मार्केटिंग गुरु कहे जाने वाले प्रो. अरिंदम चौधरी का मीडिया प्रोजेक्ट डांवाडोल होता दिख रहा है। तीन साल पहले द संडे इंडियन नाम से 14 भाषाओं में जिस साप्ताहिक मैग्जीनों को धूमधड़ाके के साथ लांच किया गया था, उन मैग्जीनों को आठ महीने पहले पाक्षिक कर दिया गया और अब इन्हें मासिक किए जाने की तैयारी चल रही है। केवल अंग्रेजी मैग्जीन को बख्शा गया है। यह मैग्जीन अब भी वीकली निकल रही है। जाहिर सी बात है, एक वीकली मैग्जीन के मुकाबले एक मासिक मैग्जीन में कम संसाधन, कम स्टाफ और कम खर्च लगता है। तो क्या प्रो. अरिंदम चौधरी भी मंदी की मार के शिकार हो गए हैं या फिर उनका मीडिया के अपने धंधे से मोह भंग होने लगा है?
सूत्र बताते हैं कि अंग्रेजी दां प्रो. अरिंदम चौधरी अंग्रेजी मैग्जीन को छोड़कर अन्य भाषाओं की मैग्जीनों को देर-सबेर बंद कर सकते हैं। इसके पीछे दो प्रमुख वजह हैं। पहला गैर-अंग्रेजी भाषी लोगों व इलाकों में प्रो. अरिंदम चौधरी का धंधा न होना। जिस मैनेजमेंट संस्थान के सहारे अरिंदम खुद को देश-दुनिया का जाना-माना मार्केटिंग गुरु विज्ञापित करते हैं, उस संस्थान में केवल बड़े घरों वाले अंग्रेजी दां बच्चे ही पढ़ने आते हैं। वहां गैर-अंग्रेजी भाषी बच्चों का प्रवेश मुश्किल ही नहीं, असंभव है। दूसरे, गैर-अंग्रेजी भाषी मैग्जीनों के लिए विज्ञापन व बिजनेस की दिक्कतें काफी हैं। इन मैग्जीनों को प्रकाशित करने रहने में खर्च ज्यादा है, लाभ कम। इसलिए भविष्य में केवल अंग्रेजी मैग्जीन को ही बढ़ावा देने और गैर-अंग्रेजी मैग्जीनों के प्रकाशन को हतोत्साहित करने की रणनीति बनाई गई है।
सूत्रों के मुताबिक एडिटोरियल की साप्ताहिक बैठक में मैनेजिंग एडिटर सुतनू गुरु ने सबको बता दिया है कि प्रबंधन मैग्जीनों को मंथली करने की योजना बना रहा है। बिजनेस और मार्केटिंग पर केंद्रित मैग्जीन 4पीएस को भी मंथली किया जा रहा है। मैग्जीनों को साप्ताहिक से पाक्षिक और अब मासिक किए जाने के कारण प्रबंधन कम से कम स्टाफ में काम चलाने को कह रहा है। इस अघोषित दबाव के कारण कई वरिष्ठ लोग खुद ब खुद दूसरी जगहों पर मौका मिलते ही द संडे इंडियन और प्रो. अरिंदम चौधरी को बाय बोल दे रहे हैं। पिछले छह महीनों में करीब दर्जन भर से ज्यादा लोगों ने मार्केटिंग गुरु से मुक्ति पाई है। हाल फिलहाल जिन लोगों ने छोड़ा है, उनमें प्रमुख नाम हैं- गंगेश मिश्रा, विमलेंदु कुमार सिंह और रंजीत भूषण। गंगेश पहले चौथी दुनिया गए फिर दैनिक भास्कर ज्वाइन कर लिया। विमलेंदु ने चौथी दुनिया ज्वाइन किया। रंजीत भूषण जो द संडे इंडियन में एक्जीक्यूटिव एडिटर पद पर कार्यरत थे, अब उन्होंने दिल्ली में ही बिजनेस क्रानिकल अखबार में ज्वाइन कर लिया है।











