अभी-अभी खबर मिली है कि शिव सेना के दर्जनों उत्पातियों ने मुंबई में हिंदी न्यूज चैनल ‘आईबीएन7’ और मराठी न्यूज चैनल ‘आईबीएन लोकमत’ के आफिस पर हमला बोल दिया है। आईबीएन नेटवर्क के इन दोनों चैनलों के मीडियाकर्मियों को शिव सैनिकों मारा-पीटा और कपड़े तक फाड़ डाले। आईबीएन आफिस के सामान और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया। इन शिव सैनिकों ने आईबीएन के मीडियाकर्मियों को शिव सेना को लेकर निगेटिव रिपोर्टिंग न करने की चेतावनी दे डाली। बताया जा रहा है कि शिव सेना के इस तांडव से ‘आईबीएन7’ और ‘आईबीएन लोकमत’ के मुंबई आफिस का कामकाज कई घंटे ठह रहा। मीडिया के घर में घुसकर शिव सेना के लोगों द्वारा किए गए इस तांडव से मुंबई समेत पूरा देश स्तब्ध है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण ने शिव सेना के इस हमले की निंदा की है।
अभी तक उत्तर भारतीयों को मुंबई में निशाना बनाने वाली शिव सेना ने एक प्रमुख मीडिया संस्थान पर हमला कर संकेत दे दिया है कि वह अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है। चौथे स्तंभ को निशाना बनाना और निगेटिव रिपोर्टिंग न करने की चेतावनी देना स्पष्ट करता है कि शिव सेना खोई हुई सत्ता को हासिल करने के लिए और चुनावों में पराजय से पैदा हुई निराशा को खत्म करने के लिए एक बार फिर अपने फासीवादी एजेंडे पर चल पड़ी है। शिव सेना के राज और उद्धव, दो ठाकरे परिवारों में बंट जाने से दोनों के बीच अब होड़ सी लग गई है खुद को हिंदी विरोधी और महाराष्ट्र प्रेमी दिखाने की। इसी एजेंडे के तहत राज ठाकरे के लोगों ने हिंदी में शपथ लेने पर अबू आजमी को विधानसभा में थप्पड़ रसीद किया था। इस कृत्य की जब देश भर में आलोचना हुई। इसके बाद शिव सेना वालों ने सचिन को निशाने पर लेकर मराठी कार्ड खेला। शिव सेना के इस रवैए की इलेक्ट्रानिक मीडिया ने जमकर आलोचना की। लगता है, उसी का हिसाब करने के उद्देश्य से आईबीएन7 के मुंबई आफिस पर हमला किया गया। यह हमला किसी एक न्यूज चैनल के आफिस पर नहीं बल्कि पूरी मीडिया, खासकर इलेक्ट्रानिक मीडिया पर है।











