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9 पत्रकारों ने कहा- यूपीएसएसीसी चुनाव रद करो

उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यताप्राप्त संवाददाता समिति (यूपीएसएसीसी) के नए चुनाव हुए अभी 24 घंटे भी नहीं बीते कि इस चुनाव पर एक बड़ा विवाद शुरू हो गया है. जिन 11 पत्रकारों को रविवार को मतदान करने से रोका गया था, उनमें से 9 पत्रकारों ने मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव सूचना को पत्र लिखकर इस चुनाव को रद करने की मांग की है.

उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यताप्राप्त संवाददाता समिति (यूपीएसएसीसी) के नए चुनाव हुए अभी 24 घंटे भी नहीं बीते कि इस चुनाव पर एक बड़ा विवाद शुरू हो गया है. जिन 11 पत्रकारों को रविवार को मतदान करने से रोका गया था, उनमें से 9 पत्रकारों ने मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव सूचना को पत्र लिखकर इस चुनाव को रद करने की मांग की है.

चुनाव शुरू होने से पहले वाली शनिवार की रात पत्रकार संजय शर्मा ने निर्वाचन अधिकारी जेपी शुक्ल के निवास पर जाकर एक पत्र सौंपा था. इसमें कहा गया था कि साजिशन कुछ लोगों को वोट डालने से रोकने की प्लानिंग की जा रही है. ऐसी ही शिकायत कुछ प्रत्याशियों ने लिखित एवं मौखिक रूप से श्री शुक्ल से की थी. भड़ास4मीडिया ने शनिवार को ही ये पत्र प्रकाशित कर दिया था.

चुनाव के दौरान विवाद तब शुरू हो गया जब कुछ मान्यता प्राप्त पत्रकारों ने वोट डालना चाहा तो उन्हें ये कह कर रोक दिया गया कि 15 दिसम्बर की सूची से ही चुनाव कराया जा रहा है, जिन पत्रकारों की मान्यता बाद में हुई है, उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं दिया जायेगा. इस पर पत्रकारों ने विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि 15 दिसम्बर की सूची में अनुराग त्रिपाठी के नाम के आगे लिखा है की कार्ड बनने की प्रक्रिया में है. इस प्रकार वो सभी लोग 15 दिसम्बर के पहले मान्यता के लिए आवेदन कर चुके थे. अतः नियमानुसार वो भी मान्यता के अधिकारी हैं क्योंकि अनुराग त्रिपाठी को तो चुनाव लड़ने की अनुमति तक दे दी गयी थी. ये विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया कि दो युवा पत्रकारों और बीबीसी के संवाददाता रामदत त्रिपाठी के बीच मारपीट तक की नौबत आ गयी थी.

नतीजे के ऐलान के बाद वीक एंड टाइम के संपादक संजय शर्मा ने प्रमुख सचिव सूचना एवं सूचना निदेशक को पत्र भेजा, उन्होंने  भड़ास4मीडिया की कटिंग भी पत्र के साथ संलग्न की है. इसमें बताया गया है कि चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं देकर उनके अधिकारों का हनन किया गया है, इसलिए ये चुनाव अलोकतांत्रिक है और इसे रद किया जाना चाहिए.

उधर 9 मान्यता प्राप्त पत्रकारों, जिन्हें वोट नहीं डालने दिया गया, उन्होंने भी प्रमुख सचिव सूचना एवं निदेशक को पत्र लिखकर मांग की है कि उन्हें वोट डालने का अधिकार दिया जाए और जब उनके वोट पड़ जाएं, तभी नयी समिति को मंजूरी दी जाए. इस पर दस्तखत करने वालों में ईटीवी के शरद तिवारी, गुलज़ार अहमद, जी न्यूज़ के अवनीश विद्यार्थी, मनोज मिश्र, वीओआई के अनुराग शुक्ल, आज़ाद न्यूज़ के रमेश भट्ट, पी7न्यूज के जितेश अवस्थी, वीओआई के दिनेश यादव और वीक एंड टाइम के संपादक संजय शर्मा शामिल हैं

इस चुनाव के बाद पत्रकार दो धड़े में बंट गए हैं. इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों का कहना है कि लम्बे समय से उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है. अब ये तबका इस बात पर विचार कर रहा है कि वो खुद को इस समिति से अलग करके अपनी नयी समिति का गठन कर लें क्योंकि प्रिंट और दूसरे संवर्ग के पत्रकारों ने हाथ मिला कर इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रत्याशियों को हराया है. इस बात को लेकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया बिरादरी में जबरदस्त असंतोष देखा जा रहा है.

संजय शर्मा द्वारा भेजा गया पत्र इस प्रकार है–

संजय शर्मा द्वारा भेजा गया पत्र

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