार कर रहे है. कारण है कि दैनिक जागरण का “गुरवारिय” व अमर उजाला की “पुरवाई” नाम के साप्ताहिक परिशिस्ट बंद हो चुके है. राष्ट्रीय सहारा के पास “आजकल” नाम का एक साप्ताहिक परिशिस्ट है , लेकिन अख़बार का मार्केट इन दिनों डाउन चल रहा है. जब तक अमर उजाला, गोरखपुर नहीं आया था, यह अख़बार जागरण के बाद दूसरे नम्बर पर था. इन दिनों तीसरे नंबर पर है. “हिंदुस्तान” आएगा तो निश्चित रूप से पहला व दूसरा स्थान बनाएगा. हो सकता है की पूर्वांचल के लोगों के टेस्ट का ख्याल करें और कोई चर्चित कालम शुरू करे. फिलहाल दैनिक जागरण व अमर उजाला के पास इस समय कोई कालम नहीं है.
आपका
सुधांशु प्रताप सिंह
लखनऊ











