
आईबीएन7 के यूपी ब्यूरो चीफ शलभ मणि त्रिपाठी के खिलाफ झांसी में रिपोर्ट लिखाए जाने से नाराज करीब डेढ़ सौ पत्रकारों ने लखनऊ स्थित मीडिया सेंटर में बैठक करने के बाद एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव सूचना विजय शंकर पांडेय से मुलाकात की। पत्रकारों ने पहले से तैयार एक ज्ञापन विजय शंकर पांडेय को सौंपा और पूरे मामले के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए शलभ के खिलाफ बनाए गए फर्जी केस को तुरंत वापस लेने और फर्जी केस लिखवाने में जिन वरिष्ठ अफसरों की भूमिका रही, उन्हें दंडित करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल शलभ मणि त्रिपाठी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि शासन में तैनात एक एडीजी स्तर का अधिकारी उनसे निजी खुन्नस रखता है। वजह रीता बहुगुणा के घर आगजनी की घटना का विस्तृत कवरेज करना है। इस कवरेज में दिखाया गया था कि किस तरह कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर स्थानीय पुलिसकर्मी न सिर्फ मूकदर्शक बने रहे बल्कि आग लगाने वालों को सपोर्ट करते रहे। विजय शंकर पांडेय ने पत्रकारों की बात सुनने के बाद उनसे अनुरोध किया कि वे खुद का उत्पीड़न किए जाने की कोई भी बात दिमाग से निकाल दें। किसी भी मीडियाकर्मी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। विजय शंकर पांडेय ने पत्रकारों के सामने ही इस प्रकरण से जुड़े अधिकारियों से बात कर किसी भी तरह कोई दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई न होने देने का निर्देश दिया। पत्रकारों के केस को स्पंज करने की मांग पर विजय शंकर पांडेय ने कहा कि अगर केस गलत दर्ज हुआ है तो जरूर वापस होगा, आप लोग निश्चिंत रहिए। प्रमुख सचिव सूचना से मिलने गए पत्रकारों के नाम इस प्रकार हैं- प्रमोद गोस्वामी, हेमंत तिवारी, हेमंत मैथिल, शरद प्रधान, डा. योगेश मिश्रा, कमाल खान, रुचि कुमार, संजय शर्मा, मनोज राजन और रामदत्त त्रिपाठी।
इससे पूर्व मीडिया सेंटर में हुई बैठक में मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के महासचिव हेमंत तिवारी ने कहा कि शलभ पर लगाए गए फर्जी मुकदमे को वापस कराने के लिए जिस भी स्तर की लड़ाई लड़नी होगी, हम लोग लड़ेंगे। उन्होंने पत्रकारों से खार खाने वाले अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मीडिया के लोगों का किसी भी तरीके से उत्पीड़न हुआ तो पत्रकार अपनी लड़ाई सड़कों पर आकर लड़ेंगे। समिति के अध्यक्ष प्रमोद गोस्वामी ने सभी पत्रकारों से इस मुद्दे पर एकजुट रहने की अपील की।
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