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आइए, इस साहसिक पहल को सलाम करें

किसी भी तरह के चुनावी विज्ञापन के साथ विज्ञापन शब्द लिखने का फैसला : झारखंड का सर्वाधिक प्रसारित हिंदी दैनिक ‘प्रभात खबर’ ने पत्रकारिता के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व प्रयोग किया है. झारखंड में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के ठीक बाद हर बार की तरह इस बार भी प्रभात खबर की तरफ से अखबार में खुद की चुनावी आचार संहिता और विज्ञापन नीति की घोषणा की गई है पर इस बार सबसे खास बात यह है कि प्रभात खबर ने चुनावी विज्ञापनों के साथ ‘विज्ञापन’ शब्द स्पष्ट तौर पर छापने का ऐलान कर दिया है। प्रत्याशियों के साथ पैकेज डील करने और खबरों के नाम पर धंधा करने के इस भीषण दौर में इस कदर हिम्मत का काम करने वाले प्रभात खबर और उसके नेतृत्व को सलाम किया जाना चाहिए। प्रभात खबर ने साफ बता दिया है कि वह अपने पाठकों के साथ किसी प्रकार का धोखा नहीं करेगा।

किसी भी तरह के चुनावी विज्ञापन के साथ विज्ञापन शब्द लिखने का फैसला : झारखंड का सर्वाधिक प्रसारित हिंदी दैनिक ‘प्रभात खबर’ ने पत्रकारिता के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व प्रयोग किया है. झारखंड में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के ठीक बाद हर बार की तरह इस बार भी प्रभात खबर की तरफ से अखबार में खुद की चुनावी आचार संहिता और विज्ञापन नीति की घोषणा की गई है पर इस बार सबसे खास बात यह है कि प्रभात खबर ने चुनावी विज्ञापनों के साथ ‘विज्ञापन’ शब्द स्पष्ट तौर पर छापने का ऐलान कर दिया है। प्रत्याशियों के साथ पैकेज डील करने और खबरों के नाम पर धंधा करने के इस भीषण दौर में इस कदर हिम्मत का काम करने वाले प्रभात खबर और उसके नेतृत्व को सलाम किया जाना चाहिए। प्रभात खबर ने साफ बता दिया है कि वह अपने पाठकों के साथ किसी प्रकार का धोखा नहीं करेगा।

वह उनके विश्वास का कत्ल नहीं करेगा, भले ही बिजनेस कम हो, भले ही विज्ञापन कम मिले, भले ही टर्नओवर कम रहे। प्रभात खबर के नेतृत्व ने ऐसा कदम अपने पाठकों की शिकायत के बाद उठाया है। पैसे के लिए मरे जा रहे दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, दैनिक हिंदुस्तान जैसे बड़े अखबारों के मालिकों व संपादकों को झारखंड के नंबर एक अखबार ‘प्रभात खबर’ से सबक लेना चाहिए और अतीत की गलतियों के लिए अपने पाठकों से माफी मांगते हुए प्रायश्चित भी करने के बारे में सोचना चाहिए।  झारखंड विधानसभा चुनाव में प्रभात खबर ने अपनी विज्ञापन नीति के बारे में जानकारी देते हुए जो सार्वजनिक घोषणा की है, वह पत्रकारिता जगत के लिए वाकई अहम है। ज्ञात हो कि प्रभात खबर के कई पाठकों का कहना था कि ‘मीडिया इनीशिएटिव’ जैसे शब्दों से कनफ्यूजन पैदा होता है। विगत लोकसभा चुनाव के दौरान कुछ पाठकों ने प्रभात खबर से यह शिकायत की थी कि जब किसी नेता या पार्टी का विज्ञापन छापें तो उसे ‘मार्केटिंग’ या ‘मीडिया इनीशियेटिव’ या अन्य कोई भी शब्द प्रयोग करने की बजाय सीधे ‘विज्ञापन’ लिखें। पाठकों व नागरिकों ने यह भी कहा था कि विज्ञापन के साथ ‘विज्ञापन’ शब्द प्रकाशित किए जाने की उम्मीद कम से कम प्रभात खबर से तो की ही जानी चाहिए।

प्रभात खबर के नेतृत्व ने पाठकों की प्रतिक्रियाओं को पूरी गंभीरता से लेते हुए इस बार स्पष्ट कर दिया है कि विज्ञापन चाहे जिस रूप में हो, उसके साथ ‘विज्ञापन’ स्पष्ट शब्दों में लिखा रहेगा। 31 अक्तूबर के प्रभात खबर के अंक में प्रभात खबर की चुनावी आचार संहिता व विज्ञापन नीति प्रकाशित किए जाने के साथ ही चुनाव कैंपेन की शुरुआत भी कर दी गई। प्रभात खबर ने चुनाव के बारे में विस्तृत व छोटी-छोटी जानकारियों को समेटते हुए एक विशेष पृष्ठ दिया है। बाकी सभी पृष्ठों पर भी लोकतंत्र और चुनाव से संबंधित विश्वविख्यात हस्तियों के उद्धरणों को दिया गया है।

31 अक्तूबर 2009 को प्रकाशित अखबार कई मायने में ऐतिहासिक व रेखांकित करने योग्य है। झारखंड में चुनावी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं, सो जाहिर है कि अखबार में चुनाव से संबंधित रोजमर्रा की खबरें थी हीं, साथ ही पांच खास पृष्ठ भी दिए गए। इनमें चार पन्ने अतीत को समर्पित थे। एक पृष्ठ प्रभात खबर की ओर से किये गये आह्वान और चुनाव के दौरान घोषित अपनी नीतियों से संबंधित थे। प्रभात खबर ने ‘जगे झारखंड-बदले झारखंड’ नाम से इलेक्शन कैंपेन की शुरुआत करते हुए यह स्पष्ट किया कि चुनावी कवरेज के लिए प्रभात खबर ने अखबार और अपने साथियों के लिए एक आचार संहिता तैयार किया है। इस आचार संहिता को सार्वजनिक तौर पर प्रकाशित किया गया और लोगों से अपील की गयी कि यदि इस बिंदु से इतर प्रभात खबर के साथी कुछ कर रहे हों या आपकी कोई शिकायत हो, तो संबंधित संस्करण के वरिष्ठ सहयोगियों से सीधे फोन पर संपर्क कर शिकायत करें। इसके लिए संबंधित संस्करणों के वरिष्ठ सहयोगियों के फोन नंबर भी दिये गये हैं। 31 अक्तूबर के अंक में प्रभात खबर ने पहले पन्ने के एंकर स्टोरी में जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर परमाणु पुरुष डॉ. होमी जहांगीर भाभा को याद किया है। तीन और विशेष पन्ने जो दिये गये हैं वे सरदार वल्लभ भाई पटेल (जयंती के मौके पर), आचार्य नरेंद्र देव (जयंती के मौके पर) और इंदिरा गांधी (25वीं पुण्यतिथि के मौके पर) से संबंधित हैं। साथ ही कई विशेष पन्ने सिख विरोधी दंगे के 25 वर्ष पूरे होने पर भी दिये गये हैं।

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