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दुख-दर्द

यूपी के पत्रकारों पर हावी हुए पुलिस-प्रशासन वाले

यूपी में मीडिया वालों का बुरा हाल है। कई जिलों से मीडिया वालों के उत्पीड़न की खबरें आ रही है। इस पर आज जनसत्ता में लखनऊ के संवाददाता अंबरीश कुमार ने विस्तृत रिपोर्ट लिखी है। उसे साभार यहां प्रकाशित किया जा रहा है-  

यूपी में मीडिया वालों का बुरा हाल है। कई जिलों से मीडिया वालों के उत्पीड़न की खबरें आ रही है। इस पर आज जनसत्ता में लखनऊ के संवाददाता अंबरीश कुमार ने विस्तृत रिपोर्ट लिखी है। उसे साभार यहां प्रकाशित किया जा रहा है-  

लखीमपुर के पत्रकार बरकत अली अंसारी को आज जेल भेज दिया गया तो गोंडा में ‘अमर उजाला’ के संवाददाता सरदार राजेन्द्र सिंह पिछले कई दिनों से फरार हैं। इटावा में ‘नई दुनिया’ के संवाददाता नीरज मेहरे के खिलाफ शातिर बदमाशों पर लगाई जने वाली धारा सेवन क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट लगाकर गिरफ्तार करने की तैयारी है। वजह, उन्होंने पुलिस के पैसे के खेल को कैमरे में कैद करने का जुर्म किया था। उत्तर प्रदेश में मीडिया किस तरह शासन-प्रशासन के निशाने पर है, इसकी यह एक बानगी है।

उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने की लंबी श्रंखला है। कभी वन्य जीव अधिनियम के तहत समीउद्दीन नीलू के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर जेल भेज दिया जता है तो कभी बुजुर्ग पत्रकार मेहरूद्दीन खान को लड़की भगाने जसे हास्यास्पद आरोप में जेल में डाल दिया जता है। पुलिस के कुछ अफसर इस काम में सिद्धहस्त हैं। इनमें गोंडा की पुलिस अधीक्षक एन पदमजा का नाम सबसे ऊपर है। जब वे लखीमपुर में थीं तो एक पत्रकार को जेल भिजवाया था और अब वे गोंडा में हैं तो वहां दूसरा पत्रकार फरार है।

शुरुआत लखीमपुर से। लखीमपुर संवाददाता के मुताबिक यहां पुलिस प्रशासन व वन विभाग के अधिकारियों ने मिलकर एक पत्रकार पर धारा 389, 26/ 41/49, 419, 420, 467, 468 के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। जिले में पत्रकार को जेल भेजने की यह दूसरी बड़ी घटना है। लखनऊ से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र ‘वायस आफ लखनऊ’ के संवाददाता बरकत अली अंसारी ने पिछले दिनों अपने अखबार में दक्षिणी प्रभागीय वनाधिकारी आरसी झा व उनके गोला वन रेंजर केपी सिंह, एके श्रीवास्तव से जुड़े सरकारी जंगलों के अवैध वन कटान के कई समाचार प्रकाशित किये थे। इसके बाद अफसरों ने मीडिया पर अंकुश लगाने के लिए पत्रकार बरकत अली के खिलाफ फर्जीवाड़ा और जालसाजी के साथ वन्य जीव अपराध से संबंधित गैर जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। पत्रकार बरकत अली जब अपने घर पर सो रहे थे तो रात दो बजे मैलानी के थानाध्यक्ष हेमन्त गौड़ व उनकी पुलिस ने वन रेंजर मैलानी एके श्रीवास्तव, वन रेंजर गोला केपी सिंह के साथ छापा मारा। इन लोगों ने गालियां देते हुए पत्रकार को जान से मारने की धमकी दी। पुलिस बरकत अली को पकड़ कर मैलानी थाने में ले आई। इसके बाद वहां पर तैनात दरोगा श्याम लाल व आरएस यादव ने थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया। उन्होंने बरकत अली से कहा कि समाचार छापोगे तो इस बार जेल जा रहे हो तो अगली बार तुम्हारा इनकाउंटर होगा। बरकत अली जिस वायस आफ लखनऊ के लिए काम करते हैं, उसके मालिक प्रदेश में सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के महासचिव अखिलेश दास हैं।

इटावा से नीरज मेहरे ने अपने खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज किए जने का ब्योरा देते हुए कहा- ‘रविवार रात हमें जनकारी मिली कि पुलिस वाले चुनाव के नाम पर वाहन जब्त कर रहे हैं और जो पैसा दे दे रहा है, उसकी गाड़ियां छोड़ दे रहे हैं। यह जानकारी मिलने के बाद मैं मौके पर गया और एक टीवी चैनल के लिए इस दृश्य को कैमरे में कैद करने लगा। तभी एक पुलिस वाले की नजर पड़ी और उसने मेरा कैमरा छीन कर हाथापाई की। बाद में कैमरे से रील निकाल दी और थाने में मेरे खिलाफ धारा 332, 352, 353, 506 के साथ-साथ सेवन क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया।’

गोंडा के संवाददाता के मुताबिक पत्रकार सरदार राजेन्द्र सिंह का सरकारी अफसरों से सवाल पूछना महंगा पड़ गया। नवाबगंज कस्बे के दो मोहल्लों में जब बाढ़ का पानी आ गया तो उस समय सैम्पलिंग पर निकले अफसरों से उन्होंने इसका औचित्य पूछ लिया। राजेन्द्र सिंह ने कहा था कि जिलाधिकारी स्वयंसेवी संस्थाओं व सामाजिक संगठनों से आगे आकर सहयोग की अपील कर रहे हैं, ऐसे में आप लोगों को छापामारी करके सैम्पल भरने के लिए पूरे जिले में नवाबगंज कस्बा ही बचा था। इसके बाद उन्होंने सूचनाएं प्राप्त कीं और चले गए। इस बीच जब टीम सैम्पल भरके वापस लौटने लगी तो कुछ लोगों ने टीम को दौड़ा लिया और गाड़ी पर पथराव करके शीशे तोड़ दिए व सैम्पल के नमूने छीन लिए। इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट अगले दिन अमर उजाला समेत जनपद के समस्त समाचार पत्रों में फोटो के साथ छपी। उसी दिन रात में जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य खाद्य निरीक्षक बीके वर्मा ने नाबगंज थाने में मुकदमा अपराध संख्या 469/2009 अन्तर्गत धारा 143, 353, 352, 336, 427, 506 आईपीसी 3/4 लोक सम्पत्ति क्षति निवारण अधि़ 7 क्रिमिनल अमेण्डमेंड एक्ट के तहत दर्ज कराया गया। इसमें पत्रकार राजेंद्र सिंह समेत पांच नामजद व दर्जनों अज्ञात लोगों को अभियुक्त बनाया गया है।

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