लगता है इस बार प्रसार भारती और दूरदर्शन निजी न्यूज चैनलों के मालिकों की अंटी से पैसे ढीले कराके ही मानेंगे। दूरदर्शन ने जिस बीजिंग ओलंपिक 2008 के एक्सक्लूसिव प्रसारण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, निजी न्यूज चैनलों ने बिना एक दमड़ी खर्च किए ही अपने यहां ओलंपिक फुटेज का प्रसारण दूरदर्शन से चोरी करके दिखा दिया। इससे नाराज प्रसार भारती ने पिछले दिनों निजी न्यूज चैनलों को नोटिस भेजा था। अब इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए दूरदर्शन ने हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर ली है और अवैध प्रसारण के लिए निजी न्यूज चैनलों से करोड़ों रुपये का जुर्माना लेने की ठान ली है। डीडी स्पोर्ट्स के बीजिंग ओलंपिक के लाइव टेलीकास्ट को पिछले कई दिनों से निजी न्यूज चैनल अपने यहां प्रसारित कर रहे हैं। दूरदर्शन इसे ओलंपिक फीड का मिसयूज मानता हैं।
खासकर भारतीय खिलाड़ी जिन खेलों में रहे हैं, जीते हैं, उसका प्रसारण सभी न्यूज चैनलों ने अपने अपने यहां कई कई घंटे किया है। दूरदर्शन का कहना है कि ओलंपिक खेलों के भारत में प्रसारण का सिर्फ उसी के पास एक्सक्लूसिव राइट है और इसके लिए उसने काफी रकम खर्च किया हुआ है। अगर निजी न्यूज चैनलों को इन फुटेज का अपने यहां प्रसारण करना था तो उन्हें दूरदर्शन के साथ समझौता करना चाहिए था। पर किसी न्यूज चैनल ने ऐसा नहीं किया।
खबर है कि दूरदर्शन के अधिकारी इस सोमवार को हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर निजी न्यूज चैनलों से जुर्माने की मांग करेंगे। प्रसार भारती में फुटेज बिक्री के लिए जो दर है उसके मुताबिक निजी न्यूज चैनल दूरदर्शन को 10 सेकेंड के लिए 5000 रुपये के हिसाब से भुगतान करके ही फुटेज का प्रसारण कर सकते हैं।
उधर, एक अन्य घटनाक्रम के अनुसार प्रसार भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट से पहले ही एक आदेश हासिल कर लिया है जिसमें कोर्ट ने सभी निजी न्यूज चैनलों से कहा है कि वो दूरदर्शन के एक्सक्लूसिव कवरेज में हिस्सेदारी के लिए दूरदर्शन को भुगतान करें। हाईकोर्ट का कहना है कि कापीराइट कानून के मुताबिक कोई भी न्यूज चैनल 10 सेकेंड से ज्यादा किसी दूसरे चैनल का कोई भी एक्सक्लूसिव फुटेज नहीं दिखा सकता। दूरदर्शन के अधिकारियों की मानें तो कई न्यूज चैनलों ने कई कई घंटे तक दूरदर्शन के एक्सक्लूसिव फुटेज का अपने यहां अवैध तरीके से प्रसारण किया है और इसे अगर रुपये में कैलकुलेट करें तो यह कई करोड़ रुपये होगा।
लगता है, बिना दाम दिए नाम-नामा कमाने का चक्कर निजी न्यूज चैनलों को महंगा पड़ेगा। हो सकता है इनके मालिकों को अपनी अंटी से ढेर सारे पैसे ढीले करने पड़ जाएं, तब जाकर अबकी जान बचे।











