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चार्जशीट से पहले इकबालिया बयान मीडिया को न दें

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सुझाव दिया है कि वह आपराधिक मामले में चार्जशीट दाखिल होने से पहले आरोपियों का इकबालिया बयान मीडिया को जारी नहीं करे। चीफ जस्टिस अजीत प्रकाश शाह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पुलिस-मीडिया इंटरैक्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस द्वारा तैयार दिशानिर्देश में कुछ फेरबदल करने का सुझाव दिया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सुझाव दिया है कि वह आपराधिक मामले में चार्जशीट दाखिल होने से पहले आरोपियों का इकबालिया बयान मीडिया को जारी नहीं करे। चीफ जस्टिस अजीत प्रकाश शाह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पुलिस-मीडिया इंटरैक्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस द्वारा तैयार दिशानिर्देश में कुछ फेरबदल करने का सुझाव दिया है।

खंडपीठ ने यह भी सुझाव दिया है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को मीडिया के समक्ष न लाया जाए। इसके अलावा न्यायालय ने पुलिस को यह भी सुझाव दिया है कि पुलिस को आरोपियों के बारे में अपनी राय नहीं देनी चाहिए। न्यायालय गैर सरकारी संगठन द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट के आरोपी का इकबालिया बयान पुलिस ने मीडिया में लीक कर दिया। याचिका में न्यायालय से गुहार की गई है कि आपराधिक मामलों में रिपोर्टिंग के लिए मीडिया पर पाबंदी होना चाहिए। याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि आरोपपत्र दाखिल होने से पहले मीडिया को खबरें प्रकाशित नहीं करनी चाहिए। उनका कहना है कि यह प्रचलन ठीक नहीं है। साभार : नईदुनिया

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0 Comments

  1. Kumar Sauvir, Mahuaa News, Lucknow

    February 9, 2010 at 4:09 pm

    apne galat-sahi ko manmane tareeke se pesh karne ka is se behatar aur koi tareeka bhee to nahi hota police-walo ke pas.
    yahee to aasaan hota hae ki 10-15 mustande kisi ko bhi patrakaro ke saamne dabochne ki shaeli me pesh kare, aur use pahle se hi ;bata-samjha’ de ki use kya bolna hae. Mar ke aage bhoot bhaagta hae. Aese me siwaye RATTOO tote ki tarah police ki jubaan UGAL dena laajimee hi hae.
    Dar asal police to adaalat ke pahle hee mukadme ka faisala patrakaaro ke saamne kar deti hae. Aur patrakaar bhee bade ofiicer ki chaye peekar aur uski taareef me kaseede padhte rahte hae, Ve samajhte hae ki aise officer unke dost ban gae hae, jabki aisa hota nahi hae, Jo policewaala aam aadmi ka nahi hua vo kisi dalal patrakaar ka kaise ho sakta hae.
    Kya patrakaaro ko yeh nahi dikhai padta hae ki kisi ke seene par takhti par uskaa nam likhwa kar police aakhir karna kya chaahti hae. sharm ki baat hae ki police ki chazaye-daaroo ki laalach me magar patrakar dalaal jaroor ban jata hae.
    KUMAR SAUVIR. Lucknow

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