सहारा में कई तरह के बदलाव की खबरें हैं. संजीव श्रीवास्तव और उपेंद्र राय की जोड़ी कई नए प्रयोग करने में जुट गई है. सभी न्यूज चैनलों के इनपुट को कंबाइंड कर दिया गया है. ना केवल एक जगह बैठना बल्कि कामकाज भी साझा. ड्यूटी चार्ट भी एक. सूत्रों का कहना है कि कंबाइंड इनपुट का जिम्मा संजय बैनर्जी को सौंपा गया है. सेकेंड मैन बनाए गए हैं विभाकर श्रीवास्तव. डिप्टी ईपी विभाकर के नीचे कई ईपी लेवल के लोग भी हैं.
दूसरा बदलाव फाइव डे का वर्क कल्चर लागू करने के बारे में है. संजीव श्रीवास्तव और उपेंद्र राय अभी तक इसी वर्क कल्चर में काम कर रहे थे. हफ्ते में 5 दिन काम और 2 दिन आराम. अब सहारा में भी ऐसा ही कुछ करने का प्रयास कर रहे हैं ये लोग. प्रयास इसलिए कि सहारा नोएडा के बहुतेरे निर्णय लखनऊ से होते हैं. पता चला है कि चैनलों से 5 दिनों के हिसाब से सैंपल ड्यूटी चार्ट बनवाकर लिया गया है और फरवरी 15 तक इसे लागू करने की मंशा है.
आगे और भी बदलाव होने की चर्चा है. सभी चैनल्स का कामन कापी डेस्क, कामन एंकर पूल… आदि. बड़े हिंदी चैनलों की तर्ज पर एक जन गण का मन कार्यक्रम कर उसके लिए खुद बड़े-बड़े राजनेताओं को बुलाकर सहाराश्री के सामने अपनी साख जमा चुके संजीव श्रीवास्तव के आगे चुनौतियां अभी कई आने को हैं. चैनल से जुड़े एक वरिष्ठ सदस्य ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि सहारा समूह में सबसे बड़ी चर्चा ये शुरू हो गई है कि क्या एक बार फिर काम करने वालों की जगह लायल लोगों को बढ़ावा देने का काम शुरू कर दिया गया है. वैसे, असली चुनौती तो सहारा में कम पैसे पर, कटे हुए वेतन पर, गिरे हुए मनोबल से काम कर रहे कर्मचारियों का विश्वास जीतना है. अभी तक यहां के रक्षक ही घाटा दिखाकर कर्मचारियों के मनोबल को गिराते रहते थे.












Jeet_Bhati
January 30, 2010 at 8:39 pm
All d bst Sanjeev sir,
pr ye sb kahin koi chhalawa to nhi hain, combind krke phir se chhatne
ki kawayad suru krne k mund m to nhi h na??
विनीत कुमार
January 30, 2010 at 9:56 pm
हमें तो ये सब सुनकर डर लग रहा है।.
sahara
January 31, 2010 at 11:04 am
मैं भी कई साल सहारा में रह चुका हूं.. ऐसे नियमों पर कई बार चर्चा हुई और फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया… क्योंकि नए आने वाले लोग जोश-जोश में तो बहुत सारी घोषणाएं कर जाते हैं..लेकिन जैसे ही वो पुराने लोगों के सम्पर्क में आते हैं..उन्हें सहारा की हकीकत पता लग जाती है कि नए नियम कानून लाना अपने लिए मुसीबत बुलाने जैसा है…
praveen tomar
February 1, 2010 at 10:45 am
The most respected sanjeev sir,
sirf ak request aap ek baar jra MP CHANNEL ke OUTPUT&INPUT deptt. ki igo bhi dekhna hum jab last year SAHARA CHUNAV RATH ME MP&CG gye to vahan par ek bhi reporter khush nhi tha aur haan ek yahan se jitni badtamiji se ye log unse baat krte hain utna maine kisi channel mai nhi dekha,PCR deptt. ke saath ye log SADHNA compitition ki vajah se khoob commenting krte hain.PCR ke kuch buttering krne wale log hi bas khush rkhe jaate hain
SO SIR PLZ AAP AISE LOGO FIND OUT KAR ……………………….APNE VIVEK SE KARYAWAHI KRE.
sahab pranam !
February 1, 2010 at 4:05 pm
पेमेंट देने के भी तो प्रक्टिकल करो…..
…..की सिर्फ रोज नए साहब की साहिबी
दरअसल सहारा मीडिया ने “परिवर्तन” नियम की कसम खाई है.. इनके पास एक प्रयोगशाला है, तरह- तरह के नग है. रहीसी दिखाने वाले इस चैनल के मालिक और उनके चापलूस, अपने गिरेवान मैं जाख्कर कभी नहीं देखते… पहले की हस्तियों ने चैनल को कई उंचाइयो तक पहुचया अब उनसे ऊँचे वाले आये है…. ऐसे मैं तो ये सब होना ही था .” हम सीईओ है और काबिल भी ये दिखाने के लिए कुछ तो उठा पटक करना ही पड़ेगी.” हवाई जहाज से घूमने वाले अब हवा वाली गाडियों मैं घूमेगे, उसमे हवा भी लगेगी और हवा भरने के पैसे भी कम लगेगे…… जिनको बाज़ार से खबर बटोरने घोड़े दिए गए थे उनमे से कई को गधो के लायक भी नहीं समझा और ऐ सी कार ले ली गई है , बड़े साहब ने हिसाब देखा तो उन्हें चिंता पेट्रोल डीजल की महंगाई याद आ गई….अच्छा…. साहब के पास बुलंदयो के कैप्सूल्स है खाते ही आप हो या फिर आपका चैनल नंबर वन हो जायेगा. नेशनल international बन जायेगा, और regional उससे भी उपर…हालत ऐसी है जैसे “जेब मैं नहीं है धेला और बऊ चली मेला” कई bureau के पास तो चाय पिलाने के पैसे भी नहीं है स्टाफ के कई expenses कई महीनो से अटके है.. stringers की बात ही मत पूछो…दिहाड़ी इन मजदूरों को एक दो दिन नहीं साल भर के बिलों का पेमेंट नहीं हो रहा ..कुछ ईमानदार किस्म के लोगो ने तो पहले ही ईमानदारी से अपना हिस्सा लिया और चलते बने या फिर उनको ससम्मान चलता किया ..,.जिन लोगो ने बईमानी की उनको आचार्य रजनीश की तरह मौत दी जा रही है,की आप जीकर क्या करेंगे ..इस प्रयोगशाला में रोज नई खोज होती है अगले दिन यह खोजा जाता है की कल हमने क्या खोजा था….नए साहब अभी ऐसा ही कुछ खोज रहे है…………………
बाकि ब्रेक के बाद [b][/b][i][/i]
krishna mohan
February 2, 2010 at 4:47 am
प्यारे प्यारे संजीव जी और उपेंद्र जी ,
मुझे तो लगता है कि आप लोगों का अंजाम भी पुण्य प्रसून,बाजपई,विनोद दुआ और सुधीर चौधरी की तरह ही होगा .क्योंकि सहारा का आलम “बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का कटा तो क़तरा ए ख़ूं ना निकला” जैसा ही है.
krishna mohan
February 2, 2010 at 5:03 am
ज़िया बेक़रार है चम्चोन की बहार है
नया आया बालमा काटने का इंतेज़ाम है
शुभ कामनाओं सहित
कृष्णा
Ajay Basu
February 5, 2010 at 2:40 am
Sahara had seen so many experiments and initiative since its inception in 2003 as full fledged News Channel,need is its implementation which never continues due to its tradition of breaking professionalism.
Saharashri is no doubt a wonderful person and a man of vision,but people who take advantage of his loyality became a burden to the growth of the channel as they want channel to be run with their views.
Sanjeevji aapko rai hain ki pehle aise logo ko chaate or sidhe bahar ka raasta dikhaye…kyunki Sahara main kaam karne wale logo ki kami nahi lekin is tarah ke logo ki vajah se channel har bar dub jaati hain…aapke upar jimma hain aap kar sakte hain…
sidharth
February 16, 2010 at 7:22 am
yeh to kafi khushi ki bat hi………………….