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संजीव-उपेंद्र सम्मान लेने गए, रजनीकांत कर रहे छापेमारी

लोकसभा टीवी से सहारा समय पहुंचे फ्रेंकलिन : सहारा समय न्यूज चैनल से खबर है कि फ्रेंकलिन ने सीनियर प्रोड्यूसर के पद पर ज्वाइन किया है. वे पहले भी सहारा में रह चुके हैं. इन दिनों लोकसभा टीवी में कार्यरत थे. एक अन्य जानकारी के अनुसार संजीव श्रीवास्तव और उपेंद्र राय इन दिनों सम्मानित होने के अभियान पर निकले हुए हैं. संजीव जयपुर में हैं. उपेंद्र इंदौर में. संजीव श्रीवास्तव का सम्मान राजस्थान सरकार की तरफ से हो रहा है. उपेंद्र राय एक न्यास की ओर से सम्मानित किए जा रहे हैं. संजीव श्रीवास्तव को ‘अशोक गहलोत मित्रता पुरस्कार’ दिया जा रहा है. उपेंद्र राय को ‘भरोसा’ न्यास की तरफ से ‘भरोसा युवा पत्रकार’ पुरस्कार से नवाजा जा रहा है. इन दोनों वरिष्ठों की गैर-मौजूदगी में एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर रजनीकांत सिंह, जो सभी न्यूज चैनलों के संयुक्त आउटपुट हेड की तरह काम कर रहे हैं, आजकल छापेमारी का अभियान चला रहे हैं. 

लोकसभा टीवी से सहारा समय पहुंचे फ्रेंकलिन : सहारा समय न्यूज चैनल से खबर है कि फ्रेंकलिन ने सीनियर प्रोड्यूसर के पद पर ज्वाइन किया है. वे पहले भी सहारा में रह चुके हैं. इन दिनों लोकसभा टीवी में कार्यरत थे. एक अन्य जानकारी के अनुसार संजीव श्रीवास्तव और उपेंद्र राय इन दिनों सम्मानित होने के अभियान पर निकले हुए हैं. संजीव जयपुर में हैं. उपेंद्र इंदौर में. संजीव श्रीवास्तव का सम्मान राजस्थान सरकार की तरफ से हो रहा है. उपेंद्र राय एक न्यास की ओर से सम्मानित किए जा रहे हैं. संजीव श्रीवास्तव को ‘अशोक गहलोत मित्रता पुरस्कार’ दिया जा रहा है. उपेंद्र राय को ‘भरोसा’ न्यास की तरफ से ‘भरोसा युवा पत्रकार’ पुरस्कार से नवाजा जा रहा है. इन दोनों वरिष्ठों की गैर-मौजूदगी में एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर रजनीकांत सिंह, जो सभी न्यूज चैनलों के संयुक्त आउटपुट हेड की तरह काम कर रहे हैं, आजकल छापेमारी का अभियान चला रहे हैं. 

छापेमारी इसलिए ताकि कौन समय पर आ रहा है और कौन नहीं आ रहा है, इसका पता लगाया जा सके. रजनीकांत एक दिन सुबह पांज बजे अचनाक आफिस पहुंच गए और मार्निंग शिफ्ट के दो लोगों को मौके से गायब पाया. घंटे भर बाद ये लोग दिखे तो उनकी क्लास हुई. देर से आए लोगों ने माफी मांगकर आगे से समय पर आने का वादा किया. ऐसे ही, नाइट शिफ्ट के एक इंचार्ज समय पर आफिस नहीं आए तो उनकी भी क्लास हुई. सूत्रों के मुताबिक रजनीकांत सहारा समय की नौकरी को सरकारी नौकरी मानकर काम करने वालों को टाइट करने में लगे हुए हैं. प्रोफेशनल माहौल बनाने के लिए सहारा मीडिया के अंदर कई तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं, छापेमारी उसी का एक हिस्सा है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि नए लोग कुछ दिनों तक ज्यादा सक्रिय रहते हैं. कुछ समय बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाता है. जंग लगे सहारा के माहौल को बदलने में नए लोगों की सक्रियता से क्या नतीजा आता है, यह तो भविष्य में पता चलेगा.

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0 Comments

  1. विजय पाल सिंह

    February 11, 2010 at 1:57 pm

    बहुत बढ़िया रजनीकांत भाई…लगे रहो तभी सुधार आयेगा..

  2. shubhchintak

    February 11, 2010 at 1:59 pm

    Kya Hua Doston, ab Bhadas Nikalo, Bhai Rajnikant ji ke is chhapamar karyavahi par sab Sahar ko kosne wale kahan gaye

  3. abu ji

    February 11, 2010 at 6:36 pm

    Yeh Jaankar Accha Laga Ki Sahara Samay Mein Yeh Sab Chal Raha Hai.Par Sabhi Employees Ki Salary Mein Jo Katauti Hui Hai Sanjeev Ji Aur Upendra Ji usko Bhi Thik Karwa De. Taaki Logo Ko yeh na lage ki Aap Log to Mote Paise mein aa gaye hai par employees ka bhala nahi ho raha hai.Aur waise bhi khali pet bhajan nahi hota hai.Yahan to becharo ko kaam karna pad raha majboori mein kyoki bhahar job nahi hai.

  4. Dinesh

    February 11, 2010 at 7:31 pm

    Rajnikant ji se aysee he ummid thee. Puri ummid hai ki sahara me sudhar hoga

  5. अमित गर्ग

    February 12, 2010 at 10:43 am

    रजनीकांत जी, सहारा समय में नए लोगों को भी मौका देने या दिलाने के सार्थक प्रयास करेंगे तो भी बहुत मेहरबानी होगी. शायद नए पत्रकारों को भी जंग लगने से बचा सकें आप.

  6. divyajyoti

    February 12, 2010 at 12:37 pm

    Welldone Rajnikantjee.Keep it up. Sahara ko kamchoron se bachane ki bahut jarurat hai nahin to ye sansthan baith jayega.

  7. aman

    February 13, 2010 at 4:41 am

    छापे मारो या कुछ और…कुछ नहीं होगा भाई। रजनीकांत जी आपका नंबर कब आ रहा है पुरस्कार लेने का. पुरस्कार पाओ और बड़े आदमी बनो। पता नहीं, सहारा में आते ही लोगों को क्या हो जाता है। इससे पहले न तो पुरस्कार मिला किसी को और ना ही किसी ने कहीं छापेमारी की होगी। सुब्रत राय साहब के बड़े परिवार में आकर जो करना वो कर लो भाई। सच, बड़े बड़े हाथी पालते हैं सहाराश्री।

  8. drishti

    February 13, 2010 at 4:45 am

    सहारा का सहारा है तो फिक्र किस बात की। दोस्तो सहारा वाले कभी नहीं सुधरेंगे। जिसे वक्त पर आने की कभी आदत ही नहीं थी वो अब क्या वक्त की परवाह करेगा। छापा मारकर कुछ नहीं होता। सहारा में एक कर्तव्य काउंसिल है। ज्यादा उंगल करोगे तो लोग वहां जाएंगे और उनको वहां दूध पिलाया जाएगा। रजनीकांत जी, लगता है कि संजीव और उपेंद्र जी से पहले बाहर होने की बारी आपकी ही आने वाली है। क्योंकि आपकी छापेमारी के बाद सहारा में खेमेबाजी शुरू हो गई होगी। बहुत सपोड़े हैं वहां, मौका आने पर डसेंगे जरूर।

  9. sunil yadav

    February 17, 2010 at 10:44 am

    sahara ka to bhagwan hi sahara hain, kyoki keval subrat rayji ki meharbani par channel kitne din chalega, bina sansani paida kiye kam nahi chalega, aajkal jyadatar channel isi ke sahare chal rahe hain, waise bhi RKB ke karmo ka phal to sahara ko bhugatana hi padega

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