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संपादक की सनक के शिकार हुए विशु प्रसाद

खबर है कि दैनिक जागरण, रांची के सबसे पुराने संवाददाता विशु प्रसाद को दफ्तर आने से मना कर दिया गया है. उनकी आयु 50 के पार है. सूत्रों का कहना है कि सम्पादकीय प्रभारी संत शरण अवस्थी ने विशु को ज्यादा उम्र होने के कारण काम पर आने से रोक दिया है. सूत्रों के मुताबिक संत शरण ने अपने सात वर्षों के कार्यकाल में कइयों को बिना वजह हटाया है. बी4एम के पास आई एक मेल में कहा गया है- ‘दैनिक जागरण के सात वर्ष के कार्यकाल में 100 से अधिक रिपोर्टर व सब एडिटर इनकी सनक के शिकार हो चुके हैं. दो-तीन ने रांची छोड़ा. शेष सभी जागरण छोड़ चुके हैं. आदमी बड़े ही शातिर हैं. निकालने का बहाना हमेशा काम में लापरवाही होता है. पता नहीं, मालिक सुनील गुप्ता सब जानते हैं या नहीं. लेकिन झारखण्ड का हर अखबारी आदमी सब कुछ जानता है. उन्हें भी याद होगा, विशु वही हैं जिन्हें मालिक के सामने क्रिश्चियन के रूप में पेश किया गया था, जबकि वे हिन्दू हैं,’

खबर है कि दैनिक जागरण, रांची के सबसे पुराने संवाददाता विशु प्रसाद को दफ्तर आने से मना कर दिया गया है. उनकी आयु 50 के पार है. सूत्रों का कहना है कि सम्पादकीय प्रभारी संत शरण अवस्थी ने विशु को ज्यादा उम्र होने के कारण काम पर आने से रोक दिया है. सूत्रों के मुताबिक संत शरण ने अपने सात वर्षों के कार्यकाल में कइयों को बिना वजह हटाया है. बी4एम के पास आई एक मेल में कहा गया है- ‘दैनिक जागरण के सात वर्ष के कार्यकाल में 100 से अधिक रिपोर्टर व सब एडिटर इनकी सनक के शिकार हो चुके हैं. दो-तीन ने रांची छोड़ा. शेष सभी जागरण छोड़ चुके हैं. आदमी बड़े ही शातिर हैं. निकालने का बहाना हमेशा काम में लापरवाही होता है. पता नहीं, मालिक सुनील गुप्ता सब जानते हैं या नहीं. लेकिन झारखण्ड का हर अखबारी आदमी सब कुछ जानता है. उन्हें भी याद होगा, विशु वही हैं जिन्हें मालिक के सामने क्रिश्चियन के रूप में पेश किया गया था, जबकि वे हिन्दू हैं,’

मेल में आगे कहा गया है- ‘जहां तक संत शरण की सनक की बात है तो एक घटना बताता हूं. पिछले दिनों हिन्दुस्तान में बहाली का विज्ञापन निकला था. संवाददाता नीरज ठाकुर व संजीव रंजन ने गलती से अखबार पलट दिया, जिसे अवस्थी जी ने देख लिया. फिर क्या था, हो गयी दोनों की छुट्टी. खैर, कुछ दिनों के बाद काफी आरजू मिन्नतें हुई, पालिश की गई, तब दोनों को जीवनदान मिला. जहां तक उनकी सनक के शिकार हुए लोगों की बात है तो दिमाग पर जोर डाले बिना भी दर्जनों नाम बताये जा सकते हैं. ये इस तरह है… सीपी श्रीवास्तव, अरविन्द शर्मा, पुरुषोत्तम कुमार, रविन्द्र कुमार राकेश, रंजन सिंह, नदीम अख्तर, निराला तिवारी, प्रेम प्रकाश, लोकेश कुमार, शरद कुमार, अखिलेश त्रिपाठी, ओम प्रकाश त्रिपाठी, शालू, परमेन्द्र, अमित कुमार सिंह, सुनील सिंह, प्रभात कुमार सिंह. सुनील पांडे, पंकज मिश्र, उदय चौहान चौहान वकील, राजेश कुमार वकील, राधाकृष्ण विश्वकर्मा उद्भ्रांत, मनोज कुमार, राजेश कुमार, नवीन कृष्ण, संजय कृष्ण, सौरभ कुमार, आशीष कुमार झा, आशीष कुमार, सुमन भारद्वाज, अमिता कन्दुलना, अमिता झा, संगीता कुमारी, मंजरी कुमारी, आनंद सिंह… छायाकार- प्रमोद कुमार, बलवंत कुमार, सुबोध कुमार एवं बाबी.’

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