Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

हिंदी आउटलुक हर हफ्ते की बजाय अब हर महीने !

हिंदी की मशहूर मैग्जीन आउटलुक के साप्ताहिक की बजाय मासिक होने की चर्चा गरम है। लंबे समय से इसके संपादक रहे आलोक महेता के नई दुनिया चले जाने के बाद नीलाभ को इस पत्रिका का संपादक बनाया गया है। पिछले दिनों इस मैग्जीन के दो बड़े स्तंभ विनोद अग्निहोत्री और भाषा सिंह भी आलोक मेहता की टीम के साथ हो लिए। इस मैग्जीन की टीम पहले से ही छोटी थी और इनके जाने के बाद अब नाम मात्र के लोग रह गए हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन इस मैग्जीन को लेकर अब बहुत उत्साहित नहीं है। अंग्रेजी में आउटलुक का कंटेंट व कारोबार ठीकठाक चल रहा है जबकि हिंदी में मैग्जीन हर हफ्ते घट चुकी घटनाओं, सूचनाओं को ही परोसती है। इसमें बड़ी खबरों और ब्रेकिंग खबरों का अभाव सा रहता है। अब इस मैग्जीन में नयापन लाने की चुनौती नीलाभ पर आन पड़ी है।

हिंदी की मशहूर मैग्जीन आउटलुक के साप्ताहिक की बजाय मासिक होने की चर्चा गरम है। लंबे समय से इसके संपादक रहे आलोक महेता के नई दुनिया चले जाने के बाद नीलाभ को इस पत्रिका का संपादक बनाया गया है। पिछले दिनों इस मैग्जीन के दो बड़े स्तंभ विनोद अग्निहोत्री और भाषा सिंह भी आलोक मेहता की टीम के साथ हो लिए। इस मैग्जीन की टीम पहले से ही छोटी थी और इनके जाने के बाद अब नाम मात्र के लोग रह गए हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन इस मैग्जीन को लेकर अब बहुत उत्साहित नहीं है। अंग्रेजी में आउटलुक का कंटेंट व कारोबार ठीकठाक चल रहा है जबकि हिंदी में मैग्जीन हर हफ्ते घट चुकी घटनाओं, सूचनाओं को ही परोसती है। इसमें बड़ी खबरों और ब्रेकिंग खबरों का अभाव सा रहता है। अब इस मैग्जीन में नयापन लाने की चुनौती नीलाभ पर आन पड़ी है।

भड़ास4मीडिया ने इस बारे में आउटलुक हिंदी के संपादक नीलाभ से संपर्क कायम किया। फोन पर संक्षिप्त बातचीत में नीलाभ ने मैग्जीन के साप्ताहिक से मासिक होने की चर्चा पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि मैग्जीन इस हफ्ते निकल रही है और अगले हफ्ते भी निकलेगी। इसके बाद क्या होगा, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। उधर, जानकारों का कहना है कि हिंदी आउटलुक की टीम छोटी होने और इसमें बड़ी खबरों, ब्रेकिंग स्टोरीज का अभाव होने से धीरे धीरे इसका आकर्षण घटता जा रहा है। बिजनेस के लिहाज से भी यह अंग्रेजी के मुकाबले काफी नीचे है। ऐसे में प्रबंधन हिंदी आउटलुक के खर्चे कम करने की कवायद कर रहा है। इससे एक छोटी टीम बड़ी आसानी से हर महीने मैग्जीन को अच्छी खबरों के साथ निकाल सकेगी। फिलहाल तो ये चर्चा भर है, देखते हैं इसमें कितना दम है।

 

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...