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नए प्रस्ताव पर आईएनएस में घमासान (1)

[caption id="attachment_15716" align="alignleft"]परेश नाथ द्वारा लिखे पत्र का एक अंशपरेश नाथ द्वारा लिखे पत्र का एक अंश[/caption]उपाध्यक्ष परेश नाथ ने आईएनएस के सभी सदस्यों को पत्र लिखा : नए प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया : पूछा- सदस्यों के लिए है आईएनएस या आईएनएस की दया पर निर्भर हैं सदस्य? : दिल्ली स्थित प्रेस क्लब आफ इंडिया  में ही किच-किच नहीं मची हुई है, अखबार उद्योग के सबसे बड़े और सबसे पुराने संगठन इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आईएनएस) में भी आजकल अंदरखाने जबरदस्त विवाद और आपसी घमासान शुरू हो चुका है। अखबार मालिकों के इस ताकतवर और प्रमुख संगठन के सदस्य इन दिनों दो हिस्सों में बंटने लगे हैं। इसके पीछे वजह है हैदराबाद में 24 सितंबर को होने वाली आईएनएस की एजीएम में एक विशेष प्रस्ताव को पारित कराने की तैयारी। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि आईएनएस की सदस्यता से संबंधित सब्सक्रिप्शन फीस आईएनएस को समय से प्राप्त हो जाए, इसकी गारंटी अब खुद सदस्य को करनी होगी।

परेश नाथ द्वारा लिखे पत्र का एक अंशउपाध्यक्ष परेश नाथ ने आईएनएस के सभी सदस्यों को पत्र लिखा : नए प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया : पूछा- सदस्यों के लिए है आईएनएस या आईएनएस की दया पर निर्भर हैं सदस्य? : दिल्ली स्थित प्रेस क्लब आफ इंडिया  में ही किच-किच नहीं मची हुई है, अखबार उद्योग के सबसे बड़े और सबसे पुराने संगठन इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आईएनएस) में भी आजकल अंदरखाने जबरदस्त विवाद और आपसी घमासान शुरू हो चुका है। अखबार मालिकों के इस ताकतवर और प्रमुख संगठन के सदस्य इन दिनों दो हिस्सों में बंटने लगे हैं। इसके पीछे वजह है हैदराबाद में 24 सितंबर को होने वाली आईएनएस की एजीएम में एक विशेष प्रस्ताव को पारित कराने की तैयारी। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि आईएनएस की सदस्यता से संबंधित सब्सक्रिप्शन फीस आईएनएस को समय से प्राप्त हो जाए, इसकी गारंटी अब खुद सदस्य को करनी होगी।

ऐसा नहीं करने पर सदस्यता कैंसिल की जा सकती है। अभी तक यह व्यवस्था है कि फीस जमा करने में किन्हीं भी वजहों से लेट-लतीफ होने के बावजूद सदस्यता कैंसिल नहीं की जा सकती। आईएनएस फीस के लिए सदस्य को रिमाइंडर भेजता है। नए प्रस्ताव के मुताबिक अगर आईएनएस को समय से फीस नहीं मिलती है, वह चाहे किसी भी वजह से, वह संबंधित व्यक्ति या अखबार की सदस्यता एकतरफा तौर पर खत्म कर देगा। इस नए प्रस्ताव का विरोध शुरू हो चुका है। कहा जा रहा है कि यह प्रस्ताव आईएनएस के ताकतवर लोग कमजोर लोगों को परेशान करने और आईएनएस से बाहर निकालने के लिए पारित करवाना चाहते हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस प्रस्ताव के पारित हो जाने पर इसका भरपूर दुरुपयोग संभव है।

प्रस्ताव के मुखर विरोधी आईएनएस के उपाध्यक्ष परेश नाथ ने सभी सदस्यों को दो पन्नों के एक पत्र के साथ चार पन्नों का विस्तृत विवरण अटैच करके भेजा है। पत्र में उन्होंने आईएनएस सदस्यों को 24 सितंबर की हैदराबाद में होने वाली एजीएम में पारित किए जाने वाले प्रस्ताव के खतरों के बारे में आगाह किया है। परेश नाथ के पत्र की एक प्रति भड़ास4मीडिया के पास है। इसमें परेश नाथ ने बिंदुवार तरीके से समझाया है कि किस तरह आईएनएस को कुछ ताकतवर लोग अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर चुके हैं और कमजोर व छोटे सदस्यों को निपटाने के लिए नई-नई तरकीब इजाद करने में जुटे हैं। परेश नाथ ने पूछा है कि क्या इंडियन न्यूज पेपर सोसायटी सदस्यों के लिए है या सदस्य इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी की दया पर निर्भर हैं? उन्होंने आईएनएस के वर्तमान अध्यक्ष हरमोस जी कामा पर विशेषतौर पर निशाना साधा और उन्हें घेरने का प्रयास किया है। उन्होंने जानना चाहा है कि बिल्डिंग फाइनेंस कमेटी के डिटेल्स को एक्जीक्यूटिव कमेटी के साथ शेयर आखिर क्यों नहीं किया जा रहा है?

आईएनएस के उपाध्यक्ष परेश नाथ द्वारा सभी आईएनएस सदस्यों को लिखा गया पत्र इस प्रकार है-


Dear Member

As Deputy President of INS, it is not customary to write regular letters to members as it may create confusion amongst Executive Committee members. But at this juncture, I am constrained to write this letter as it is important to highlight certain points immediately before the AGM of INS to be held at Hyderabad on 24-9-09.

In brief the contentious points are as follows:

  • To settle personal scores and factional politics, the present committee of INS headed by Shri Hormousji Cama is planning to propose a special resolution which will become a potent weapon in the hands of select powerful to cancel the membership of weak and helpless members.

  • In this resolution, it is being proposed that the responsibility of proving that subscription fee of membership has reached on time lies on the member. This means that if the fee reaches late to INS beacuse of someone else’s mistake, INS will cancel its membership immediately.

  • Upon my enquiry, I discovered that INS had cancelled the membership of one of our senior colleagues under this pretext. The member went to The Delhi High Court and membership has been restored. INS moved the court once again in the Division Bench but was declined relief and now the main matter is sub judice.

  • Look at this! Is INS meant for members or are members at the mercy of INS? Why are members being hounded out like this?

  • Similarly, the Building Finance Committee details are not being shared with The Executive Committee. Why?

  • The President of INS is writing letters to high dignitaries against member publiscations. Why?

The letter is long and to see the details, please read it.

This AGM is decisive and important. Please come to Hyderabad.

With Warm regards

Yours Sincerely

Paresh Nath


इस पत्र के साथ संलग्नक चार पन्नों का विस्तृत खुला पत्र भी इसी पोर्टल पर बहुत जल्द….

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