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दुख-दर्द

ताकि फिर कोई होनहार शशि यूं ही न मर जाए

[caption id="attachment_16258" align="alignleft"]शशि भूषणशशि भूषण[/caption]संस्कृतिकर्मियों ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से मांगा शशि भूषण की मौत का हिसाब : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के प्रथम वर्ष के छात्र शशि भूषण, जिनकी मौत पिछले 4 नवंबर को नोएडा के एनएमसी अस्पताल में डेंगू के कारण हुई, की याद में उसके दोस्तों ने ललित कला अकादमी के कौस्तुभ सभागार में शोकसभा का आयोजन किया। शोकसभा में शशि भूषण से जुड़े संस्कृतिकर्मियों और पत्रकारों ने हिस्सेदारी की।

शशि भूषणसंस्कृतिकर्मियों ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से मांगा शशि भूषण की मौत का हिसाब : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के प्रथम वर्ष के छात्र शशि भूषण, जिनकी मौत पिछले 4 नवंबर को नोएडा के एनएमसी अस्पताल में डेंगू के कारण हुई, की याद में उसके दोस्तों ने ललित कला अकादमी के कौस्तुभ सभागार में शोकसभा का आयोजन किया। शोकसभा में शशि भूषण से जुड़े संस्कृतिकर्मियों और पत्रकारों ने हिस्सेदारी की।

शशि भूषण ने अपने बाल्यावस्था से ही पटना में रंगकर्म की शुरुआत की। उम्र के तीसरे दशक में दस्तक दे रहे शशि का रंगमंचीय करियर 22 सालों का रहा। उन्होंने निर्देशक, अभिनेता और थियेटर म्यूजिक के क्षेत्र में जमकर काम किया और वह देशभर में इसके लिए जाने गए। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय आने के पहले उन्होंने बंगाल में उषा गांगुली के साथ एक वर्ष तक काम किया और उन्होंने गोवा नाट्य एकेडमी से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया था। वामपंथी सांस्कृतिक संगठन ‘हिरावल’ से अपने रंगमंच के करियर की शुरुआत करने वाले शशि आजीवन जन संस्कृति की सच्ची मशाल थामे रहे।

शोक सभा में उनके बचपन से उन्हें जानने वाले संस्कृतिकर्मी और हिंदी समालोचक सुधीर सुमन ने कहा कि शशि जैसे लोग जो बिना किसी पारिवारिक बैकग्रांउड से आते हैं, और अपनी पहचान बनाने में जुटे रहते हैं, अक्सर व्यवस्था की छलनाओं के शिकार हो जाते हैं। हमें यह तय करना होगा कि उसकी मौत का जिम्मेदार कौन है? डेंगू जैसी एक मामूली बीमारी के कारण उसकी मौत हो जाती है तो इसमें अस्पताल की भूमिका भी संदेह के घेरे में आती है। अस्पताल से इलाज में लापरवाही हुई है जो मेडिकल रिपोर्ट में भी साफ दिखती है। इसलिए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय को चाहिए कि वह अस्पताल के सामने इस मुद्दे को उठाए और अगर वे लोग नहीं उठाते हैं तो हम जो शशि के दोस्त हैं, इस मुद्दे को उठाएंगे।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्राध्यापक सुरेश शेट्टी ने उनकी मौत को सबके लिए सदमा बताते हुए कहा कि इस मामले में अस्पताल की लापरवाही साफ नजर आती है और एनएसडी ने इसकी जांच के लिए एक कमेटी गठित की है, जिसमें एनएसडी के छात्र, कर्मचारी, प्राध्यापक और डॉक्टर शामिल हैं।

शशि के साथ पिछले पंद्रह वर्षों से जुड़कर काम करने वाले एनएसडी स्नातक विजय कुमार ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह एनएसडी की डिग्री भी ठुकराने से नहीं हिचकेंगे, अगर स्कूल ने मामले को सही तरीके से नहीं उठाया। उन्होंने नोएडा मेडिकेयर सेंटर `एनएमसी` हॉस्पिटल के बारे में कहा कि जो अस्पताल किडनी रैकेट और दूसरे कई संगीन आरोपों में फंसा है उनसे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का संपर्क क्यूं है, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि सारी बातें साफ होनी चाहिए नहीं तो कल एनएसडी के किसी और छात्र की भी जान जा सकती है। शोकसभा में शशि से जुड़े कई लोगों ने शशि और उसके परिवार वालों को न्याय दिलाने की बात रखी। शोकसभा का संचालन मृत्युंजय प्रभाकर ने किया।     

 

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