भड़ास4मीडिया के साप्ताहिक कालम हमारा हीरो में इस बार वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह। टीवी और प्रिंट दोनों विधाओं में सिद्धहस्त इस देसज शख्स के भीतर आज भी फैजाबाद के उसी गांव की मिट्टी की महक है जहां उन्होंने जन्म लेने के बाद पहली से लेकर दसवीं तक की पढ़ाई भी की। जौनपुर और बनारस में उच्च शिक्षा के दौरान एक्टीविस्ट के तौर पर भी सक्रिय रहे। बाद में नियति उन्हें खुद ब खुद मीडिया की तरफ खींच लाई। उन्हें आज भी मलाल है कि वे बनना कुछ चाहते थे, बन कुछ गए।
पत्रकारिता में आने को एक दुर्घटना बताने वाले रामकृपाल इन दिनों वायस आफ इंडिया (वीओआई) न्यूज चैनल के सर्वेसर्वा होने के बावजूद अपने निजी जीवन में उतने ही सहज, विनम्र व संवेदनशील हैं जितना वे मीडिया के क्षेत्र में पैर रखते वक्त थे। एक सजग पत्रकार, सरोकार वाला पत्रकार होने के साथ-साथ रामकृपाल एक हार्डकोर प्रोफेशनल भी हैं। तभी तो उन्होंने अपने करियर के 30 वर्षों में से 24 वर्षों की पारी देश के सबसे बड़े मीडिया हाउस टाइम्स ग्रुप के संग खेली।
पत्रकारिता में रामकृपाल जैसे लोग अब गिनती के मिलेंगे जो प्रोफेशनल व एथिकल दोनों साथ-साथ हैं। अब जबकि मार्केट, माल और मालिक के दबाव में बड़े बड़े संपादक संपादकीय नैतिकता और सामाजिक सरोकार को तेल लेने के लिए भेज चुके हैं, रामकृपाल हर हाल में न्यूनतम पक्षधरता होने की बात करते हैं, और इसे अपने चैनल में लागू करने को कटिबद्ध हैं। इसे वो थोड़ी मुश्किल राह तो जरूर मानते हैं पर उनका अपने करियर का अनुभव है कि मुश्किल चीज जब सिरे चढ़ती है तो देर तक रंग जमाती है।
भड़ास4मीडिया के एडीटर यशवंत सिंह से विस्तार से बातचीत के दौरान रामकृपाल ने गांव से शुरुआती पढ़ाई-लिखाई से लेकर बनारस, मुंबई, दिल्ली की यात्राओं और करियर के विभिन्न पड़ावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने वायस आफ इंडिया की दशा-दिशा पर भी रोशनी डाली। अपनी जिंदगी के फलसफे का खुलासा किया। उन सारे सवालों, विवादों के जवाब दिए, जो उनसे या उनके चैनल से जुड़ी हुई हैं।
रामकृपाल की बेबाक बातों से आपको रू-ब-रू कराएंगे इस रविवार को। आपके मन में भी अगर रामकृपाल सिंह को लेकर कोई सवाल हो तो आप उनसे पूछ सकते हैं। बस, [email protected] पर अपने सवाल शनिवार शाम 6 बजे के पहले पहले मेल कर दें। उन समस्त सवालों को रामकृपाल तक पहुंचाया जाएगा और उनके जवाब प्रकाशित किए जाएंगे।











