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ढेर सारे बड़े-बड़े टीवी पत्रकार हुए पुरस्कृत

इनमें मालिक भी, संपादक भी और पत्रकार भी : ज्यादातर विजेता दिल्ली वाले : रजत शर्मा बोले- सुधर रहे हैं टीवी न्यूज चैनल : आईबीएन7, सीएनएन-आईबीएन, स्टार न्यूज, टाइम्स नाऊ जैसे प्रमुख चैनलों के अघोषित बहिष्कार के बीच वर्ष 2009 के इंडियन न्यूज ब्राडकास्टिंग एवार्ड (आईएनबीए) बांट दिए गए। दिल्ली के एक होटल में कल आयोजित समारोह में अवार्ड की 17 कैटगरी के विजेताओं के नाम घोषित कर उन्हें पुरस्कार से नवाजा गया। न्यूज टेलीविजन एडिटर इन चीफ आफ द इयर (हिंदी) का एवार्ड आज तक के कमर वहीद नकवी और अंग्रेजी के लिए एनडीटीवी की बरखा दत्त को दिया गया। डा. प्रणय राय को द हाल आफ फेम फार लाइफटाइम कांट्रीब्यूशन टू इंडस्ट्री अवार्ड तो रजत शर्मा को न्यूज टेलीविजन एंटरप्रेन्योर आफ द इयर अवार्ड मिला। न्यूज टेलीविजन सीईओ आफ द इयर अवार्ड आज तक के जीके कृष्णन ने लिया। 

इनमें मालिक भी, संपादक भी और पत्रकार भी : ज्यादातर विजेता दिल्ली वाले : रजत शर्मा बोले- सुधर रहे हैं टीवी न्यूज चैनल : आईबीएन7, सीएनएन-आईबीएन, स्टार न्यूज, टाइम्स नाऊ जैसे प्रमुख चैनलों के अघोषित बहिष्कार के बीच वर्ष 2009 के इंडियन न्यूज ब्राडकास्टिंग एवार्ड (आईएनबीए) बांट दिए गए। दिल्ली के एक होटल में कल आयोजित समारोह में अवार्ड की 17 कैटगरी के विजेताओं के नाम घोषित कर उन्हें पुरस्कार से नवाजा गया। न्यूज टेलीविजन एडिटर इन चीफ आफ द इयर (हिंदी) का एवार्ड आज तक के कमर वहीद नकवी और अंग्रेजी के लिए एनडीटीवी की बरखा दत्त को दिया गया। डा. प्रणय राय को द हाल आफ फेम फार लाइफटाइम कांट्रीब्यूशन टू इंडस्ट्री अवार्ड तो रजत शर्मा को न्यूज टेलीविजन एंटरप्रेन्योर आफ द इयर अवार्ड मिला। न्यूज टेलीविजन सीईओ आफ द इयर अवार्ड आज तक के जीके कृष्णन ने लिया। 

रीजनल लैंग्वेज न्यूज ब्राडकास्टर आफ द इयर अवार्ड टीवी9 के रवि प्रकाश को दिया गया। न्यूज शो होस्ट ऑफ द इयर अवार्ड (हिंदी) एनडीटीवी इंडिया के पंकज पचौरी को ‘हम लोग’ कार्यक्रम के लिए दिया गया। अंग्रेजी के लिए यह पुरस्कार करण थापर को अरुण जेटली के इंटरव्यू के लिए मिला। साल का सर्वश्रेष्ठ हिंदी रिपोर्टर पुरस्कार उमाशंकर सिंह (एनडीटीवी इंडिया) और अंग्रेजी रिपोर्टर पुरस्कार शिवपूजन झा (न्यूज़ एक्स) को दिया गया। उमाशंकर को यह एवार्ड उनकी स्टोरी ‘मंदिर इन पाकिस्तान’ के लिए दिया गया। 30 वर्ष से कम उम्र के टीवी पत्रकारों को दिया जाने वाला यंग प्रोफेशनल अवार्ड भी एनडीटीवी इंडिया के खाते में गया। इसे लिया दीप्ति सचदेवा ने। उन्हें यह अवार्ड ‘एनडीटीवी एक्सपोज- बेबीज एट रिस्क’ रिपोर्ट के लिए दिया गया।

हिंदी के सर्वश्रेष्ठ प्रोड्यूसर माने गए जी न्यूज के खुशदीप सहगल। उन्हें ‘वोट का अग्निपथ’ कार्यक्रम के लिए यह अवार्ड मिला। यही पुरस्कार अंग्रेजी में हेडलाइंस टुडे के सुजॉय भट्टाचार्या को ‘ग्रेट स्पीचेज एंड ट्रुथ एबाउट सिमी’ कार्यक्रम के लिए मिला। साल का सबसे अच्छा हिंदी बिजनेस न्यूज एंकर जी बिजनेस के चेतन शर्मा और अंग्रेजी बिजनेस न्यूज एंकर यूटीवीआई की मिनी मेनन को माना गया। वर्ष का सर्वश्रेष्ठ न्यूज वीडियोग्राफर (हिंदी) अवार्ड बैग फिल्म्स और न्यूज24 के शिवी सुदर्शन, शैलेश कुमार और देवेंद्र सिंह बिष्ट को उनकी कोशी की बाढ़ पर फिल्माई गई स्टोरी ‘डूबी दुनिया का दर्द’ के लिए दिया गया। यही पुरस्कार अंग्रेजी में न्यूज एक्स के संदीप दास ने लिया। पुरस्कार के लिए जो निर्णायक मंडल बनाया गया था उसके अध्यक्ष तरुण तेजपाल (तहलका) थे और सदस्य जीवीएल नरसिम्हा राव (भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य), जी नरसिम्हा राव (सुप्रीम कोर्ट के वकील), विनोद बख्शी (जी ग्रुप के निदेशक मंडल के सदस्य), श्रवण गर्ग (दैनिक भास्कर), मधुर भंडारकर (फिल्म निर्माता), तरुण राय (वर्ल्ड वाइड मीडिया), जोसी पाल, लतिका खनेजा, अश्विनी सिंगला, कनिका माथुर और सुहेल सेठ थे। कार्यक्रम का आयोजन एक्सचेंज4मीडिया ने किया था और प्रायोजक था एयरटेल।

कार्यक्रम में रजत शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले छह महीनों में हिंदी न्यूज चैनलों ने खुद को काफी कुछ बदला है। उन्होंने न्यूज चैनलों के रवैए पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की चिंताओं को जायज करार दिया और कहा कि इन चिंताओं के चलते ही काफी कुछ बदल रहा है और यह दिख भी रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि स्वाइन फ्लू के मामले में पैनिक फैलने की चिंता को समझकर न्यूज चैनलों ने बाद में खुद को संयमित कर लिया। मुंबई हमले के बाद न्यूज चैनलों की जो आलोचना हुई, उसके बाद चैनल चलाने वालों ने अनुशासन व संयम का परिचय देने का निर्णय लिया। इस पर अमल भी किया जा रहा है। वे बोले- हम लोग आलोचनाओं को पाजिटिव रूप में लेते हैं, इसीलिए खुद को बदलते भी हैं। सांप और भूत की खबरें अब नहीं दिखाई जातीं। स्वास्थ्य, समाज, आतंकवाद से संबंधित खबरों पर जोर दिया जा रहा है। यह बदलाव धीरे-धीरे टीवी का हिस्सा बन जाएगा। जो लोग अब भी चैनलों को खराब कंटेंट के कारण भला-बुरा कह रहे हैं, वे संभवतः टीवी देखते ही नहीं इसीलिए पुरानी धारण पर अब तक कायम हैं। उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सहयोगी रवैए की तारीफ करते हुए कहा कि न्यूज चैनलों को सहयोग देकर ही बदला जा सकता है। नियंत्रित करने की कोशिश कभी की जाएगी तो इससे स्थिति बिगड़ेगी। एमआईबी (मिनिस्ट्री आफ इनफारमेशन एंड ब्राडकास्टिंग) ने लगातार संवाद का जो सिलसिला शुरू किया है, वह उत्सावर्द्धक है।

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