उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में आला अधिकारी और प्रमुख अखबार के पत्रकार बन गए शंकर भगवान के बाराती. बात यूं है कि बाराबंकी के जिलाधिकारी छुट्टी पर गए और पूरे जिले की गाड़ी चलाने का बोझ दो कंधो पर डाल गए. जिलाधिकारी काम से काम रखने वाले व्यक्ति हैं. उनके जाते ही लम्बे समय से दोस्ती में कुछ कर गुजरने का संकल्प लिए बैठे जिले के दो बड़े अधिकारियों के साथ दोस्तों की टीम जा पहुची पांडव कालीन महादेव के मेले में. मेले में नृत्य का प्रोग्राम शुरू होते ही दोस्तों ने माहौल रंगीन करने की इच्छा जताई. दोस्तों का कुछ दोस्तों ने इशारा समझा. पास के एक भट्टा मालिक ने भट्टे पर ही पूरी मधुशाला खोल दी. जब साथ में प्रमुख अखबार के पत्रकार हों और जिलाधिकारी छुट्टी पर हों तो शेष अधिकारियों को डर कैसा. सो पीने पिलाने में सारे बांध टूट गए.
भट्टे के लेबरों ने भी साहब के साथ अपने अस्तित्व को पाकर खुद को धन्य समझा. सबने खूब पी. फिर किसी को याद आया कि नृत्य का प्रोग्राम देखा जाए. सारी गाड़िया जा पहुंची मेला पंडाल. अपने आला अधिकारियों को इस हाल में देख कर छोटे कर्मचारी मेले से चलते बने. वहीं प्रमुख अखबार के संवाद सूत्र सेवक बन गए. पंडाल में अब शुरू हुआ दारू के बाद का खेल. मेले में आये भक्तों से अभद्रता और मारपीट की गयी. मेले में मौजूद पुलिस वालों ने साहब और पत्रकार जी के बहुत हाथ जोड़े पर किसी ने एक न सुनी. हारकर पुलिस अधीक्षक से इस ड्रामे की शिकायत की गयी.
पुलिस अधीक्षक ने फ़ोन से इन लोगों से गुहार लगाई पर किसी ने एक न सुनी. हारकर इसकी सूचना लखनऊ में बैठे उच्च अधिकारियों की दी गई और इस मामले में सलाह ली गयी. शासन ने इस मामले की इंटेलीजेंस रिपोर्ट तलब कर ली. जिलाधिकारी की गैर मौजूदगी में इस पूरे मामले की रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक ने शासन को भेज दी. इस बात की खबर दारूबाज अधिकारियों और पत्रकार बंधु को भी लगी. उस दिन से पत्रकार महोदय ने अपने चार पेज के अधिकांश हिस्से को पुलिस अधीक्षक के खिलाफ रंगना शुरू कर दिया. बाकी सारे पत्रकारों ने धार्मिक स्थल पर इस हरकत की कड़ी आलोचना की और पुलिस अधीक्षक का साथ देने का फैसला किया. अभी हाल में इन्हीं पत्रकार महोदय का नाम आपराधिक गतिविधियियो में आरोपित और जेल भेजे गए एक सिपाही के साथ भी जुड़ा था.
अब पुलिस अधीक्षक महोदय के समझ में नहीं आ रहा है कि इस मामले से कैसे निपटें क्योंकि इस बार पत्रकार के साथ जिले के अधिकारी भी मामले में फस रहे हैं. हालांकि मेले में श्रद्धालुओं ने यही कहा “सब शंकर जी के बाराती बने हैं लेकिन बात यही है कि गलत मौके पर सो शंकर जी दें न दें, बहिन जी से कुछ आशीर्वाद अवश्य मिलेगा.”











