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सम्मान

खबर न उछालने के लिए पत्रकार सम्मानित

पत्रकारों के स्मृति चिन्ह पर विराजे गणेशजीउत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के लगभग सभी पत्रकारों को सम्मानित किया गया. पत्रकारों और पुलिस को अपहरण से जुड़े एक मामले में अपहरणकर्ताओं द्वारा अपहृत को सकुशल छोड़ने के लिए सम्मानित किया गया. पत्रकारों को सम्मानित इसलिए किया गया कि उन्होंने इस प्रकरण में बहुत ज्यादा हो-हल्ला करने वाली खबरें नहीं छापी. अपने काम से परहेज किया. समारोह में आयोजकों ने कहा भी कि पत्रकारों ने मामले से जुड़ी खबर को अपने समाचारपत्रों और न्यूज़ चैंनलों में प्रमुखता से जगह नहीं दी जिस कारण बच्चे की जान बच सकी. खबर ज्यादा फ्लैश होने पर खतरा हो सकता था.

पत्रकारों के स्मृति चिन्ह पर विराजे गणेशजीउत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के लगभग सभी पत्रकारों को सम्मानित किया गया. पत्रकारों और पुलिस को अपहरण से जुड़े एक मामले में अपहरणकर्ताओं द्वारा अपहृत को सकुशल छोड़ने के लिए सम्मानित किया गया. पत्रकारों को सम्मानित इसलिए किया गया कि उन्होंने इस प्रकरण में बहुत ज्यादा हो-हल्ला करने वाली खबरें नहीं छापी. अपने काम से परहेज किया. समारोह में आयोजकों ने कहा भी कि पत्रकारों ने मामले से जुड़ी खबर को अपने समाचारपत्रों और न्यूज़ चैंनलों में प्रमुखता से जगह नहीं दी जिस कारण बच्चे की जान बच सकी. खबर ज्यादा फ्लैश होने पर खतरा हो सकता था.

इसी कारण सभी पत्रकारों को सम्मानित किया जा रहा है. हरदोई के कोतवाली शहर के आजाद नगर मोहल्ले के अमरेन्द्र सिंह के सोलह वर्षीय पुत्र सोमेन्द्र सिंह उर्फ़ शानू का अपहरण 13 अगस्त को हो गया था. इस मामले में अपहरणकर्ताओं ने शानू के पिता से उसकी रिहाई के बदले दस लाख की रकम की फिरौती मांगी थी. हरदोई में सालों बाद फिरौती के लिए यह अपहरण की वारदात हुई थी. पुलिस ने शुरवात में गुमशुदगी का मामला दर्ज किया लेकिन जब फिरौती के लिए फोन आया तब पुलिस की नींद टूटी और पुलिस बदमाशों की खोजबीन में जुटी. पुलिस के प्रयासों का नतीजा यह हुआ कि उसने एक मुठभेड़ में शानू को मुक्त करा लिया. यह बात मीडिया के एक आध लोगों को ही पता है कि शानू को बदमाश उसके घर के पास सकुशल छोड़ गए थे. यह सब बदमाशों ने पुलिस कार्यवाई से परेशान होकर किया. शानू के परिवार वालों ने अपने एक रिश्तेदार और सक्रिय नेता, जिनका एक ज़माने में पुलिस पर इतना प्रभाव था कि थानेदार उनके दरबार में अपनी हाजिरी जरूर दर्ज कराते थे, की सलाह पर पुलिस को सम्मानित करने का निर्णय लिया. इसके लिए शहर से पांच किलोमीटर दूर मैक रसोई में पुलिस का सम्मान समारोह आयोजित किया गया. पत्रकारों को भी सम्मान समारोह और भोज में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया. आयोजकों ने भोज के लिए पुलिस और पत्रकारों की आदत के अनुसार शाकाहारी और मांसाहारी, दोनों तरह के खाने के अलावा पेय पदार्थों की भी व्यवस्था की थी. मांसाहारी भोजन में तीतर भी पकाया गया था. भोजन शुरू होने से पूर्व भाषणबाजी का दौर शुरू हुआ. पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सागर के प्रति पूरे मामले में विशेष आभार जताते हुए अपहृत लड़के के बाबा नत्थू सिंह ने उनको सम्मानित किया. उसके बाद श्री सागर ने कार्रवाई में शामिल पुलिस अधिकारियों, थानेदारों व अन्य पुलिसकर्मियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया. इसके बाद पत्रकारों के सम्मान की बेला आई. आयोजकों ने पत्रकारों की प्रशंसा में कहा कि इस अपहरण के मामले में शानू की सकुशल रिहाई में पत्रकारों की भूमिका बड़ी अहम रही है क्योकि पत्रकारों ने इस पूरे मामले को अपने अपने समाचार माध्यमो में कम जगह दी और मामले को उछाला नहीं जिसके लिए शानू का परिवार पत्रकारों का आभारी है. इसलिए पत्रकारों को भी सम्मानित किया जायेगा.

उसके बाद पत्रकारों को भी सम्मानित किये जाने का क्रम चालू हुआ और मंच से अमर उजाला के ब्रजेश मिश्रा, पंकज मिश्रा,  दैनिक जागरण से पंकज सचान, हिंदुस्तान के कमर अव्वास और अनिल मिश्र, आज कानपुर से अरुण मिश्रा, आज लखनऊ व जी न्यूज़ उत्तर प्रदेश के करीम उल्लाह फारुकी, राष्ट्रीय सहारा से आलोक श्रीवास्तव और देवेन्द्र सिंह बबलू, आज तक से प्रशांत पाठक, स्टार न्यूज़ से रंजीत सिंह, सहारा से आमिर किरमानी, इंडिया टीवी से ब्रजेश श्रीवास्तव, इंडिया न्यूज़ से आलोक सिंह, जनसंदेश से आनंद शुक्ल मुन्ना, रामस्वरूप सहित करीब पच्चीस पत्रकारों-फोटोग्राफरों को मंच पर गणेशजी की प्लास्टिक में मढ़ी प्रतिमा का स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित होने के लिए बुलाया गया. तीतर के विशेष व्यंजनों से सुशोभित इस दावत का लुत्फ़ लेने के लिए आयोजकों ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी. दावत और सम्मान समारोह के समय पत्रकारों को फ़ोन कर उनसे पहुचने का आग्रह भी किया गया इसलिए पत्रकारों की संख्या भी अधिक थी. कुछ लोग दावत में पहुंचे तो जरूर लेकिन सम्मान लेने मंच पर नहीं गए. ऐसे लोगों में उजाला के ब्रजेश मिश्रा, पंकज मिश्रा और जागरण के पंकज सचान रहे. सबसे देर से पहुचने वालों में आनंद शुक्ल रहे. उनको भी सम्मानित होने का गौरव नहीं मिला. कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने सम्मान समारोह में ना जाकर सम्मानित होने का मौका गंवा दिया. सम्मान और स्मृति चिन्ह से मरहूम रहने वालो में कमर अव्वास और प्रशांत पाठक रहे जो इस अनोखे सम्मान का लाभ लेने से रह गए.

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